Bangalore School Admission News: क्या आप भी कर्नाटक के स्कूलों में अपने बच्चे की उम्र के कारण दाखिला ना दिए जाने के फैसले से परेशान हैं? तो आपको बता दें कि कर्नाटक सरकार ने स्कूल में दाखिले की आयु सीमा में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

पूर्व में अभिभावकों ने बच्चों के आयु सीमा प्रतिबंध में छूट की मांग की थी। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में प्रवेश के लिए किए गए नियमों में बदलाव से विभिन्न स्कूल बोर्ड प्रबंधकों में कंफ्यूजन का माहौल बन गया है। पूर्व में निर्धारित मानदंडों के अनुसार अभिभावकों ने प्रीस्कूल में प्रवेश दिए जाने के फैसले पर बच्चों के आयु प्रतिबंध में छूट मांगी थी।
अंग्रेजी समाचार पत्र द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार,अभिभावकों की इस चिंता का समाधान करते हुए कर्नाटक सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु सीमा में एक बार की छूट देकर उनकी दलीलों को स्वीकार कर लिया है। बुधवार को घोषित इस निर्णय के लेकर विभिन्न बोर्ड्स में राहत और असमंजस दोनों का माहौल बन गया है।
बता दें कि कर्नाटक सरकार के इस निर्णय से 1 जून, 2025 तक कम से कम पांच वर्ष और पांच महीने के हो चुके बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश लेने की अनुमति दी जाएगी। इस आयु वर्ग के बच्चों ने अपनी प्री-प्राइमरी की शिक्षा पूरी कर ली है। कर्नाटक सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का उद्देश उन माता-पिताओं की निराशा को कम करना है, जिन्होंने अपने बच्चों को पिछले दिशा-निर्देशों के तहत प्रीस्कूल में दाखिला दिलाया था।
क्यों किया गया संशोधन?
समाचार पत्र इंडियन एक्प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, नीति में यह संशोधन शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 और अनिवार्य शिक्षा नियम 2012 से प्रेरित है। इसके अनुसार कक्षा 1 में नामांकन के लिए पात्र होने के लिए बच्चों को शैक्षणिक वर्ष के 1 जून तक छह वर्ष की आयु प्राप्त करनी होती है। बता दें कि इस प्रस्ताव का मूल्यांकन करने का कार्य राज्य शिक्षा नीति आयोग को सौंपा गया था। आयोग ने मूल रूप से छह वर्ष की न्यूनतम आयु को बरकरार रखा। साथ ही यह बताया गया कि ये संवैधानिक जनादेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और वैश्विक शैक्षिक मानदंडों के अनुरूप है। इसके तहत छोटे बच्चों में तनाव मुक्त शिक्षा और मानसिक विकास के महत्व पर जोर दिया जाएगा।
सरकार है की युक्ति
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कर्नाटक राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा ने अभिभावकों की चिंताओं का हवाला देते हुए सरकार के फैसले को उचित ठहराया। बड़ी संख्या में बच्चे पहले ही प्री-प्राइमरी स्कूलिंग कर चुके होते हैं। उन्होंने इस निर्णय को सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान एक मिसाल बताया।
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शिक्षा मंत्री बंगरप्पा ने इस बात पर जोर दिया कि फिलहाल यह छूट केवल राज्य बोर्ड द्वारा संचालित स्कूलों पर लागू होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कहा कि वर्ष 2026-2027 शैक्षणिक वर्ष से छह साल की आयु के मानदंड को सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अन्य राज्य छह साल के मानदंड को सख्ती से पालन करते हैं और माता-पिता को अपने बच्चों की प्री-प्राइमरी शिक्षा की योजना उसी के अनुसार बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि कक्षा 1 में सुचारू प्रगति सुनिश्चित हो सके।
स्कूल बोर्ड कंफ्यूज
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले के बावजूद, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल राज्य सरकार की अस्थायी छूट और एनईपी के आदेशों का पालन करने के बीच फंसे हुए हैं। निजी स्कूल प्रबंधन संघों ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को अवैज्ञानिक और संभावित रूप से हानिकारक बताते हैं।
कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के एसोसिएटेड मैनेजमेंट (केएएमएस) के अध्यक्ष डी शशिकुमार ने इंडियन एक्पप्रेस को दिए एक बयान में इस फैसले का कड़ा विरोध जताते हुए तर्क दिया कि एनईपी की छह साल से अधिक की प्रवेश आयु गणना बच्चों के बौद्धिक विकासात्मक विज्ञान पर आधारित है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार के फैसलें कानूनी चुनौतियों को जन्म दे सकते हैं और शैक्षिक प्रणाली में जनता का विश्वास खत्म कर सकते हैं।


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