मोरारजी देसाई एक भारतीय राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनका निधन 10 अप्रैल 1995 को हुआ। मोरारजी देसाई ने 1977 से 1979 के बीच भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया और जनता पार्टी द्वारा गठित सरकार का नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने अपने राजनीति करियर के दौरान सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया जैसे कि बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री और उप प्रधान मंत्री।

मोरारजी देसाई भारत के छत्तीसवें प्रधानमंत्री थे और भारतीय राजनीति में अपनी सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नायकत्व के लिए प्रसिद्ध थे। उनका जीवन और शिक्षा का सफर बहुत प्रेरणादायक था, जो न केवल भारतीय राजनीति में बल्कि समाज के लिए भी एक आदर्श बना।
मोरारजी देसाई का जन्म
मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के बडेली गांव में हुआ था। उनका संबंध एक ब्राह्मण परिवार से था। उनके पिता रणछोड़जी देसाई भावनगर (सौराष्ट्र) में एक स्कूल अध्यापक थे। वह अवसाद (निराशा एवं खिन्नता) से ग्रस्त रहते थे, अत: उन्होंने कुएं में कूद कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। पिता की मृत्यु के तीसरे दिन मोरारजी देसाई की शादी हुई थी।
कितने पढ़ें- लिखे थे मोरारजी देसाई?
मोरारजी देसाई की प्रारंभिक शिक्षा गांव के एक सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई में जाकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। मोरारजी देसाई ने अपनी शिक्षा 1918 में बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) के रूप में समाप्त की। वे एक मेधावी छात्र थे और उनकी रुचि भारतीय राजनीति और समाज के सुधार में थी।
राजनीति में प्रवेश
मोरारजी देसाई का राजनीति में प्रवेश भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय हुआ। वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे और स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई आंदोलन किए। 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
मोरारजी देसाई ने भारतीय राजनीति में अपने करियर की शुरुआत 1952 में की, जब वे कांग्रेस पार्टी के सदस्य बने और बाद में गुजरात के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। 1967 में उन्होंने गुजरात में कांग्रेस पार्टी से अलग होकर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाई और "कांग्रेस (O)" नामक एक गुट का गठन किया।
प्रधानमंत्री बनने का सफर
मोरारजी देसाई की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता तब मिली जब 1977 में उन्होंने जनता पार्टी की सरकार के तहत प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। यह सरकार आपातकाल के बाद बनी थी और यह भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार और प्रशासन में सुधार की दिशा में कई कदम उठाए। उनकी सरकार ने नागरिक स्वतंत्रताओं को बहाल किया और आपातकाल के दौरान लगाए गए कई कठोर नियमों को हटाया।
व्यक्तिगत जीवन
मोरारजी देसाई अपने व्यक्तिगत जीवन में बहुत सादगी से रहते थे और उनका व्यक्तिगत आहार भी बहुत साधारण था। बात करें उनके वैवाहिक जीवन की तो मोरारजी देसाई की पत्नी का नाम गुजराबेन देसाई था। उनका विवाह 1911 में हुआ था, जब मोरारजी मात्र 15 वर्ष के थे। बात करें उनके बच्चों की तो मोरारजी के उनकी पत्नी से पांच बच्चे थे, जिनमें से तीन बच्चों बेटी विरुमती और इंदु, और बेटा कांतिलाल का निधन बचपन में ही हो गया था। जबकि मोराजी देसाई की पत्नी मुजराबेन की मृत्यु 1981 में 81 वर्ष की आयु में हुई।
अंतत: हम यही कह सकते हैं कि मोरारजी देसाई का जीवन भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण आदर्श प्रस्तुत करता है। उनकी ईमानदारी, संघर्षशीलता, और नैतिक मूल्यों ने उन्हें जनप्रिय बना दिया। उन्होंने यह साबित किया कि राजनीति में सच्चाई और निष्कलंक चरित्र के साथ काम करके समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका आदर्श हमें यह सिखाता है कि सत्ता और सफलता से अधिक महत्वपूर्ण है अपने नैतिक मूल्यों का पालन करना और समाज की सेवा करना। मोरारजी देसाई का योगदान हमेशा प्रेरणा देने वाला रहेगा।


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