Women's Day 2025: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए हम सभी बेहद उत्सुक हैं। इस दिन को और अधिक खास बनाने के लिए महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया जाता है हालांकि इस वर्ष हम महिला दिवस को थोड़ा अलग ढंग से मनाएंगे।

महिला दिवस पर हम देश भर के विभिन्न राज्यों की उन महिलाओं के बारे में जानेंगे, जिन्होंने अपने राज्य को पहचान दिलाई है, जो अपने कार्यक्षेत्र में गृह राज्य का प्रतिनिधित्व भी करती हैं। प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाई जाती है और उनके योगदानों की सराहना की जाती है।
इस लेख में हम आगामी 8 मार्च तक देश के प्रमुख राज्यों में महान महिला हस्तियों के योगदान की कहानी अपने पाठकों को बताएंगे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इस खास सीरिज की शुरुआत आज हम देश-विदेश में कर्नाटक राज्य को अलग पहचान दिलाने वाली शिक्षाविद्, समाज-सेवी, लेखिका सुधा मूर्ति को जानेंगे थोड़ा और करीब से...
कौन हैं सुधा मूर्ति?
सुधा मूर्ति का नाम आज देश-विदेश में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वह एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान, सामाजिक सेवा और अपने सशक्त व्यक्तित्व के माध्यम से न केवल कर्नाटक राज्य बल्कि पूरे भारत का गौरव बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जैसे खास अवसर पर सुधा मूर्ति का उल्लेख करना गर्व की बात है क्योंकि उन्होंने महिला सशक्तिकरण और समाज के विकास के लिए अतुलनीय योगदान दिया है।
सुधा मूर्ति एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, लेखिका और समाज सेविका हैं। मूर्ति ने अपने जीवन में असंख्य उपलब्धियां प्राप्त की हैं। उन्होंने हमेशा सादगी और ईमानदारी को अपना पहचान बताया है। इसके साथ-साथ उन्हों परोपकार और समाजसेवा के कार्यों में भी अपना उल्लेखनीय योगदान दिया हैं और आज भी इन कार्यों में अग्रसर हैं। उन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का कार्य किया है। आज, सुधा मूर्ति से केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि पूरे देश की महिलाएं और बच्चे प्रेरणा ले रहे हैं।
सुधा मूर्ति ने महिलाओं के उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं। वह कर्नाटक राज्य की पहचान बन गई हैं। सुधा मूर्ति कर्नाटक की वो चेहरा हैं जिनकी वजह से राज्य को विश्वभर में नई पहचान मिली है। कर्नाटक की बेटी और मां के रूप में शिक्षा का ज्योत जला रहीं सुधा मूर्ति की जीवन यात्रा संघर्ष और प्रेरणा से भरी हुई है। आइए उनके जीवन पर एक विस्तृत दृष्टिकोण डालते हैं।
हावेरी जिले से बेंगलुरु IISc तक का सफर
सुधा मूर्ति का जन्म 19 अगस्त 1950 को कर्नाटक के हावेरी जिले के शिगाँव में हुआ था। उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही शिक्षा के प्रति उनका विशेष लगाव था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा शिगाँव में हुई, जिसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वह अपनी कक्षा में टॉपर थीं और उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री प्राप्त की। सुधा मूर्ति की शैक्षणिक यात्रा उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने पुरुष-प्रधान समाज में एक महिला इंजीनियर के रूप में न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपने विचारों और सिद्धांतों के माध्यम से भी समाज को बदला।
केवल एक कुशल लेखिका नहीं हैं सुधा मूर्ति
सुधा मूर्ति एक कुशल लेखिका होने के साथ-साथ एक समाज सेविका भी हैं। उन्होंने कन्नड़ और अंग्रेजी में कई चर्चित और लोकप्रिय पुस्तकें लिखी हैं। सुधा मूर्ति की किताबें जीवन के मूल्यों, भारतीय संस्कृति और समाज के प्रति जागरूकता को बढ़ाती हैं। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकें 'वाइज एंड अदरवाइज', 'थ्री थाउजेंड स्टिचेज', और 'हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड' हैं।
सुधा मूर्ति को इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष के रूप में भी जाना जाता है। यह संस्था विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्य करती हैं। उन्होंने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।
...जब सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुईं सुधा मूर्ति
सुधा मूर्ति को उनके सामाजिक और शैक्षणिक योगदान के लिए कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक है। इसके अलावा, उन्हें "राज्योत्सव पुरस्कार" और "आरके नारायण अवॉर्ड" जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं।
नारी शक्ति का प्रतीक हैं सुधा मूर्ति
सुधा मूर्ति को हम केवल एक सफल लेखिका और समाज सेविका के रूप में ही नहीं बल्कि एक ऐसी महिला के रूप में भी जानते हैं जो कि नारी शक्ति की जीवंत उदाहरण हैं। उनके योगदान से न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे भारत में महिलाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सुधा मूर्ति ने यह सिद्ध किया है कि अगर एक महिला ठान ले तो वह समाज को बदलने की क्षमता रखती है।
सुधा मूर्ति के अनमोल विचारों से प्रेरणा लें..
- "कभी भी अपने ड्रीम्स को न छोड़ें। इस बात की फिक्र न करें कि वे कितने मुश्किल हैं या आप उन्हें पाना असंभव है। अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं और कभी हार नहीं मानते तो एक न एक दिन उन्हें जरूर हासिल कर लेंगे।"
- "अपने और दूसरों के प्रति काइंड रहें। इस दुनिया को काइंडनेस और कंपैसन की बहुत जरूरत है। इस संसार में आप एक ऐसी शक्ति बनें जो दूसरे के जीवन में बदलाव लाने में मदद करे।"
- "एक्शन के बिना विजन मात्र एक स्वप्न है, वहीं विजन के बिना एक्शन केवल टाइम पास है। हालांकि विजन और एक्शन अगर एक साथ आ जाएं तो दुनिया बदल सकते हैं।"
- "जीवन का सबसे बड़ा ऐश्वर्य है सही किस्म की आजादी पाना।"
- "भविष्य को प्रिडिक्ट करने का सबसे बढ़िया तरीका है उसे क्रिएट करना।"
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