Career In History In India: भारत विद्या या इंडोलॉजी के तहत बहुत से क्षेत्र आते हैं मसलन, सांस्कृतिक नृविज्ञान, सामाजिक नृविज्ञान, दर्शनशास्त्र, इतिहास, ऐतिहासिक भाषा विज्ञान, सांस्कृतिक अध्ययन, साहित्यिक इतिहास तथा दक्षिण एशिया के विभिन्न धर्म जिनमें हिंदू धर्म (शैव वैष्णों मतों के साथ), जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, लोक धर्म और जनजातीय धर्मों के अलावा इस अध्ययन में पारसी और इस्लाम धर्म को भी शामिल किया जाता है।

इतिहास में 12वीं के बाद कैसे बनाएं करियर? (Career In History After 12th & Graduation)
यदि आप कक्षा 12वीं के बाद इतिहास में करियर बनाना चाहते हैं तो आपको पहले 10 + 2 स्तर पर इतहास की पढ़ाई करनी होगी और मान्यता प्राप्त बोर्ड से इतिहास में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास होंगा होगा। उसके बाद आपको तीन साल के ग्रेजुएशन में एडमिशन मिलेगा, ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद आपको पीजी और फिर पीएचडी पूरी कर के आप एक इतिहास प्रोफ़ेसर बन सकते हैं।
इतिहास में विशेषज्ञता के फायदे क्या हैं ?
इतिहास को तीन प्रमुख विशेषज्ञताओं में विभाजित किया जा सकता है जैसे पुरातत्व, संग्रहालय और अभिलेखीय अध्ययन। इतिहास में डिग्री होने के बाद आप इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर इनमें से अधिकांश पाठ्यक्रमों को राष्ट्रव्यापी रूप से पेश किया जाता है। इसलिए एक इतिहास की डिग्री, मास्टर्स स्तर पर विशेषज्ञता द्वारा समर्थित कई करियर का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
इतिहास में करियर पॉसिबिलिटीज की संभावनाएं ?
इंडोलॉजी की फील्ड में बहुत अच्छी संभावनाएं हैं। इसकी कई वजहें हैं एक तो यह कि यह बहुविषयक क्षेत्र है। इस वजह से इस क्षेत्र में विशेषज्ञता बहुत कम लोग ही हासिल कर पाते हैं। लेकिन जो लोग हासिल करते हैं, उन्हें इस क्षेत्र में अच्छे करियर की भरपूर संभावनाएं रहती हैं। दरअसल एक इंडोलॉजिस्ट या भारत विद्या विज्ञानी कई चीजों का विशेषज्ञ होता है। वह भारतीय उपमहाद्वीप का विश्वसनीय इतिहासकार होता है। उसे इस प्रायद्वीप की संस्कृति, नृशास्त्र, भाषाओं, अनुवांशिकी तथा भूगोल का भी संपूर्ण ज्ञान होता है। एक इंडोलॉजिस्ट कम से कम 4 से 5 भाषाएं जानता है। हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत के अलावा वह पाली, तमिल और उर्दू भी आमतौर पर जानता है। दरअसल बिना कम से कम 4 भाषाएं जाने भारतीय उपमहाद्वीप को समझा ही नहीं जा सकता।
इन जगहों पर है भारी डिमांड
इंडोलॉजिस्ट एक्सपर्ट की तमाम क्षेत्रों में काफी मांग होती है। साहित्यिक संस्थानों, धर्म विद्या संस्थानों के साथ-साथ सांस्कृतिक संस्थानों में भी इंडोलॉजिस्टों की मांग काफी ज्यादा होती है। वास्तव में भारतीय संस्कृति और समाज की प्रकृति की गतिशीलता को समझने में सबसे ज्यादा मदद इंडोलॉजिस्टों ही करते हैं। इसलिए अगर कहा जाए कि देश के विभिन्न इतिहास अध्ययन संस्थानों और राजनीति विज्ञान पढ़ने, पढ़ाने वाले संस्थानों में भी इनकी जरूरत है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। भारत में जितने भी इंडोलॉजिस्ट तैयार होते हैं, उनमें से 90 फीसदी की खपत तो अकेले शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों के रूप में ही हो जाती है। लेकिन सिर्फ शिक्षण संस्थानों में ही इनकी जरूरत नहीं होती। मीडिया, पर्यटन, पुरातत्व आदि के क्षेत्र में भी इंडोलॉजिस्टों की जबरदस्त मांग होती है।
विशेषज्ञता से बनेगा काम
एक इंडोलॉजिस्ट तभी अपने काम के लायक होता है, जब वह अपनी उच्च शिक्षा पूरी तरह से हासिल कर लेता है। बाकी क्षेत्रों में आप एक निश्चित अवधि के बाद काम करने के लायक हो जाते हैं। इस तरह आप उन क्षेत्रों में काम भी करते रहते हैं और अपना उच्च अध्ययन भी पूरा करते रहते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में ऐसी सुविधा नहीं है। इस क्षेत्र में आप तभी अपना काम करना शुरू कर सकते हैं, जब आपकी पढ़ाई पूरी हो जाए।
इतिहास के क्षेत्र में सैलरी
इस क्षेत्र में शुरू से ही अच्छे पैसे मिलते हैं, क्योंकि शुरू से ही आप वह काम कर रहे होते हैं, जो अंतिम रूप से किसी विशेषज्ञ को करना होता है। इसलिए एक इंडोलॉजिस्ट की शुरुआती नौकरी भी 50-60 हजार रुपए महीने से कम की नहीं मिलती और जैसे-जैसे आपका इस क्षेत्र में अनुभव बढ़ता है, आपका वेतन भी आकर्षक हो जाता है।
इतिहास में डिग्री/डिप्लोमा कोर्स के प्रमुख संस्थान
- दिल्ली विश्वविद्यालय
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
- जामिया मिल्लिया इस्लामिया
- केटीयूजेएम, रायपुर
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
- सागर यूनिवर्सिटी, सागर
- बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय
- कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय


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