देश में लाखों लोग ऐसे हैं जो शहरों में जा कर नौकरी करने की जगह कृषि को अपने करियर के रूप में अपनानते हैं। ऐसे में अगर आप इस क्षेत्र में हैं और कमाई का साधन कम है तो हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी फसल के बारे में जो आपको पारंपरिक खेती के अलावा मुनाफा कमाने का मौका देता है। हम बात कर रहे हैं अश्वगंधा की, जिसकी खेती कर आप एक से डेढ़ लाख रुपए तकाका मुनाफा कमा सकते हैं।

आगे हम कृषि विशेषज्ञ से बातचीत पर आधारित जानकारी आपको देंगे और बतायेंगे कि अश्वगंधा की खेती आपके करियर को बूस्ट दे सकती है।
क्या है अश्वगंधा, क्या है इसकी खासियत?
सबसे पहले आपको बता दें कि पूरे देश में अध्वगंधा की डिमांड करीब 15 मीट्रिक टन से अधिक है। जबकि हमारे देश में इसकी पैदावार बहुत सीमित क्षेत्रों में होता है और डिमांड पूरी नहीं हो पाती है। इसकी पूर्ति जंगलों से और गांवों के बाहर बंजर जमीनों पर होने वाली पैदावार से की जाती है। इन जगहों से किसान अश्वगंधा को लेकर आते हैं और उसे प्रोसेस कर के बाज़ार में बेचते हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद इसकी डिमांड पूरी नहीं हो पाती है।
अश्वगंधा एक औषधीय फसल है। इसकी डिमांड आयुवेर्दिक दवा कंपनियों के अलाव ऐलोपैथ की दवाएं बनाने वाली कंपनियों में भी होती है। यह रबी की फसल है जिसके लिए औसत तापमान 30 से 40 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए।
इसकी खेती बलुई दोमट से हल्की रेतीली मिट्टी में होती है। ध्यान रहे ज्यादा पानी डालने से फसल मर सकती है इसलिए आपकी कृषि भूमि पर जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मिट्टी का पीएच मान 6 से 8 के बीच होना चाहिए। एक हेक्टेयर भूमि के लिए 10 किलो बीच पर्याप्त होता है। इसकी बुवाई कतारों में की जाती है, जिससे बीज कम लगता है। अच्छी फसल के लिए प्रति वर्ग मीटर 80 से 100 पौधे लगायें। एक हेक्टेयर भूमि में 8 से 10 लाख पौधे लगाये जा सकते हैं।

रबी के मौसम में इसके तीन से पांच बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। यह फसल वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद में अच्छी होती है। अगर मिट्टी उर्वरक है तो 15 किलो नाइट्रोजन और 15 किलो पोटेशियम पर्याप्त है। ध्यान रहे इस फसल में खरपतवार की आशंका ज्यादा रहती है इसलिए समय-समय पर इसे हटाते रहना होगा। अगर बुवाई के 21 से 25 दिन के भीतर अच्छे से ध्यान दिया तो फसल अच्छी होती है। इसमें कीट लगने की आशंका भी रहती है इसलिए कृषि विशेषज्ञों से समय-समय पर राय लेना लाभदायक होता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
औषधीय एवं सुगंधीय पादप अनुसंधान संस्थान के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीएल सारण ने दूरदर्शन पर एक कार्यक्रम में बताया कि यह जड़ वाली फसल है और उसके लिए सबसे अच्छी मिट्टी बलुई मिट्टी होती है। साथ ही इसमें पोटाश की मात्रा भी अच्छी होती है। गर्मियों में तापमान 30 से 40 के बीच रहता है तो और सर्दियों में तापमान जितना नीचे जाता है, फसल उतनी अच्छी होती है।
कहां-कहां होती है अश्वगंधा की अच्छी फसल?
गर्मियों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजारत, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों में इसकी अच्छी फसल हो सकती है। जबकि सर्दियों में यूपी, एमपी, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा जहां तापमान बहुत नीचे जाता है, वहां इसकी फसल अच्छी होती है।
डॉ. सारन ने बताया कि अश्वंधा की बहुत सारी किस्में होती हैं, लेकिन जिनकी डिमांड ज्यादा है वो मुख्यत: दो प्रकार की ही होती हैं। एक अश्वगंधा जिसकी जड़ों में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है, इसे नागोरी अश्वगंधा कहते हैं। इसकी जड़ें ज्यादा मोटी होती हैं। दूसरी किस्म होती है ज्वार अश्वगंधा। इसकी जड़ें थोड़ी कम मोटी होती हैं।
अश्वगंधा की खेती में निवेश
अश्वगंधा की खेती के लिए बीज की कीमत 350 रुपए से 450 रुपए तक होती है। 1 हेक्टयेर भूमि में पांच ट्रॉली गोबर खाद लगती है। 1500 रुपए प्रति ट्रॉली का मतलब 7500 रुपए के आस-पास खाद लगेगी। इसके अलावा कीटनाशक दवाएं 1 से दो हजार रुपए तक। वहीं फॉसफोरस और पोटाश की कीमत करीब 3 हजार रुपए मान कर चलिये। कुल मिलाकर आपका कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर आता है।
अश्वगंधा की खेती से कितनी कमाई होती है?
अश्वगंधा की फसल पांच से छह महीने में पूरी हो जाती है। अश्वगंधा की खेती पर एक हेक्टयर में करीब 50 किलो बीज पैदा होता है और 10 से 20 कुंतल तक जड़ें पैदा होती हैं। 50 किलो बीज की कीमत कीरब 20 से 30 हजार रुपए होती है, जैसा बाजार में भाव होता है। वहीं जड़ों की कीमत 150 से 200 रुपए प्रति किलो होती है। मतलब डेढ़ से दो लाख रुपए तक की कमाई आसानी से कर सकते हैं। अगर फसल बहुत अच्छी हुई तो आमदनी 3 लाख रुपए तक भी जा सकती है।
कृषि में अपना करियर तलाश रहे लोगों के लिए हमारी यह सीरीज़ आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा।


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