Swachh Diwali Shubh Diwali Campaign: कैसे दिवाली मना रहे हैं असम, नागालैंड, कर्नाटक और नवी मुंबई के लोग

Swachh Diwali Shubh Diwali Campaign: पूरे देश में रोशनी का त्योहार को लेकर धूम मची हुई है। शहरों और गांव की सड़कों को लाइट्स एवं अन्य सजावटी वस्तुओं से सजाया गया है। देश के हर कोने में लोग दिवाली मनाने को लेकर काफी उत्साहित हैं। दिवाली से पहले लोग घर की साफ सफाई करते हैं और दीपोस्तव की खुशियां बांटते हैं।

स्वच्छता वाली अनोखी दिवाली: कैसे दिवाली मना रहे हैं असम, नागालैंड, कर्नाटक और नवी मुंबई के लोग

दिवाली, दीपावली या दीपोस्तव के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली भारत में सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह संस्कृत शब्द "दीपावली" से उत्पन्न हुआ है, इसका सरल अनुवाद "रोशनी की पंक्तियाँ" है। यह त्योहार के सार को पूरी तरह से समाहित करता है। दिवाली एक हिंदू त्योहार है जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

इस वर्ष दिवाली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। इस वर्ष दीपावली को अनोखी बनाने के उद्देश्य से देश के विभिन्न राज्यों में स्वच्छता वाली दिवाली मनाई जा रही है। इसके तहत स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली का अभियान चलाया जा रहा है। प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन राज्यों में मुख्य रूप से असम, नागालैंड, कर्नाटक और नवी मुंबई शामिल है। आइए जानते हैं इन राज्यों में कैसे मनाई जा रही है दिवाली-

असम की अनोखी पहल: पारंपरिक स्वच्छ दिवाली दिखाएगी 'वेस्ट टु वेल्थ' की राह

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत देश भर के शहरों में 'स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली' अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत असम ने दिवाली के बाद होने वाले कचरे का प्रबंधन करने के लिए एक अनूठी पहल की है। असम में पारंपरिक रूप से दिवाली पर लोग आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रवेश द्वारों पर केले के पेड़ों और पत्तियों पर मिट्टी के दीपक प्रज्ज्वलित करते हैं। इसके लिए दिवाली की रात जिन पेड़ों के तनों का इस्तेमाल होता है, वो अगले दिन किसी काम के नहीं रहते और उनके निस्तारण की जिम्मेदारी शहरी स्थानीय निकाय पर आ जाती है। ऐसे में इस बार दिवाली के बाद स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 'वेस्ट टु वेल्थ' सिद्धांतों के आधार पर कचरा प्रबंधन करने की दिशा में काम हो रहा है।

असम में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी टीम ने दिवाली के बाद कचरे को खत्म करने के लिए विशेष योजना बनाई है। इस योजना के तहत जो पारंपरिक दिवाली मनाए जाने के बाद जो केले के पेड़, तने और पत्तियां अगले दिन बचेंगे, उनको शहरी स्थानीय निकायों के आसपास मौजूद राष्ट्रीय उद्यानों में हाथियों के चारे के रूप में उपयोग करने के लिए सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा जहां आसपास में कोई राष्ट्रीय उद्यान नहीं हैं, वहां के नागरिक केले के पेड़ों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर निस्तारण के लिए शहरी स्थानीय निकायों को सौंप देंगे। वहां से नगर निगम के कर्मचारी इन कटे हुए पेड़ों के तनों को गौशालाओं या केंद्र में स्थित 'वेस्ट टु कम्पोस्ट' पिट्स में सौंप देंगे। इस तरह के कचरे को खत्म करने के लिए यहां पहले से ही विभिन्न जगहों पर 104 सेंट्रल कंपोस्ट पिट्स और 6245 घरेलू स्तर पर खाद बनाने के लिए किए गए गड्ढे मौजूद हैं।

नागालैंड के हरित बाज़ारों ने स्वच्छ दिवाली मनाई

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा 'स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली' अभियान (Swachh Diwali Shubh Diwali Campaign in Hindi) शुरू किए जाने के बाद से, अन्य राज्यों की तरह, नगालैंड भी इस साल पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दे रहा है। व्यक्तिगत घरों से अतिरिक्त, सामूहिक प्रयासों से बाजारों और आस-पड़ोस में स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ, दिवाली के दौरान स्वच्छता की भावना पूरे समुदाय तक फैलती है, जो उत्सव के माहौल को और बढ़ाती है। इसके अनुरूप, नागालैंड में तुएनसांग नगर परिषद ने एक नई पहल शुरू की है, जिसमें बाजार के सभी दुकानदारों को अपने प्रवेश द्वार के पास एक हरा पौधा लगाने के लिए कहा गया है, जो स्वच्छ और हरित दिवाली के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह विचारशील दृष्टिकोण न केवल पर्यावरण जागरूकता में योगदान देता है, बल्कि एक स्थायी और आनंददायक त्योहार के मौसम के लिए एक साझा जिम्मेदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए एक सामूहिक प्रयास के ज़रिए, नागालैंड के बाजार "अपना थैला स्वयं लाये" अवधारणा का समर्थन कर रहे हैं। इस अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए, मंगकोलेम्बा नगर परिषद ने यह अनिवार्य कर दिया है कि दुकानें पेपर बैग सहित किसी भी प्रकार के कैरी बैग की पेशकश करने से बचें। इसके बजाय, जनता को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित और निर्देशित किया जाता है कि खरीदारी करते समय वे अपना थैला स्वयं लाये। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करना और दैनिक जीवन में स्थायी प्रथाओं के लिए व्यक्तिगत योगदान के महत्व पर जोर देते हुए पर्यावरणीय जिम्मेदारी की संस्कृति को स्थापित करना है। यह पर्यावरण के अनुकूल आदतों को बढ़ावा देने और छोटे पैमाने पर की जाने वाली गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए एक समुदाय-संचालित प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेडजिफेमा नगर परिषद ने 'आरआरआर - प्रोत्साहन के साथ' कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल जनता को आरआरआर सुविधा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो अपशिष्ट पृथक्करण को बढ़ावा और अपशिष्ट को संपत्ति में बदलने की अवधारणा को बढ़ाती है। अधिकतम भागीदारी के लिए, ये शहर अपने कचरे को निर्दिष्ट केंद्रों में लाने वालों के लिए कूपन जारी कर रहा है, विभिन्न दुकानों से पौधे, आइसक्रीम, चॉकलेट और अन्य वस्तुओं जैसे पुरस्कार प्रदान कर रहा है, ताकि सकारात्मक पर्यावरणीय प्रथाओं को मजबूत किया जा सके। नागालैंड में दीमापुर नगर परिषद और चुमुकेदिमा नगर परिषद ने रिलायंस ट्रेंड्स के साथ सहयोग किया है, ताकि इलाके में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सफाई मित्रों को उपहार कूपन के साथ इनाम दिया जा सके।

स्वच्छता वाली अनोखी दिवाली: कैसे दिवाली मना रहे हैं असम, नागालैंड, कर्नाटक और नवी मुंबई के लोग

कर्नाटक में स्वच्छ दिवाली मनाने के लिए 3आर रिड्यूस, रियूज एवं रिसाइकल

सभी शहर स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली अभियान के तहत गतिविधियों और कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला का शुभारंभ करते हुए स्वच्छ उत्सव के लिए तैयार हैं। कर्नाटक ने नागरिकों को कमी लाने, पुनः प्रयोग करने और पुनर्चक्रण करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खुले मैदानों, बाजारों तथा अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल (आरआरआर) केंद्र कियोस्क स्थापित किए हैं। ये कियोस्क नागरिकों को न केवल अपनी पुरानी, अप्रयुक्त वस्तुओं को दान करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि स्वच्छ दिवाली हस्ताक्षर अभियान हेतु आगे आकर इसमें शामिल होने हेतु प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।

इन रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल केंद्रों को स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और स्वयं सहायता समूहों, गैर सरकारी संगठनों आदि द्वारा बनाए गए दीयों तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों से सजाया गया है। विशेष तौर पर सामुदायिक भागीदारी के लक्ष्य के साथ सभी धार्मिक स्थलों को प्राकृतिक फूलों, पत्तियों या प्राकृतिक रंगों से शुभ दिवाली रंगोली बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नागरिक प्रतिज्ञाओं को पंजीकृत करने के लिए क्यूआर कोड स्टैंडीज को धार्मिक स्थलों के बाहर, बाजारों, बस स्टॉप, शॉपिंग मॉल और थिएटरों में भी स्थापित किया गया है।

पर्यावरण-अनुकूल और स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कृषि उपज विपणन समिति के साथ सहयोग लेते हुए विशेष हाट का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा सजावट से लेकर उपहार तथा मिठाइयों तक बनाई गई वस्तुओं को पर्यावरण-अनुकूल दिवाली उत्पाद के रूप में शामिल किया गया है, जो लोगों को बेहतर विकल्प चुनने हेतु प्रोत्साहित करते हैं।

इसके अलावा, कुछ शहरी स्थानीय निकायों ने अपनी स्वयं की अनूठी पहल की है जैसे कि हासन निकाय, जहां पर हसनंबा मंदिर के दरवाजे वर्ष में सिर्फ एक बार दिवाली के त्योहार के दौरान जनता के लिए खोले जाते हैं। ऐसा तब होता है जब भक्तों का समूह भगवान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने के लिए मंदिर में आता है। हासन नागरिक निकाय ने एक शानदार पहल करते हुए मंदिर के आगंतुकों के साथ जुड़कर जागरूकता एवं एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंदिर में क्यूआर कोड स्टैंडीज लगाए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को स्वच्छ हरित दिवाली मनाने के लिए स्वच्छ दिवाली हस्ताक्षर अभियान में शामिल करने हेतु आमंत्रित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कचरा मुक्त शहरों के लिए एकजुटता की भावना व साझा गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है।

इस बीच, जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए उडुपी के प्रसिद्ध पर्यटक समुद्र तट पर रेत से कलाकृतियां बनाई गई है। विजयनगर में हरित पटाखों के इस्तेमाल और सामान्य पटाखों से होने वाले प्रदूषण के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य के साथ पौराकार्मिकों द्वारा झुग्गी-झोपड़ियों में मिट्टी के दीये वितरित किए जा रहे हैं। नागरिकों, धार्मिक संस्थानों, शहरी स्थानीय निकाय, नागरिक निकायों और सरकार द्वारा किए गए संयुक्त एवं जागरूक प्रयास स्वच्छ दिवाली तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्सव के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं।

नवी मुंबई की हरित प्रतिज्ञा के साथ मनाई जा रही दिवाली

जैसे-जैसे त्योहारों का मौसम नजदीक आ रहा है, स्वच्छता एमओएचयूए,'स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली' पहल के साथ सुर्खियों में आ रही है, जो एक राष्ट्रव्यापी अभियान है और जो नागरिकों से स्वच्छ और हरित तरीके से दिवाली मनाने का आग्रह करता है। नवी मुंबई वासी इस अभियान को पूरे दिल से अपना रहे हैं। नवी मुंबई द्वारा शॉपिंग मॉल में शुरू किए गए सेल्फी अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह अनूठी पहल खरीदारों को मॉल में आने के लिए आकर्षित कर रही है।

दुकानदारों को स्वच्छ दिवाली हस्ताक्षर अभियान के लिए साइन अप करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली अभियान का एक हिस्सा है। फिर वे मॉल में सेल्फी प्वाइंट पर स्वच्छ दिवाली सेल्फी के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूक और स्वच्छ दिवाली मनाने की अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर सकते हैं। नवी मुंबई नगर निगम स्वच्छ दिवाली हस्ताक्षर अभियान के लिए साइन अप करने वाले नागरिकों को खरीदारी के लिए डिस्काउंट कूपन के साथ पुरस्कृत कर रहा है, जो बदलाव लाने का विकल्प चुनने वालों के लिए एक सकारात्मक सुदृढीकरण है। एक अनूठी पहल जिसमें नागरिक शामिल हैं और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के साथ उत्सव का माहौल पैदा करते हैं।

यह अभियान न केवल व्यक्तियों को स्वच्छता के लिए जन आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि स्वच्छ दिवाली के प्रति उनके समर्पण का एक दृश्य प्रतिनिधित्व भी कर रहा है। जैसे-जैसे नवी मुंबईवासी इस प्रयास में एकजुट होते हैं, स्वच्छ दिवाली 'शुभ दिवाली' सिर्फ एक अभियान से कहीं अधिक बन जाती है - यह हरित, स्वच्छ और अधिक टिकाऊ त्योहारी सीजन की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन में बदल जाती है।

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English summary
Swachh Diwali Shubh Diwali Campaign: There is a lot of enthusiasm among people about Diwali this year. This year, with the aim of making Diwali unique, Clean Diwali is being celebrated in different states of the country. Under this, a campaign of Swachh Diwali and Shubh Diwali is being run. According to a press release issued by the Press Information Bureau, these states mainly include Assam, Nagaland, Karnataka and Navi Mumbai.
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