लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मुख्य (लिखित) परीक्षा-2022, जिसे आमतौर पर पीसीएस (जे) मेन्स-2022 के नाम से जाना जाता है, का संशोधित परिणाम जारी कर दिया है।
संशोधित परिणाम में पांच और अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया के साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया है। ये वे अभ्यर्थी हैं, जिन्हें मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बावजूद असफल घोषित किया गया था। संशोधित परिणाम में आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन पांच अभ्यर्थियों के लिए आयोग द्वारा अलग-अलग साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे, जिनके रोल नंबर 047370, 047380, 047665 और 047718 हैं।

यूपीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक हर्ष देव पांडेय ने बताया कि इन साक्षात्कारों की तिथि व समय के संबंध में आयोग द्वारा अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि आरटीआई में अपनी कॉपी देखने के बाद अभ्यर्थी श्रवण पांडेय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसकी अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदल दी गई है और दूसरी उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने फाड़ दिए गए हैं। जिसके कारण वह मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो सका। इस पर यूपीपीएससी को निर्देश दिया गया था कि वह उसकी छह प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट के समक्ष पेश करे। इसके बाद सुनवाई के बाद लापरवाही परत दर परत उजागर हुई और पता चला कि 50 अभ्यर्थियों की कॉपियां बदली गई थीं।
दिलचस्प बात यह है कि श्रवण पांडे को भी मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया है और परिणामस्वरूप वह संशोधित परिणाम में सफल घोषित चार अन्य अभ्यर्थियों के साथ साक्षात्कार भी देंगे।
यूपीपीएससी ने स्पष्ट किया है कि परिणाम श्रवण पांडे द्वारा दायर याचिका और इसी तरह की अन्य याचिकाओं में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होगा। श्रवण पांडे के मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होनी है।
यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मुख्य (लिखित) परीक्षा-2022, जिसे आमतौर पर पीसीएस (जे) मेन्स-2022 के रूप में जाना जाता है, 22 से 25 मई, 2023 के बीच आयोजित की गई थी, जबकि परिणाम 30 अगस्त, 2023 को घोषित किए गए थे और अंक नवंबर 2023 में सार्वजनिक किए गए थे।
उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा तब शुरू हुई जब पीसीएस (जे) मुख्य परीक्षा-2022 के अभ्यर्थी श्रवण पांडेय ने आरटीआई अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखीं। श्रवण द्वारा याचिका दायर करने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 5 जून 2024 को यूपीपीएससी को याचिकाकर्ता के छह प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।
आयोग ने 7 जून 2024 को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर हलफनामा दिया था कि मामला प्रकाश में आने के बाद मुख्य परीक्षा में शामिल सभी 3,019 अभ्यर्थियों की 18,042 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जा रही है, ताकि मूल्यांकन के दौरान उनकी पहचान गुप्त रखी जा सके।
इस बीच आयोग ने 20 जून से अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं दिखाना भी शुरू कर दिया था। पीसीएस-जे 2022 की मुख्य परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को 30 जुलाई तक उनके क्रमांक के अनुसार कॉपियां दिखाई गईं।
इस बीच यूपीपीएससी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) (मुख्य) परीक्षा-2022 के अभ्यर्थियों को फर्जी रोल नंबर (कोड) आवंटित करने में हुई गलती को स्वीकार किया था।
20 जून से 30 जुलाई तक सिर्फ 1343 (44.48%) अभ्यर्थी ही अपनी कॉपियां देखने यूपीपीएससी मुख्यालय आए थे। 13 अगस्त को आयोग ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि संशोधित परिणाम जल्द जारी किया जाएगा।


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