UGC Guidelines: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने स्टूडेंट्स की मेंटल हैल्थ को देखते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में मेंटल हैल्थ काउंसलर्स की नियुक्ति की पहल की है। छात्रों को पढ़ाई और परीक्षा के दबाव से राहत देने के लिए यूजीसी ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर गाइडलाइन जारी की है। अब इसको पब्लिक फीडबैक के लिए जारी किया जाएगा। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फिजिकल फिटनेस, स्पोर्ट्स, स्टूडेंट्स हैल्थ पर भी और अधिक फोकस किया जाएगा।

गाइडलाइन के तहत हरेक संस्थान को स्टूडेंट्स सर्विस सेंटर (एसएससी) स्थापित करना होगा। डायरेक्टर और डीन स्तर के प्रोफेसर या फिर शारीरिक शिक्षक को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस सेंटर पर छात्रों की ऑनलाइन या फिर टेलीफोन के माध्यम से काउंसलिंग करवाई जाएगी। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को महिलाओं और गांवों के पिछड़े बच्चाें की मदद करना भी सिखाया जाएगा। इससे पहले यूजीसी ने साल 2019 में भी शिक्षण संस्थानों को एक फिटनेस प्लान भेजा था।
इसमें कहा गया था कि स्कूल की तर्ज पर उच्च शैक्षणिक संस्थानों में भी एक घंटे की स्पोर्ट्स एक्टिविटी होनी चाहिए। यूजीसी का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से छात्रों की पॉजिटिव सोच बढ़ेगी और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। शारीरिक रूप से छात्र स्वस्थ रहने से वे पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
यूजीसी इस गाइडलाइन को अनिवार्य करने की तैयारी भी कर रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में भी मेंटल हैल्थ के साथ स्टूडेंट्स की फिजिकल फिटनेस पर काफी जोर दिया गया है। वर्तमान में कुछ ही शैक्षणिक संस्थानों में स्पोर्ट्स के विषय को अनिवार्य किया है।
मार्च 2020 के बाद से देश में लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद स्टूडेंट्स को कोरोना की दूसरी व तीसरी लहर का सामना करना पड़ा था। शैक्षणिक संस्थान भी नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे थे। इस कारण छात्रों की मानसिक सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा था।
अब यूजीसी इस गाइडलाइन को लागू करके छात्रों की दिनचर्या को फिर से सही करना चाह रही है। लॉकडाउन के समय छात्रों की खेलकूद गतिविधियां पूरी तरीक से बंद हो चुकी थी।
यूजीसी का मानना है कि कई छात्र दबाव में आकर यूजी वी पीजी प्रोगाम्स के बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसका बड़ा कारण मानसिक रूप से मजबूत नहीं होना है। नई गाइडलाइन को लागू करने से संस्थानों में एक सकारात्मक माहौल पैदा होगा। इससे ड्राॅप आउट की समस्या का भी समाधान हो पाएगा।
आयोग मानवीय मूल्यों पर तैयार पाठ्यक्रम को भी विवि व कॉलेजों में लागू करने की तैयारियां कर रहा है। इसके तहत कई ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में कुछ विवि अपने स्तर पर ही मानवीय मूल्यों की पढ़ाई करवा रहे हैं।


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