शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर यूनिसेफ द्वारा अपने 'पासपोर्ट टू अर्निंग' (पी2ई) कार्यक्रम के तहत एक मिलियन प्रमाणन की उपलब्धि हासिल करने के उपलक्ष्य में आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया।

इस कार्यक्रम में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) के युवा कार्यक्रम विभाग के संयुक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्र और भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैक्कैफ्री भी उपस्थित थीं।
यूनिसेफ के वैश्विक स्तर के लर्निंग-टू-अर्निंग संबंधी कदम, 'पासपोर्ट टू अर्निंग' (पी2ई) ने भारत में एक मिलियन से अधिक युवाओं को वित्तीय साक्षरता और डिजिटल उत्पादकता के क्षेत्रों में कुशल बनाया और प्रमाणित किया है। यह उपलब्धि युवाओं को भविष्य के काम और जीवन के लिए प्रासंगिक कौशल हासिल करने में मदद करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेष रूप से, भारत में पी2ई पाठ्यक्रमों से लाभान्वित होने वाले सभी युवा शिक्षार्थियों में से 62 प्रतिशत किशोरियां एवं युवतियां हैं।
भारत में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप, पी2ई पहल डिजिटल उत्पादकता, वित्तीय साक्षरता, रोजगार हेतु योग्यता संबंधी कौशल और नौकरी के लिए तैयार कौशल से संबंधित प्रमाणन (सर्टिफिकेट) पाठ्यक्रमों तक निशुल्क पहुंच प्रदान करती है। पी2ई समाधान ऑनलाइन, हाइब्रिड एवं ऑफलाइन शिक्षण मॉडल का भी प्रावधान करता है।
इस डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का लक्ष्य 2024 तक भारत में 14-29 वर्ष के आयु वर्ग के पांच मिलियन युवाओं को दीर्घकालिक टिकाऊ कौशल प्रदान करना और फिर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए नौकरी, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना है।
इस अवसर पर संजय कुमार ने कहा, "मुझे यह जानकर खुशी हुई कि यूनिसेफ की 'पासपोर्ट टू अर्निंग' (पी2ई) पहल युवाओं के समग्र विकास के लिए 21वीं सदी के कौशल का निर्माण करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है। इस पहल के परिणाम इसकी सार्थकता को प्रमाणित करते हैं। शुभारंभ के बाद से,पी2ई के तहत केवल 11 महीनों में एक मिलियन असाधारण युवाओं द्वारा एक मिलियन से अधिक पाठ्यक्रमों को पूरा किया गया है। इस यात्रा का हिस्सा बनने वाले सभी हितधारकों को बहुत-बहुत बधाई।"
इस कार्यक्रम में बोलते हुए, सिंथिया मैक्कैफ्री ने कहा, "यूनिसेफ का मानना है कि जब किशोरियां एवं युवतियां उपकरण, कौशल व आर्थिक अवसरों से लैस होती हैं, तो वे एक अधिक समावेशी एवं समृद्ध दुनिया के निर्माण की दिशा में एक अजेय शक्ति बन जाती हैं। हमें खुशी है कि 'पासपोर्ट टू अर्निंग' (पी2ई) कार्यक्रम ने अपने पहले वर्ष में एक मिलियन युवाओं को प्रशिक्षित करने की उपलब्धि हासिल की है, जिसमें सीखने वाले कुल युवा शिक्षार्थियों में से 62 प्रतिशत युवतियां हैं।
'नारी शक्ति'के माध्यम से प्रगति को आगे बढ़ाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप, पी2ई कार्यक्रम युवतियों के लिए मार्ग प्रशस्त करने के प्रति समर्पित है ताकि उन्हें सही कौशल एवं सफल होने के अवसरों के साथ जोड़ा जा सके और सीखने से कमाई की दिशा में स्थानांतरित करने और दुनिया को एजेंडा 2030 की ओर ले जाने की प्रक्रिया का नेतृत्व करने में समर्थ बनाया जा सके।"
डॉ केके द्विवेदी ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री अक्सर कहा है कि युवाओं में कौशल का विकास एक राष्ट्रीय आवश्यकता है और यह आत्मनिर्भर भारत की नींव है। मैं 'पासपोर्ट टू अर्निंग' (पी2ई) कार्यक्रम के निर्माण में यूनिसेफ इंडिया, यूवाह और अन्य भागीदारों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करता हूं। यह भविष्य के लिए तैयार युवा श्रमशक्ति के विकास में सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।"


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