बाल मजदूरी के खिलाफ यूथ लीडर्स का सार्थक प्रयास, बच्चों को दिलाई नई पहचान

बाल मजदूरी के खिलाफ हर साल 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम दिवस मनाया जाता है। बाल मजदूरी पूरी दुनिया के लिए एक श्राप है। भारत समेत दुनिया में देश बाल मजदूरी के खिलाफ कई आंदोलन चल रहे हैं। बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को सम

बाल मजदूरी के खिलाफ हर साल 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम दिवस मनाया जाता है। बाल मजदूरी पूरी दुनिया के लिए एक श्राप है। भारत समेत दुनिया में देश बाल मजदूरी के खिलाफ कई आंदोलन चल रहे हैं। बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को समाज में एक नई पहचान दिलाने के लिए भारत में कई संस्थाएं काम कर रही हैं। नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा स्‍थापित बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) और कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फांउडेशन (केएससीएफ) की टीम इस दिशा में लगातार नए नए प्रयास कर रही है। यूथ लीडर्स इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 10 जून को दिल्‍ली स्थित कॉन्स्टिीट्यूशन क्‍लब ऑफ इंडिया में आयोजित परिचर्चा में इस दिशा में काम रहे रहे नौ यूथ लीडर्स को आरपीएफ के डायरेक्‍टर जनरल संजय चंदर ने सम्‍मानित किया। इस परिचर्चा की थीम 'क्‍या साल 2025 तक भारत बालश्रम को पूरी तरह से खत्‍म कर पाएगा' रखी गई थी।

बाल मजदूरी के खिलाफ यूथ लीडर्स का सार्थक प्रयास, बच्चों को दिलाई नई पहचान

रेस्‍क्‍यू एवं पुनर्वास नीति पर जोर
इस परिचर्चा में बच्‍चों ने बोल मजदूरी के खिलाफ अपनी मांगें भी रखीं। जिसमें बाल मजदूरी में लगे बच्‍चों के लिए रेस्‍क्‍यू एवं पुनर्वास नीति लाने पर जोर दिया गया। रेजीडेंशियल स्‍कूल व रेस्‍क्‍यू किए गए बच्‍चों के लिए सरकार से आम बजट 2023-24 में वृद्धि की भी मांग की गई है। इसके साथ ही सरकार से मांग की है कि इस नीति को सुचारु रूप से लागू करने के लिए देश के सभी 749 जिलों को राष्‍ट्रीय बालश्रम योजना (एनसीएलपी) के अंतर्गत घोषित किया जाए और तकनीक पर आधारित निगरानी प्रणाली सुनिश्चित की जाए।

अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन अधिवेशन
मध्‍य प्रदेश के बिदिशा जिले से आने वाले 18 साल के सुरजीत लोधी अपने गांव के 120 बच्‍चों को कठिन परिस्थितियों से निकालते हुए शिक्षा दिलवाने में मदद कर रहे हैं। साथ ही शराब के खिलाफ भी मुहिम चलाए हुए हैं। साल 2021 में सुरजीत को प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया था। सम्‍मानित होने वालों में से तारा बंजारा, अमर लाल व राजेश जाटव हाल ही में दक्षिण अफ्रीका की राजधानी डरबन में हुए अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के पांचवें अधिवेशन में भारत की युवा आवाज बने थे। 25 साल के अमर लाल सामाजिक कार्यकर्ता और बाल अधिकार वकील के रूप में काम कर रहे हैं। 17 साल की तारा बंजारा स्‍नातक की पढ़ाई कर रही हैं। वह पुलिस फोर्स में जाना चाहती हैं।

इन्होंने बनाई नई पहचान
भरतपुर जिले के अकबरपुर गांव से आने वाले 21 साल के राजेश जाटव कभी ईंटभट्ठे पर बाल मजदूरी करते थे। आज राजेश दिल्‍ली में एमबीए इन फाइनेंस की पढ़ाई कर रहे हैं। सम्‍मानित होने वाली 17 साल की ललिता धूरिया और 19 साल की पायल जांगिड़ भी राजस्‍थान से हैं। ये दोनों रीबॉक फिट टू फाइट अवॉर्ड से सम्‍मानित की जा चुकी हैं। सम्‍मानित होने वाले तीन यूथ लीडर्स झारखंड से हैं। इनमें 22 साल के नीरज मुर्मु, 16 साल की चंपा कुमारी और 17 साल की राधा कुमारी हैं। नीरज गिरिडीह जिले के दुरियाकरम गांव से आते हैं। 10 साल की उम्र में नीरज मायका माइन (अभ्रक खदान) में काम करते थे। आज वह दुनिया में अपना नाम कर रहे हैं।

आरपीएफ डीजी ने की सराहना
साल 2011 में बीबीए कार्यकर्ताओं ने उनका रेस्‍क्‍यू किया था। नीरज भी साल 2020 में डायना अवॉर्ड से पा चुके हैं। डायना अवॉर्ड से ही सम्‍मानित होने वाली राज्‍य की चंपा कुमारी भी हैं। 12 साल की उम्र में चंपा मायका माइन में काम करती थीं और उन्‍हें भी बीबीए कार्यकर्ताओं ने रेस्‍क्‍यू किया था। चंपा ने बाल विवाह के खिलाफ भी लंबी लड़ाई लड़ी है। इन यूथ लीडर्स के प्रयासों की सराहना करते हुए आरपीएफ के डायरेक्‍टर जनरल (डीजी) संजय चंदर ने कहा कि इन बच्‍चों व युवाओं में समाज को बदलने की ताकत है और यही लोग समाज की कुरीतियों का अंत कर सकेंगे। डीजी ने कहा कि इन बच्‍चों को सम्‍मानित करके मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है। हम सबको मिलकर बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ना होगा।

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English summary
International Child Labor Day is observed every year on 12 June against child labor. Child labor is a curse for the whole world. There are many movements going on in the world including India against child labor. Many organizations are working in India to give a new identity to the children doing child labor in the society. The team of Bachpan Bachao Andolan (BBA) and Kailash Satyarthi Children's Foundation (KSCF), founded by Nobel Peace Prize awardee Kailash Satyarthi, is continuously making new efforts in this direction.
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