देश में जल्द ही एमबीए कोर्स दो साल के बजाय एक साल का होगा। ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एआईसीटीई जल्द ही इस पर निर्णय लेगा। इसके अलावा एआईसीटीई फरवरी से मैनेजमेंट-इंजीनियरिंग सहित तमाम तकनीकी कोर्स के कॉलेजों के लिए 'वन नेशन-वन डेटा' स्कीम लागू कर रहा है। इसके लागू होते ही सारे संस्थानों को हर प्रक्रिया के लिए एक ही डेटा प्रस्तुत करना होगा।

एआईसीटीई के पास भी हर कॉलेज की संपूर्ण जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर होगी। यह बात एआईसीटीई चेयरमैन डॉ टीजी सीताराम ने मीडिया से कही। वे देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी(एमपी) में आयोजित संस्थागत नेतृत्व समागम में शामिल होने के लिए आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अब मान्यता या उसके नवीनीकरण के लिए मैनेजमेंट व इंजीनियरिंग कॉलेजों में कमेटी के निरीक्षण की व्यवस्था खत्म होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो योगेश सिंह ने मीडिया से कहा कि शिक्षक नारेबाजी कर रहे हैं, क्लास नहीं ले रहे हैं तो यह देश के खिलाफ अपराध है। बच्चे नारेबाजी करते हैं तो उन्हें समझाया जा सकता है, लेकिन दो लाख रुपए तनख्वाह लेने वाले शिक्षक भी यह कर रहे हैं तो शर्मनाक है। हमें देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखना है तो स्टेट यूनिवर्सिटी को सक्षम करने, उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है।
कॉलेज अपनी सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट भेजेगा, उसी आधार पर मान्यता दे दी जाएगी। अगर कोई कॉलेज फेकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सुविधाओं को लेकर गलत डेटा प्रस्तुत करता है तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।

अगले सत्र में भी लागू नहीं होगी एनईपी
उन्होंने कहा कि फिलहाल अगले सत्र में भी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में नई एजुकेशन पॉलिसी लागू होगी। इस पर अभी काफी कुछ काम किया जाना है। बहुत सारे तकनीकी पहलुओं पर काम हुआ।
बीटेक के बाद पीएचडी कर सकेंगे छात्र
डॉ सीताराम ने कहा कि छात्र चार साल के बीटेक के बाद एक साल का पीजी कर पीएचडी के लिए पात्र माने जाएंगे। एक साल का एमबीए करने पर भी यही पात्रता होगी।
यह है 'वन नेशन-वन डेटा' स्कीम
इस स्कीम के तहत अब कॉलेजों को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमर्वक एनआईआरएफ, नैक की एसएसआर, मान्यता के लिए एआईसीटीई और यूनिवर्सिटी को एफिलिएशन के दौरान एक ही डेटा प्रस्तुत करना होगा। इसमें छात्र संख्या, फैकल्टी की संख्या व क्वालिफिकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर सहित तमाम जानकारी होगी।


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