Karnataka SSLC Paper Leak: कर्नाटक के उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण खबर है, जो एसएसएलसी परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं। हाल ही में बेंगलुरु से कर्नाटक एसएसएलसी पेपर लीक की घटना सामने आई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक में एसएसएलसी परीक्षा प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सुर्खियों में बनी हुई है।

बेंगलुरु में पेपर लीक होने के संदेह के बाद कलबुर्गी में आयोजित एसएसएलसी की तैयारी परीक्षा की निष्पक्षता पर चिंता जताई गई। अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने मामले की विस्तृत जांच के लिए त्वरित कार्रवाई की है। यह मामला परीक्षा के अंतिम दिन सामने आया है। खबरों के अनुसार कर्नाटक एसएसएलसी प्रश्न पत्रों में विशेष रूप से सामाजिक विज्ञान के पेपर लीक होने की आशंका जताई जा रही है। मामले की जांच अतिरिक्त आयुक्त लोक शिक्षण (ACPI) को सौंपी गया है। वे तथ्यों का पता लगाने के लिए एक व्यापक रिपोर्ट संकलित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कर्नाटक एसएसएलसी परीक्षा के पहले दिन से ही पेपर लीक की अफवाहों के बावजूद अधिकारियों ने शुरू में इन दावों को खारिज कर दिया। आयुक्त त्रिलोक चंद्र केवी ने चिंताओं को संबोधित करते हुए कहा, "लीक का आरोप लगाने वाले YouTube वीडियो थे। हालांकि, वे सभी मॉडल प्रश्नपत्र थे जिन्हें साझा किया गया था।" कलबुर्गी में हुई घटना के बाद आखिरी दिन तक संभावित उल्लंघन को अधिक गंभीरता से नहीं लिया गया। इस मामले में आगे की रणनीति को निर्धारित करने का संकेत देते हुए चंद्रा ने कहा, "हालांकि मंगलवार को कलबुर्गी से एक घटना की सूचना मिली थी। हमें किसी भी पुष्टि के लिए रिपोर्ट का इंतजार करने और फिर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।"
निजी स्कूल संघ ने की आलोचना
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले के सामने आते ही निजी स्कूलों के संघ, कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के एसोसिएटेड मैनेजमेंट ने इसकी आलोचना की है। उन्होंने कर्नाटक स्कूल परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (KSEAB) की खुलेआम आलोचना की है। क्योंकि उन्हें लगता है कि परीक्षा आयोजित करने में बोर्ड लापरवाह है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डी शशि कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक बयान में असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, "केएसईएबी प्रत्येक छात्र से परीक्षा के लिए 50 रुपये लेता है, लेकिन यह पूरी ईमानदारी से परीक्षा आयोजित करने में असमर्थ रहा है। वे निजी स्कूलों पर क्यों जोर दे रहे हैं कि वे ये परीक्षाएं लें? हम बोर्ड की तुलना में कहीं अधिक कुशलता से परीक्षाएं आयोजित करने में सक्षम हैं।" यह परीक्षा प्रक्रियाओं के संचालन के लिए बोर्ड के रवैये को लेकर निजी स्कूल प्रशासकों के बीच बढ़ती निराशा को दर्शाता है।
गौरतलब हो कि बीते 26 फरवरी को शुरू हुई कर्नाटक एसएसएलसी परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं। इससे हितधारकों को मामले पर स्पष्टता के लिए एसीपीआई की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा। संभावित उल्लंघन न केवल परीक्षा के सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाता है, बल्कि समग्र रूप से परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी संदेह पैदा करता है।


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