Infosys, TCS and HCL Tech Likely to Skip Campus Selection This Year: आज प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भारतीय विश्वविद्यालय के छात्रों के सामने एक नई चुनौती आ खड़ी है। पढ़ाई खत्म होने पर आईटी क्षेत्र में करियर बनाने और आकर्षक सैलरी वाली नौकरी पाने का सपना देख रहे छात्रों को अब निराशा हाथ लग सकती है।

दरअसल, ये सब हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस वर्ष इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी कई प्रमुख तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां कैंपस भर्ती प्रक्रिया (Campus Selection by Infosys, TCS, HCL) को स्किप करने का मन बना रही है। इस वर्ष देश के हजारों कॉलेजों के लाखों छात्रों को इस खबर से काफी निराशा होने वाली है। आपको बता दें कि वैश्विक बाजार की खस्ता हालातों के कारण संभावनाएं ऐसी बन रही है कि प्रसिद्ध भारतीय कंपनियों द्वारा ऐसा ही कुछ फैसला लिया जा सकता है।
वित्त वर्ष 2024-25 की सितंबर तिमाही के दौरान कैंपस भर्ती (Campus Selection by IT Companies) में देरी के परिणामस्वरूप कई कर्मचारियों ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी तकनीकी कंपनियों को छोड़ दिया। इन निगमों ने भविष्य में फलदायी विकास की राह में बाधा डालने वाले कठिन माहौल और तिमाही रिजल्ट के आधार पर अपनी रोजगार योजनाओं का मूल्यांकन करने का भी संकेत दिया है। भारतीय आईटी क्षेत्र कैंपस सेलेक्शन के माध्यम से प्रति वर्ष हजारों छात्रों का चयन करती है। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसा प्रमुख कंपनियां छात्रों की शीर्ष भर्तीकर्ता भारतीय कंपनियों में से है। इन कंपनियों द्वारा कैंपस सिलेक्शन पर लिये जाने वाले इस निर्णय से इंजीनियरिंग स्नातकों को निकट भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
टेक कंपनियां कैंपस हायरिंग क्यों छोड़ रही हैं?
आजकल दुनिया भर की कंपनियां वर्तमान कर्मचारियों की छंटनी कर रही है और वर्कफोर्स को कम करने के एजेंडे पर कार्य क रही है। इन सबके बीच भारतीय आईटी समेत कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने नई भर्तियों पर भी रोक लगाने का निर्णय ले रही है। परिणामस्वरूप, कैंपस भर्तियां, जो कंपनियों के लिए फ्रेस टैलेंट एक्यूजिशन का एक प्रमुख स्रोत हुआ करती है, बहुत तेजी से प्रभावित हो रही है। इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी भारतीय आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों द्वारा अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों के कारण इस साल के कैंपस प्लेसमेंट को छोड़ने की उम्मीद की जा रही है। मौजूदा कार्यबल या वर्कफोर्स प्रतिधारण और परिचालन स्थिरता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, यह स्नातक छात्रों के लिए चुनौतियां खड़ी करता है, जिन्हें रोजगार के लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने की आवश्यकता पड़ सकती है।
क्या होगा कैंपस सेलेक्शन का भविष्य
भारत की अग्रणी आईटी फर्मों द्वारा भर्ती रणनीति में इस अचानक बदलाव ने कैंपस हायरिंग के भविष्य पर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आईटी रोजगार क्षेत्र में इंफोसिस की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होने के कारण, यह निर्णय देश भर के तकनीकी संस्थानों में वार्षिक प्लेसमेंट ड्राइव को गहरे तौर पर बाधित कर सकता है। हालांकि, इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि इसका मतलब कंपनी के लिए प्रवेश स्तर की नियुक्तियों की संख्या में कमी नहीं है, बल्कि इसका मतलब, इन नियुक्तियों को खोजने और भर्ती करने के तरीके पर पुनर्विचार करना है।
भारतीय विश्वविद्यालय के छात्रों पर प्रभाव
इस निर्णय से भारतीय विश्वविद्यालय के छात्रों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे छात्रों को भारत के अग्रणी तकनीकी कंपनियों में नौकरी सुरक्षित करने के कम अवसर मिलेंगे। आईटी क्षेत्र में इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों को नौकरी पेशेवर एक बेहतर करियर का प्रवेश द्वार मानते हैं। कैंपस प्लेसमेंट स्नातक छात्रों को अपना करियर शुरू करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जहां उन्हें आईटी जगत को समझने और सीखने का अवसर मिलता है। यह उन्हें तकनीकी उद्योग में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और अनुभव दोनों प्रदान करता है। इस रास्ते के बिना, कई स्नातकों को अपनी पहली नौकरी पाने में कठिन समय का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कहते हैं आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञ?
देश के प्रमुख आईटी क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरी पेशेवरों को लिए वैश्विक माहौल काफी चिंताजनक है। विश्व भर में तनाव, युद्ध समेत अन्य तमाम परिस्थितियों ने कई परियोजनाओं की गति को धीमा कर दिया है। वे कहते हैं, हमारा मानना है कि प्रमुख आईटी कंपनियों का ध्यान अपने परिचालन प्रदर्शन में सुधार करना है। नतीजतन, हमने धीमी भर्ती देखी, जिसके परिणामस्वरूप बेंच स्ट्रेंथ कम हो गई और उपयोग स्तर की तुलना में कर्मचारी अधिक हो गए। हालांकि, हमें विश्वास है कि एक या दो तिमाही के बाद नियुक्तियाँ फिर से शुरू होंगी क्योंकि व्यवसायों का ध्यान लागत-कटौती से हटकर परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर केंद्रित हो गया है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए दृष्टिकोण में सुधार हुआ है।
वैश्विक स्तर पर स्लोडाउन का कारण क्या है?
वैश्विक स्तर पर स्लोडाउन का कारण मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, तीव्र वृहद अनिश्चितताओं और दर वृद्धि चक्रों के कारण वित्त वर्ष 2023 की शुरुआत से ही भारतीय आईटी कंपनियों की नियुक्ति योजनाएं ठप हो गई हैं। बावजूद इसके, इन भारतीय कंपनियों ने तब भी अपने कर्मचारियों की छंटनी नहीं की। उस दौर में विश्व की प्रमुख कंपनियों जिनमें अमेज़ॅन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट शामिल है, में कई दौर में लोगों की छंटनी की गई। एकाएक कंपनियों से हजारों लोगों को नौकरीमुक्त कर दिया गया। इन सबके बीच कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।


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