किरण बेदी और सीबीएसई डायरेक्टर विश्वजीतसाहा ने अपराध और ड्रॉप आउटस को कम करने के लिए नए शैक्षिक दृष्टिकोण का आह्वान किया
पुडुचेरी की पूर्व लेफ्टनेंट गवर्नर किरण बेदी और सीबीएसई के डायरेक्टर विश्वजीतसाहा ने अपराध को कम करने और राष्ट्र की समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए बच्चों की परवरिश की जिम्मेदार पर जोर दिया। परवरिश पर जोर देने के साथ उन्होंने आज एक नए शैक्षिक दृष्टिकोण के बारे में भी चर्चा की।
अच्छी परवरिश के बारे में लोगों/ पेरेंटस में जागरूकता पैदा करने के लिए उन्होंने एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की। इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत करने के लिए उन्होंने "पेरेंटिंगडायलॉग्स" समारोह का हिस्सा बने और समारोह को संबोधन किया। जिसका इनिशिएटिव गिनीजवर्ल्डरिकॉर्ड विनिंग गाइडेंस एप फॉर पेरेंटिंग लाइफोलॉजी और अजय भारत फाउंडेशन ने लिया।

पहली महिला आईपीएस अधिकारी डॉ.बेदी द्वारा बिरला विद्या निकेतन में अजय कुमार और प्रवीण परमेश्वर द्वारा लिखी "माइंडफुलपेरेंटिंग" नामक एक पुस्तक को लॉन्च किया गया। डॉ.बेदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को मुफ्त भोजन, किताबें और यूनिफॉर्म देने की वर्तमान प्रणाली न तो छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ ने से रोक पा रही है और न ही क्वालिटी शिक्षा प्रदान करने में सहायक है।
इसी के साथ आगे उन्होंने कहा कि, पढ़ाई बीच में छोड़ देने की वाले छात्रों की उच्च दर की वजह से ही कई जघन्य अपराध होते हैं जैसे कि बलात्कार और आंदोलन और अशांति के माहौल में देश की सराकारी संपत्ति आदि को तोड़फोड़ना। जैसे कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई अग्निवीर योजना। इस योजना के खिलाफ हाल ही में आंदोलन किए गए थे। इस अग्निवीर योजना में युवाओं को सीमित अवधि के प्रशिक्षण और रक्षा में रोजगार की पेशकश की गई थी।
उन्होंने पुडुचेरी में अपने कार्यकाल में विभिन्न सरकारी स्कूलों के दौरों किए थे। उन दौरों के दौरान, उन्होंने पाया कि छात्र अपने संस्थानों में केवल मुफ्त मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आते हैं, न कि शिक्षा प्राप्त करने के इरादे से और उनके माता-पिता जो कि अशिक्षित और दिहाड़ी पर काम करने वाले मजबूर हैं, अपने बच्चों का मार्गदर्शन करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने इसी बात पर आगे बाताते कि- इतना ही नहीं, स्थिति इसलिए भी बुरी है क्योंकि 75 प्रतिशत पिता शराब पीने के आदी हैं और वह अन्य जरूरी चीजों पर ध्यान देना नहीं चाहते हैं। अपनी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ.बेदी ने सुझाव दिया कि शिक्षा अधिकारियों को मुफ्त सुविधाओं को उनके बदले हुए व्यवहार से जोड़कर अभिभावकों की नशे की लत छुड़ाने का काम सौंपा जाना चाहिए। अपने इस संबोधन में उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा की- चूंकि भारत की नई राष्ट्रपति द्रौपतीमुर्मू एक स्कूल शिक्षिका थीं और इसलिए वह शिक्षा प्रदान करने के तरीके में सकारात्मक बदलाव अवश्य लाएंगी।
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ.साहा (डायरेक्टर ऑफ सीबीएसई) ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर नई शिक्षा नीति क्वालिटी शिक्षा पर केंद्रित होती है, क्योंकि उनका मानना है कि यह वह उम्र है जब छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ शिक्षा में एक्सीलेंस हासिल करने के लिए ढाला जा सकता है। उन्होंने देश के शैक्षिक शोधकर्ताओं (एजुकेशनल रिसर्चरस) से अपील की कि वे वेस्ट के सुझावों पर निर्भर रहने के बजाय अपने अध्ययन स्वयं करें। इसी में उन्होंने आगे कहा कि सीबीएसई अपने 27,000 स्कूलों को उनकी स्वायत्तता को प्रभावित किए बिना सहयोग देगा, जहां देश के लगभग 10 प्रतिशत छात्र पढ़ रहे हैं।
पुस्तक के लेखक और प्रबंधन विचारक (मेनेजमेंट थिनकर) श्री अजय कुमार ने समारोह के संबोधन में कहा कि परवरिश करना एक समस्या है, लोगों की इस गलत धारणा को बदलने और उन्हें यह एहसास दिलाने के लिए कि यह एक निस्वार्थ और प्रतिबद्ध कार्य है जिसे जीवन भर करना होता है। इसी विचार ने उन्हें "माइंडफुलपेरेंटिंग" नामक एक पुस्तक लिखने को प्रेरित किया।
"माइंडफुलपेरेंटिंग" के सह-लेखक (को ऑर्थर) प्रवीण परमेश्वर ने कहा कि माता-पिता सभी के लाभ के लिए प्रशिक्षक की तरह एक सार्थक भूमिका निभा सकते हैं और उन्हें निभानी भी चाहिए।
बिरला विद्या निकेतन की प्रिंसिपल मीनाक्षी कुशवाहा ने समारोह में अपने संबोधन में माता-पिता से अनुरोध किया कि अपने बच्चों को केवल सलाह देने के बजाय, जिस पर वे खुद भी अमल नहीं करते हैं, उनके रोल-मॉडल बनेने का प्रयत्न करें।


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