दिवाली कब है (Diwali 2020 Date)

By Careerindia Hindi Desk

Diwali 2020 Date In India / When Is Diwali Kab Hai 2020: कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली पूजन (महालक्ष्मी पूजा) का विधान है। दिवाली से पहले करवा चौथ, गौत्सव, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और फिर दिवाली का पर्व आता है। दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव, भाई दूज और विश्वकर्मा पूजा की जाती है। हिन्दुओं का सबसे बड़ा दिवाली का पर्व पूरे विश्व में पांच दिन तक मनाया जाता है। आइये जानते हैं करवा चौथ कब है, गौत्सव कब है, धनतेरस कब है, नरक चतुर्दशी कब है, छोटी दिवाली कब है और दिवाली कब है, गोवर्धन पूजा कब है, अन्नकूट महोत्सव कब है, भाई दूज कब है और विश्वकर्मा पूजा कब है।

दिवाली कब है (Diwali 2020 Date)

 

दिवाली के दिन भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली से पहले पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई की जाती है और शाम के समय गणेश जी और लक्ष्मी जी का पूजन करके पूरे घर को दीपों से सजाकर माता लक्ष्मी की स्वागत किया जाता है। दिवाली को दीपों का त्योहार कहा जाता है। पुराणों के अनुसार दीपावली के दिन ही भगवान राम अयोध्या लौटे थे। भगवान राम के आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया था। उसी समय से दिवाली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं दिवाली 2020 की तिथि, लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, दिवाली का महत्व, दिवाली पूजन विधि और दिवाली की कथा के बारे में।

When Is Diwali 2020: दिवाली कब है 2020 ? दिवाली 2020 में 14 नवंबर को मनाई जाएगी। दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली पर माता लक्ष्मी, कुबेर जी और भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान है।

 

दिवाली 2020 तिथि और शुभ मुहूर्त (Diwali 2020 Date Time Muhurat)

दिवाली की तिथि: 14 नबंवर 2020

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 14 नबंवर 2020 दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त: अगले दिन सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक (15 नबंवर 2020)

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 7 बजकर 24 मिनट तक (14 नबंवर 2020)

प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 07 मिनट तक

वृषभ काल मुहूर्त: शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 7 बजकर 24 मिनट तक

दिवाली पूजन शुभ चौघड़िया मुहूर्त (Diwali Pujan Shubh Choghadiya Muhurat)

दिवाली लक्ष्मी पूजन सुबह का मुहूर्त

शुभ मुहूर्त: सुबह 08:06 से 09:27 तक

चर मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 01:33 तक

लाभ मुहूर्त: दोपहर 01:33 से 02:54 तक

अमृत मुहूर्त: दोपहर 02:54 से शाम 04:16 तक

दिवाली लक्ष्मी पूजन रात/रात्रि का मुहूर्त

लाभ मुहूर्त: शाम 05:38 से 07:16 तक

शुभ मुहूर्त: शाम 08:55 से रात 10:33 तक

अमृत मुहूर्त: रात 10:33 से रात 12:11 तक

दिवाली पूजन शुभ समय 14 नवंबर 2020 (Diwali Pujan Auspicious Timings 14th November 2020)

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:27 तक

अमृत कला मुहूर्त: दोपहर 12:26 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक

सर्वार्थ सिद्धि योग मुहूर्त: प्रातः 06:43 से प्रातः 08:09 तक

विजया मुहूर्त: दोपहर 01:53 से शाम 02:36 तक

गोधुली मुहूर्त: शाम 05:17 बजे से शाम 05:41 बजे तक

सयाना संध्या मुहूर्त: शाम 05:28 से शाम 06:47 तक

निशिता मुहूर्त: 11:39 अपराह्न से 12:32 बजे, 15 नवंबर

ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:58 से 15 नवंबर, शाम 05:51 तक, 15 नवंबर

प्रातः संध्या: 05:24 बजे, 15 नवंबर से 06:44 बजे, 15 नवंबर

दिवाली लक्ष्मी पूजन (14 नवंबर 2020) सर्वश्रेष्ठ शुभ समय राज्य अनुसार सूची (Diwali Lakshmi Pujan (14th November 2020) Best Auspicious Timings State Wise List)

दिवाली लक्ष्मी पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 2020: शाम 05:28 बजे से अपराह्न 07:24 बजे तक (अवधि - 01 घंटा 56 मिनट)

शाम 05:58 से 07:59 तक - पुणे

शाम 05:28 से 07:24 तक - नई दिल्ली

शाम 05:41 से 07:43 तक - चेन्नई

शाम 05:37 से 07:34 तक - जयपुर

शाम 05:42 से 07:42 तक - हैदराबाद

शाम 05:29 से 07:25 तक - गुड़गांव

शाम 05:26 से 07:21 तक - चंडीगढ़

शाम 04:54 से 06:52 तक - कोलकाता

शाम 06:01 से 08:01 तक - मुंबई

शाम 05:52 से 07:54 तक - बेंगलुरु

शाम 05:57 से 07:55 तक - अहमदाबाद

शाम 05:28 से 07:23 तक - नोएडा

दिवाली का महत्व (Importance Of Diwali Festival)

पुराणों के अनुसार त्रेतायुग में जब भगवान श्री राम रावण का वध करके अयोध्या लौट रहे थे तो अयोध्या के लोगों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया था। भगवान श्री राम के इसी स्वागत को हर साल लोग दिवाली के त्योहार के रूप में मनाते हैं। दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन लोग अपने घर अच्छी तरह से सफाई करते हैं और अपने घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाकर और पूरे घर को दीपों से सजाकर मां लक्ष्मी के आगमन का स्वागत करते हैं। लोग इस दिन अपने घरों को अच्छी तरह से सजाते हैं और भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा के बाद खील और बतासे का प्रसाद बांटकर एक दूसरे को दिवाली की शुभकामना देते हैं। दिवाली पटाखे जलाकर इस त्योहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार पर लोग अपने गहनों,पैसों और बहीखातों की भी पूजा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से मां लक्ष्मी का घर में वास होता है और घर में कभी भी धन की कोई कमीं नही रहती।

दिवाली की पूजा विधि (Method Of Diwali Pujan)

1. दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

2. इस दिन घर के सभी लोगो शाम के समय स्नान करने के बाद कोरे वस्त्र धारण करने चाहिए।

3. इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल छिड़कर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।

4.कपड़ा बिछाने के बाद खील और बताशों की ढेरी लगाकर उस पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी की प्रतिमा और कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित करें।

5. इसके बाद कुबेर जी प्रतिमा भी स्थापित करें और साथ ही कलश की स्थापना भी करें । उस पर स्वास्तिक बनाकर आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें।

6.कलश स्थापित करने के बाद पंच मेवा, गुड़ फूल , मिठाई,घी , कमल का फूल ,खील और बातसे भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के आगे रखें।

7. इसके बाद अपने घर के पैसों, गहनों और बहीखातों आदि को भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के आगे रखें।

8.यह सभी चीजें रखने के बाद घी और तेल के दीपक जलाएं और विधिवत भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी की पूजा करें।

9.माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप और साथ ही श्री सूक्त का भी पाठ करें।

10.पूजा समाप्त होने के बाद अंत में अपने घर के मुख्य द्वार पर तेल के दो दीपक अवश्य जलाएं और साथ ही अपनी तिजोरी पर भी एक दीया अवश्य रखें।

दिवाली की कथा (Diwali Pooja Story)

पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में एक साहुकार रहा करता था। उसकी एक बेटी थी जो रोज पीपल पर जल चढ़ाया करती थी। जिस पेड़ को वह जल देती थी वहां पर लक्ष्मी जी भी वास करती थी। लक्ष्मी जी उस साहुकार की लड़की से बहुत अधिक प्रसन्न थी। जिसके बाद उन्होंने उस लड़की से मित्र बनने की इच्छा प्रकट की। लड़की ने कहा कि मैं अपने पिता से इस विषय में पूछूंगी। जब उसने अपने पिता को इस बारे में बताया तो उसके पिता ने इसके लिए हां कर दी। जिसके बाद वह एक दिन लक्ष्मी जी साहुकार की बेटी को अपने घर लेकर आ गई। उन्होने साहुकार की पुत्री का बहुत स्वागत किया। जब साहुकार की बेटी जाने लगी तो लक्ष्मी जी ने पूछा कि अब तुम मुझे अपने घर कब बुलाओगी। जिसके बाद एक दिन उसने लक्ष्मी जी को अपने घर बुलाया लेकिन उसकी वह बहुत ही निर्धन थी। जिसके कारण उसके मन में डर था कि वह लक्ष्मी जी का स्वागत कैसे करेगी। उसके पिता ने जब उसकी यह हालत देखी तो उससे कहा कि तू घर की सफाई करके चार बाती वाला दीपक जला और लक्ष्मी जी को याद कर। उसी समय एक चील अपनी चोंच में नोलखा हार लेकर जा रही थी और उसने उस हार को साहुकार के घर पर डाल दिया। जिसे बेचकर उसने लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी की। लक्ष्मी जी भगवान गणेश के साथ उसके घर में पाधारी। साहुकार की बेटी ने उन दोनों की खूब सेवा की। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने साहुकार को अमीर बना दिया।

Diwali Essay For Kids Students In Hindi

"दिवाली" को "दीपावली" के नाम से भी जाना जाता है जो भारत में या दुनिया भर में रहने वाले हिंदुओं के सबसे शुभ त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार पूरी दुनिया में लोगों द्वारा बहुत उत्साह और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि यह एक हिंदू त्योहार माना जाता है, लेकिन विभिन्न समुदायों के लोग पटाखे और आतिशबाजी फोड़कर उज्ज्वल त्योहार मनाते हैं।

हिंदुओं के अनुसार, दिवाली एक त्योहार है जो दानव राजा रावण को हराने के बाद अपनी पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण और उत्साही भक्त हनुमान के साथ अयोध्या में भगवान राम की वापसी की याद दिलाता है। यह धार्मिक त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

दीवाली को अक्सर "प्रकाशोत्सव" के रूप में जाना जाता है। लोग मिट्टी के तेल के दीयों को जलाते हैं और अपने घरों को विभिन्न रंगों और आकारों की रोशनी से सजाते हैं जो उनके प्रवेश द्वार और बाड़ पर चमकते हैं जो एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य के लिए बनाते हैं। बच्चों को पटाखे फोड़ना पसंद है और विभिन्न आतिशबाजी जैसे स्पार्कलर, रॉकेट, फूलों के बर्तन, फव्वारे, peony आतिशबाजी, आदि।

इस शुभ अवसर पर, हिंदुओं द्वारा देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, क्योंकि व्यापारी दिवाली पर नए खाता बही खोलते हैं। इसके अलावा, लोगों का मानना ​​है कि यह सुंदर त्योहार सभी के लिए धन, समृद्धि और सफलता लाता है। लोग अपने लिए नए कपड़े भी खरीदते हैं और त्योहार के दौरान अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ उपहारों के आदान-प्रदान के लिए तत्पर रहते हैं। "

हमें उम्मीद है कि दीपावली त्योहार के लिए उपरोक्त निबंध अंग्रेजी उन युवा शिक्षार्थियों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो इस विषय पर एक निबंध रचना करना चाहते हैं। हमने ऊपर दिए गए निबंध में शुभ दीवाली त्योहार के सार को सही ठहराने के लिए अपने अंत से एक मामूली प्रयास किया है। बच्चे दिवाली पर इस नमूना निबंध से कुछ विचार चुन सकते हैं और कुछ पंक्तियों का मसौदा तैयार कर सकते हैं और सीख सकते हैं कि वाक्यों को कैसे फ्रेम किया जाए और साथ ही साथ अपने अंग्रेजी लेखन कौशल को बढ़ाया जाए।

Happy Diwali / Happy Diwali 2020

Sharda Puja 2020 Kab Hai Date Time Muhurat Puja Vidhi Katha: माता शारदा की पूजा दिवाली के दिन की जाती है। मां शारदा एक नाम माता सरस्वती भी है। जो ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी मानी जाती है। दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ ही माता शारदा की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है तो आइए जानते हैं शारदा पूजा 2020 में कब है (Sharda Puja 2020 Mein Kab Hai), शारदा पूजा का शुभ मुहूर्त (Sharda Puja Ka Shubh Muhurat), शारदा पूजा का महत्व (Sharda Puja Importance),शारदा पूजा की विधि (Sharda Puja Vidhi), मां शारदा की कथा (Goddess Sharda Story)

मां शारदा की पूजा (Goddess Sharda Puja) कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (Kartik Amavasya) को की जाती है। इस दिन मां शारदा की पूजा विशेष फलदायी होती है। मां शारदा की पूजा करने से व्यक्ति की विद्या अर्जन में आ रही सभी परेशानी समाप्त हो जाती है। विद्यार्थियों को तो इस मां शारदा की पूजा अवश्य ही करनी चाहिए। जिससे उन्हें उनकी विद्या में सफलता प्राप्त हो सके।

शारदा पूजा 2020 तिथि (Sharda Puja 2020 Date Time)

14 नवंबर 2020

शारदा पूजा 2020 शुभ मुहूर्त (Sharda Puja 2020 Shubh Muhurat)

दीवाली शारदा पूजा के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से शाम 4 बजकर 07 मिनट तक

सायाह्न मुहूर्त (लाभ) - शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 7 बजकर 07 मिनट तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - रात 8 बजकर 47 मिनट से रात 1 बजकर 45 मिनट तक

उषाकाल मुहूर्त (लाभ) - सुबह 5 बजकर 04 मिनट से सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक (15 नवंबर 2020)

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से (14 नवंबर 2020)

अमावस्या तिथि समाप्त - अगले दिन सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक (15 नवंबर 2020)

शारदा पूजा का महत्व (Sharda Puja Importance)

शारदा पूजा दिवाली के दिन ही की जाती है। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ ही माता शारदा यानी सरस्वती की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। माता शारदा को ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण से दिवाली के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। विद्यार्थियों को तो इस दिन माता सरस्वती की पूजा अवश्य ही करनी चाहिए। जिससे उनकी विद्या में किसी भी प्रकार कोई समस्या न आए।

माता शारदा की पूजा व्यापार करने वाले वाले लोगों की अधिक महत्वपूर्ण होती है। गुजरात में इस दिन चोपड़ा यानी नए बहीखातों की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ देवी सरस्वती की पूजा करने से धन और संपन्नता तो बढ़ती ही है साथ ही ज्ञान में भी बढ़ोतरी होती है। गुजरात में शारदा पूजा न केवल दिवाली पूजा के नाम से प्रसिद्ध है बल्कि चोपड़ा पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।

मां शारदा की पूजा विधि (Maa Sharda Ki Puja Vidhi)

1. दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ ही माता शारदा यानी सरस्वती जी की भी पूजा की जाती है।

2. इस दिन एक साफ चौकी लेकर उस गंगाजल छिड़क कर सफेद रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान गणेश और माता सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

3.मां शारदा की यह पूजा आपको शाम के समय पर करनी है।यदि आप इस दिन सरस्वती यंत्र स्थापित करें तो आपके लिए काफी शुभ है। माता सरस्वती की पूजा से पहले भगवान गणेश का विधिवत पूजन करें.

4. इसके बाद मां शारदा को सफेद या फिर पीले फूल और सफेद चंदन अर्पित करें और इसके बाद उनका श्रृंगार करें।

5. मां का श्रृंगार करने के बाद ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करें।

6. इसके बाद मां शारदा की विधिवत पूजा करें और साथ ही पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की भी पूजा करें।

7.इसके बाद मां शारदा की कथा पढ़े या सुनें। उसके बाद माता शारदा की धूप व दीप से आरती उतारें।

8.माता शारदा की आरती उतारने के बाद उन्हें उन्हें दही, हलवा, केसर मिली हुई मिश्री के प्रसाद का भोग लगाएं।

9. इसके बाद माता शारदा से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना अवश्य करें।

10. यदि संभव हो तो निर्धन बच्चों को पुस्तकों का दान अवश्य करें।

11. अंत में माता सरस्वती को दही, हलवा, केसर मिली हुई मिश्री के प्रसाद का भोग लगाएं।

मां शारदा की कथा (Mata Sharda Ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने ब्रह्मदेव को संसार की रचना का आदेश दिया था। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने सभी जीवों विशेषकर मनुष्य की रचना की। लेकिन ब्रह्मदेव को इससे भी संतुष्टि प्राप्त नही हुई। ब्रह्मा जी को लगता था कि संसार में अभी भी कुछ कमी है क्योंकि हर तरफ ही मौन का वातावरण है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से आज्ञा पाकर अपने कमंडल में से जल लेकर छिड़काव किया। पृथ्वीं पर जैसे ही ब्रह्मा जी के कमंडल का जल गिरा उसी समय धरती पर कंपन होने लगा।जिसके बाद वृक्षों से अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी। जो वीणा और वर मुद्रा के साथ प्रकट हुई थीं। उनके अन्य हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाने के लिए कहा। जैसे ही उस देवी ने वीणा बजाई वैसे ही संसार के सभी प्राणियों को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल होने लगा। पवन से सरसराहट की आवाज आने लगी। उस समय ब्रह्मा जी ने उस देवी को सरस्वती नाम से संबोधित किया। माता सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी जैसे नामों से भी जाना जाता है।

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English summary
Diwali 2020 Date In India / When Is Diwali Kab Hai 2020 / Diwali Muhurat / Mahalakshmi Pujan Muhurat: When is Diwali 2020? Diwali 2020 will be celebrated on 14 November. The festival of Diwali is celebrated on the amavasya of Kartik month. On Diwali there is a law to worship Goddess Lakshmi, Kubera Ji and Lord Shri Ganesh. On the new moon day of Kartik month, there is the law of Diwali Pujan (Mahalakshmi Puja). Before Diwali comes the festival of Karva Chauth, Gautsav, Dhanteras, Narak Chaturdashi, Chhoti Diwali and then Diwali. The day after Diwali is Govardhan Puja, Annakoot Festival, Bhai Dooj and Vishwakarma Puja. The biggest Diwali festival of Hindus is celebrated for five days all over the world. Let us know when Karva Chauth is, when is Gautamsav, when is Dhanteras, when is Narak Chaturdashi, when is Chhoti Diwali and when is Diwali, when is Govardhan Puja, when is Annakoot festival, when is Bhai Dooj and when is Vishwakarma Puja.
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