Exam Paper Leak Bill Kya hai: भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं के पहले प्रश्न पत्रों का लीक होना जैसे आम बात हो गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की ज्यादातर खबरें राज्य पीसीएस परीक्षाओं के दौरान आती हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि अब पेपर लीक किया तो आपको 10 वर्षों की सजा और 1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है।

दरअसल, संसद की वेबसाइट पर प्रकाशित बिजनेस सूची के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 पर विशेष जानकारी दी गई। इस विधेयक का उद्देश्य प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक पर अंकुश लगाना है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में सोमवार को लोक परीक्षा विधेयक 2024 पेश किया।
गौरतलब हो कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र की शुरुआत में संसद की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन के दौरान पुष्टि की थी कि सरकार परीक्षाओं में अनियमितताओं के संबंध में युवाओं की चिंताओं से अवगत है। उन्होंने कहा, इसलिए, एक नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे कदाचार से सख्ती से निपटने के लिए कानून बनाया जायेगा।
सख्त दंड और डिजिटल सुरक्षा पर ध्यान देने के साथ मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में अखंडता को बहाल करना है। इस विधेयक का उद्देश्य देश भर में एक निष्पक्ष और योग्यता-संचालित प्रणाली को बढ़ावा देना है।
लोक परीक्षा विधेयक 2024 या पेपर लीक बिल क्या है? | What is Paper Leak Bill?
मालूम हो कि केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा संसद में सोमवार को पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए लोक परीक्षा विधेयक 2024 पेश किया गया। इस बिल में पेपर लीक मामलों में कम से कम तीन से पांच साल की सजा का प्रस्ताव है। हालांकि, संगठित अपराध के मामलों के लिए, विधेयक में 5-10 साल की कैद का प्रस्ताव भी दिया गया है।
विधेयक के अनुसार, जांच किसी ऐसे अधिकारी द्वारा की जानी चाहिये जो पुलिस उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर से नीचे का न हो। केंद्र सरकार के पास जांच को किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की भी शक्ति है। मोटे तौर पर, विधेयक के तहत 20 अपराधों और अनुचित साधनों की पहचान की गई है, जिसमें किसी उम्मीदवार की योग्यता या रैंक को शॉर्टलिस्ट करने या अंतिम रूप देने के लिए प्रतिरूपण, उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ शामिल है।
विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं पर एक उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय तकनीकी समिति की स्थापना की भी परिकल्पना की गई है, जो डिजिटल प्लेटफार्मों को सुरक्षित करने, फुल-प्रूफ आईटी सुरक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी लागू करने और बुनियादी ढांचे के लिए राष्ट्रीय मानक तैयार करने के लिए प्रोटोकॉल विकसित करेगी।
हालाँकि, विधेयक उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिसमें कहा गया है कि वे इसके प्रावधानों के तहत उत्तरदायी नहीं होंगे, लेकिन मौजूदा प्रशासनिक नियमों के दायरे में रहेंगे।
पेपर लीक बिल का उद्देश्य क्या है?
पेपर लीक विधेयक का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती परीक्षा (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित एनईईटी, जेईई और सीयूईटी सहित विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी को संबोधित करना है। इस बिल के तहत पेपर लीक मामलों को संबंधित विभाग द्वारा गभीरता से लिया जायेगा और इस पर कड़ी कार्रवाई कर देश में परीक्षाओं से पहले पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाये जाने का प्रयास किया जायेगा।

पेपर लीक किया तो क्या होगी सजा
परीक्षा में सेवा प्रदाता फर्मों के लिए, 1 करोड़ तक का जुर्माना और परीक्षा की आनुपातिक लागत की वसूली को सजा के रूप में प्रस्तावित किया गया है और यदि जांच निकाय यह साबित कर देता है, तो फर्म को संबंधित अपराध के लिए चार साल के लिए सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से भी रोक दिया जायेगा।
इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनयोग्य होंगे। इस अधिनियम के तहत अनुचित साधनों और अपराधों का सहारा लेने वाले किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को कम से कम तीन साल की कैद की सजा दी जायेगी, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा दी जायेगी, बशर्ते कि जब तक भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू नहीं हो जाता, तब तक उक्त अधिनियम के स्थान पर भारतीय दंड संहिता के प्रावधान लागू होंगे।
पेपर लीक बिल में क्या-क्या प्रावधान शामिल हैं?
इस बिल में सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से संबंधित अनुचित साधनों में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों या संस्थानों के समूह द्वारा किया गया या किसी भी उद्देश्य से किया गया कोई भी कार्य या चूक शामिल होगी, और इसमें मौद्रिक या गलत तरीके से निम्नलिखित में से कोई भी कार्य शामिल होगा, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं होगा।
- प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी या उसके किसी भाग का लीक होना;
- प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी को लीक करने के लिए दूसरों के साथ मिलीभगत में भाग लेना;
- बिना अधिकार के प्रश्नपत्र या ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन रिस्पॉन्स शीट हासिल करना या उसे अपने पास रखना;
- किसी सार्वजनिक परीक्षा के दौरान किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा एक या अधिक प्रश्नों का समाधान पत्र प्रदान करना;
- सार्वजनिक परीक्षा में अनाधिकृत रूप से किसी भी तरीके से उम्मीदवार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना;
- ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन रिस्पॉन्स शीट सहित उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ करना;
- बिना किसी अधिकार के किसी वास्तविक त्रुटि को सुधारने के अलावा मूल्यांकन में बदलाव करना;
- केंद्र सरकार द्वारा स्वयं या अपनी एजेंसी के माध्यम से सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने के लिए स्थापित मानदंडों या मानकों का जानबूझकर उल्लंघन;
- किसी सार्वजनिक परीक्षा में उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग या किसी उम्मीदवार की योग्यता या रैंक को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक किसी दस्तावेज़ के साथ छेड़छाड़ करना;
- सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में अनुचित साधनों की सुविधा के लिए सुरक्षा उपायों का जानबूझकर उल्लंघन;
- कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़;
- परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने की सुविधा के लिए उम्मीदवारों के लिए बैठने की व्यवस्था, तारीखों और पालियों के आवंटन में हेरफेर;
- सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण या सेवा प्रदाता या सरकार की किसी अधिकृत एजेंसी से जुड़े व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता को धमकी देना या गलत तरीके से रोकना; या किसी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में बाधा डालना;
- धोखा देने या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना;
- नकल करने या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी परीक्षा आयोजित करना, फर्जी प्रवेश पत्र या प्रस्ताव पत्र जारी करना।
सबसे ज्यादा पेपर लीक किस राज्य में हुआ?
रोपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2023 तक पेपर लीक से 1.5 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। इसी अवधि में प्रश्न पत्र लीक के 70 से अधिक मामले सामने आए हैं। राजस्थान पेपर लीक का बड़ा केंद्र बनता दिख रहा है। वर्ष 2018 और फरवरी 2023 के बीच राज्य में पेपर लीक के कारण कम से कम एक दर्जन भर्ती अभियान रद्द कर दिए गए हैं।
वर्ष 2014 से अब तक सरकारी भर्ती पेपर लीक के 33 मामलों में 615 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 2018 और फरवरी 2023 के बीच, पेपर लीक के कारण राजस्थान में कम से कम 12 भर्ती अभियान रद्द कर दिए गए। खबरों के अनुसार, 2019 के बाद से राज्य में हर साल औसतन तीन पेपर लीक हुए। पेपर लीक से करीब 40 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं।


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