भारत में हुई थी "Cyclone" शब्द की उत्पत्त‍ि, पर किस शहर से?

चक्रवात मैंडूस, जो गंभीर चक्रवात की श्रेणी में आता है, उसकी विनाशकारी हवाओं और भारी बारिश ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों को 9 दिसंबर 2022 की आधी रात से बुरी तरह घेर लिया लिया है। जिसके चलते भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने तटीय राज्यों के कई हिस्सों में भारी वर्षा की भविष्यवाणी की है क्योंकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश के बीच के तट को पार करने की उम्मीद है।

आप मांडूस के बारे में ताजा अपडेट हमारी न्यूज वेबसाइट oneindia.com पर पढ़ सकते हैं। खैर, आज के इस लेख हम आपको चक्रवात के इतिहास के बारे में बताएंगें। हमें उम्मीद है कि आपको यह लेख दिलचस्प लगेगा क्योंकि चक्रवात का इतिहास खासतौर पर भारत के साथ जुड़ा हुआ है।

भारत में हुई थी

तो चलिए 9 दिसंबर 1807 से शुरू करते हैं

ठीक 215 साल पहले इसी दिन यानी 9 दिसंबर 1807 को मद्रास शहर में एक भीषण चक्रवात आया था और सिर्फ दो दिनों में उसने भारी तबाही मचाई थी। जिनके बाद 23 अप्रैल 1859 को दूसरा चक्रवात आया जो कि तीन दिनों तक चला। इतना ही नहीं, 12 दिसंबर 1884 को नागपत्तनम में एक और चक्रवात आया, और यह चक्रवात 7 दिनों तक चला यानि कि 19 दिसंबर 1884 तक चला। इसका मतलब यह है कि चक्रवातों का जीवन आमतौर पर 2-3 दिनों का होता है, लेकिन यह 7 दिनों तक बढ़ सकता है। तो ये थी चक्रवात के बारे में संक्षिप्त जानकारी अब हम चक्रवात शब्द के जन्म के बारे में पढ़ेंगे।

साइक्लोन (चक्रवात) शब्द की उत्पत्ति

क्या आप जानते हैं कि "साइक्लोन" शब्द की उत्पत्ति भारत में हुई है?

जी हां! साइक्लोन शब्द का प्रयोग पहली बार कलकत्ता में किया गया था, जिसे वर्तमान में कोलकाता के नाम से जाना जाता है।

बता दें कि डॉ कमला देवी, भारतीदासन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध के अनुसार, "साइक्लोन" शब्द पहली बार भारतीय शहर कलकत्ता में एक अंग्रेज के दिमाग में आया, जब वह कलकत्ता के समुद्री न्यायालय के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत था। उसका नाम हेनरी पिडिंगटन था। वह हिंद महासागर के तूफानी मौसम का अध्ययन करने वाला समुद्री कप्तान था। जिसने दिसंबर 1789 के विनाशकारी उष्णकटिबंधीय तूफान का गहन अध्ययन किया। जिस विनाशकारी तूफान में 20,000 से अधिक लोग मारे गए थे। जिसके बाद 1840 के आसपास एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल ने अपना शोध प्रस्तुत करते हुए पिडिंगटन ने 1789 को आए विनाशकारी उष्णकटिबंधीय तूफान को 'साइक्लोन' के रूप में वर्णित किया। जिसे हिंदी में चक्रावात कहा जाता है।

साइक्लोन (चक्रवात) शब्द का अर्थ

'साइक्लोन' शब्द ग्रीक शब्द 'क्यक्लोन' से लिया गया है जिसका अर्थ है 'कॉइल ऑफ द स्नेक' की तरह एक चक्र में घूमना। बता दें कि क्लाउड बैंड के इस स्पाइरल आकार को पहली बार पिडिंगटन ने बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों का सामना करने वाले जहाजों से कई बादल और हवा की रिपोर्ट की जांच पर देखा था। जिसके बाद उन्होंने ही इन वायुमंडलीय प्रणालियों को चक्रवात नाम दिया था। पिडिंगटन ने 1848 में मेरिनर्स की पुस्तक, द सेलर हॉर्न बुक फॉर द लॉ ऑफ स्टॉर्म में इस शब्द को पेश किया, जिसका उद्देश्य मेरिनर्स को लॉ ऑफ स्टॉर्म के सिद्धांत और व्यावहारिक उपयोग की व्याख्या करना था।

जबकि 1875 में, अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन ने कम दबाव प्रणाली का वर्णन करने के लिए चक्रवात शब्द को अपनाया।

चक्रवातों के विभिन्न नाम

दरअसल, उष्णकटिबंधीय महासागरों के विभिन्न भागों में चक्रवात आते हैं जो कि अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम धारण करते हैं। जैसे कि हरिकेन, साइक्लोन और टाइफून लेकिन इन सब शब्दों का अर्थ एक ही है। बता दें कि हरिकेन को हिंदी में तूफान, साइक्लोन को चक्रवात और टाइफून को आंधी कहा जाता है।

'टाइफून' शब्द का प्रयोग आज उत्तर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में किया जाता है। यह शब्द चीनी शब्द ताइफेंग से लिया गया था, जिसे जापानी में ताइफू कहा जाता है। ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार ट्यूफ़ॉन उस राक्षस का नाम है जो गर्म हवाओं के लिए जिम्मेदार है।

उत्तरी अटलांटिक में इन्हें 'हरिकेन' कहा जाता है। 'हरिकेन' शब्द मूल रूप से वेस्ट इंडीज के मूल निवासी, कोलंबस के समय का अनुसरण करते हुए शुरुआती नाविकों से आया था, इस शब्द को विभिन्न रूप से 'अराकान' 'हुरिरनवुकन' 'यूरिकन' 'हुराकैन' आदि के रूप में दिया गया था। जबकि हरिकेन शब्द की शुरुआत एक देशी कैरेबियन अमेरिंडियन तूफान भगवान नाम से हुई थी।

हिंद महासागर में इन्हें 'साइक्लोन' कहा जाता है।

साइक्लोन को हिंदी में चक्रवात कहा जाता है, तमिल में इसे 'पुयाल', 'कडुवल्ली', 'सुरावली', 'सुरवारी', 'सूरा' का अर्थ पुयाल, 'पेरुंगकररू', 'पेरुवल्ली', चिथिरईसुलझी', 'सुजलकररू', 'वली' का अर्थ पवन कहा जाता है।

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English summary
Exactly 215 years ago, on this day i.e. 9th December 1807, a severe cyclone hit the city of Madras and caused huge devastation in just two days. After which another cyclone came on 23 April 1859 which lasted for three days. Not only this, another cyclone hit Nagapattinam on 12 December 1884, and this cyclone lasted for 7 days i.e. till 19 December 1884.
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