Indus River Treaty: सिंधु जल संधि क्या है, जानिए किन-किन देशों के साथ है भारत का जल संधि समझौता

Indus River Treaty: भारत को नदियों का देश भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हिमालय की गोद से कई जीवन दायिनी नदियों का प्रवाह होता है। यहां हिमालय पर्वत की गोद से निकलने वाली नदियों में गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां शामिल हैं।

भारत का किन देशों के साथ है जल संधि समझौता, जानिए भारत की टॉप जल संधियों की लिस्ट

भारत के लिए जीवन दायिनी ये नदियां न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत में उत्सर्ग कई नदियां ऐसी हैं जो केवल भारत को ही नहीं बल्कि भारत के पड़ोसी देशों के लिए भी वरदान स्वरूप हैं। इनमें मुख्य है सिंधु और गंगा नदी।

गौरतलब हो कि सिंधु नदी विश्व की बड़ी और लंबी नदियों में से एक है। सिंधु नदी का उद्गम स्थल तिब्बत में मानसरोवर के निकट है। सिंधु नदी भारत से होती हुई पाकिस्तान की ओर जाती है। सिंधु नदी अपने प्रवाह के साथ अंत में कराची से होते हुए अरब सागर में मिल जाती है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक नदी की कई सहायक नदियां भी होती हैं, वैसे ही भारतीय क्षेत्र में बहने वाली सिंधु नदीं की भी कई प्रमुख सहायक नदियां हैं। इनमें मुख्य रूप से सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब और झेलम हैं। बता दें कि सतलुज नदीं का उद्गम भी तिब्बत में ही होता है।

जल संधि क्या होती है?

जल संधियां यानी पानी से जुड़े समझौते। आमतौर पर जल संधियां, दो देशों के बीच इस बात पर तय किए जाते हैं कि कौन-सी नदी का पानी किस देश को कितना मिलेगा और कैसे इस्तेमाल किया जाएगा। ये संधियां बहुत जरूरी होती हैं, क्योंकि ये झगड़े रोकती हैं और पानी को मिल-बांटकर इस्तेमाल करने में मदद करती हैं।

भारत की कई नदियां उसके पड़ोसी देशों से होकर बहती हैं। इन पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और चीन शामिल है। ऐसे में पानी को लेकर विवाद ना हो, इसके लिए भारत ने कई देशों के साथ समझदारी से पानी बांटने के लिए जल संधियां की हैं। इन जल संधियों से भारत को अपने पड़ोसी देशों से शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने, बाढ़ या सूखे जैसी समस्याओं से निपटने और जल संसाधनों का सही उपयोग करने में मदद मिलती है। ये संधियां भारत की जल नीति और विदेश नीति दोनों में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं।

Top Water Treaties in India| भारत की 10 प्रमुख जल संधियों की सूची

अब आइए जानते हैं ऐसी ही भारत की सबसे अहम जल संधियों के बारे में, जो देश के जल प्रबंधन और आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आप इस लेख से मदद ले सकते हैं।

1. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि

सिंधु जल संधि भारत का सबसे पुराना जल संधि है। इस जल संधि पर समझौता 1960 में किया गया। सिंधु जल संधि दुनिया की सबसे पुरानी और टिकाऊ जल संधियों में से एक मानी जाती है। इसे विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में किया गया था। इस समझौते के अनुसार, भारत को तीन पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब) दी गईं। यह संधि अब तक कई युद्धों और तनाव के बावजूद बनी रही है और दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का मुख्य आधार है।

2. भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि

गंगा जल संधि पर समझौता 12 दिसंबर 1996 में हुआ। यह संधि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी को बांटने के लिए की गई थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और तत्कालीम बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना से इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था। गंगा जल संधि का मुख्य उद्देश्य खासकर सूखे के मौसम में, फरक्का बैराज से निकलने वाले पानी का समान रूप से बंटवारा करना है। इस संधि में जल प्रवाह की निगरानी और आपसी जानकारी साझा करने की भी व्यवस्था है। गंगा जल संधि पर समझौता 30 वर्षों के लिए किया गया था। बता दें कि फरक्का बैरेज पश्चिम बंगाल की गंगा नदी पर स्थित है।

3. भारत और नेपाल के बीच महाकाली संधि

भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी के जल उपयोग को लेकर यह संधि हुई थी। भारत और नेपाल के बीच महाकाली संधि 1996 में हुई थी। इस जल संधि का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े परियोजनाओं को मिलकर विकसित करना है। इसमें दोनों देशों को बराबरी का अधिकार और लाभ सुनिश्चित किया गया था।

4. भारत और नेपाल के बीच कोसी समझौता

भारत और नेपाल के बीच कोसी समझौता एक द्विपक्षीय समझौता है। इस पर सन् 1954 में हस्ताक्षर किया गया था। नेपाल में कोसी नदी बार-बार बाढ़ लाती है। इस समस्या को हल करने के लिए कोसी बैराज के निर्माण का समझौता हुआ था। इससे न केवल बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद की गई, बल्कि नेपाल और भारत के कुछ इलाकों में सिंचाई की सुविधा भी बेहतर हुई। इस समझौते में बैराज की देखरेख और मरम्मत का ज़िक्र भी किया गया है। बता दें कि 1961 में इस समझौते में कई संशोधन किए गए।

5. भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी समझौते

तिब्बत से निकलने वाली यारलुंग जांग्बो नदी को भारत में ब्रह्मपुत्र नदी के नाम से जाना जाता है। इसे चीन में यारलुंग त्सांगपो कहते हैं। हालांकि भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर कोई औपचारिक संधि नहीं है, लेकिन बाढ़ पूर्वानुमान के लिए दोनों देश जल-प्रवाह डेटा साझा करते हैं। इससे आपदा प्रबंधन और पारस्परिक विश्वास को बढ़ावा मिलता है। भारत के जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार चीन के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद कार्यान्वयन योजनाओं (आईपी) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ब्रह्मपुत्र पर अंतिम आईपी पर 13 जून, 2019 को अहमदाबाद में 12-13 जून, 2019 के दौरान आयोजित भारत और चीन के बीच 12वीं विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।

भारत की शीर्ष 10 सबसे लंबी नदियों की सूची

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English summary
Know about the most important water treaties of India, which help in improving the water management and mutual relations of the neighbouring countries. Check here List of Top Water Treaties of India; Indus River Treaty, Kosi Treaty Details in Hindi
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