Stampede in India: महाकुंभ में क्यों मची भगदड़? क्यों होती है भगदड़ की घटनाएं? जानिए कुंभ में कब-कब हुई भगदड़?

Mahakumbh Stampedes in India: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम क्षेत्र में उमड़ी करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। इसमें कई लोगों की जान चली गई और अनेक घायल हो गए। उत्तर प्रदेश सरकार ने हताहतों की संख्या को लेकर चुप्पी साध रखी है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि प्रशासन पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है और घायलों के स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

आखिर धार्मिक स्थलों पर क्यों होती है जानलेवा भगदड़ की घटनाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि यह हादसा रात 1 से 2 बजे के बीच अखाड़ा मार्ग पर हुआ। जब कुछ श्रद्धालु बैरिकेड्स पार कर गए, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया।

महाकुंभ में उमड़ी श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे अपने निकटतम घाटों पर स्नान करें और संगम क्षेत्र में अनावश्यक भीड़ न बढ़ाएं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि अत्यधिक भीड़ के कारण संत समाज का पारंपरिक स्नान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

भगदड़ की इस घटना ने महाकुंभ में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं श्रद्धालुओं में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से संयम बनाए रखने और निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को टाला जा सके।

मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में क्यों होती है भगदड़ की घटनाएं

भारत में मंदिरों को आस्था एवं पूजा के लिए विशेष स्थल माना जाता है। भारत में मंदिर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु देशभर के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिरों में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है।

हालांकि बड़े धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ के कारण कई बार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भी घट जाती हैं। इनमें भगदड़ एक प्रमुख समस्या बनती है। 1954 से लेकर अब तक भारत के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में होने वाली भगदड़ के परिणामस्वरूप सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं।

आखिर धार्मिक स्थलों पर क्यों होती है जानलेवा भगदड़ की घटनाएं

क्यों होती है जानलेवा भगदड़ों की घटनाएं

भगदड़ तब होती है जब किसी विशेष कारण से भीड़ अनियंत्रित हो जाती है। इससे लोग घबरा जाते हैं और एक दूसरे पर गिरने लगते हैं। मंदिरों में हुई भगदड़ अक्सर भीड़ नियंत्रण की कमी, अव्यवस्था और सुरक्षा के अभाव के कारण होती है। यह घटनाएं हमें बताती हैं कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन कितना महत्वपूर्ण है। भारत में धार्मिक आस्था और विश्वास के चलते मंदिरों में भारी भीड़ जुटना सामान्य बात है, लेकिन भीड़ को नियंत्रित न कर पाना एक बड़ी समस्या बन जाती है।

मंदिरों में हुई भगदड़ की घटनाओं से हम महत्वपूर्ण सीख ले सकते हैं। इन घटनाओं से हम भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की सीख ले सकते हैं। इसके लिए सरकार, मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं सभी को मिलकर काम करना होगा, ताकि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके और भविष्य में किसी की जान न जाए।

इन घटनाओं से न केवल प्रशासन को सबक लेना चाहिए, बल्कि आम जनता को भी यह समझना चाहिए कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धैर्य और अनुशासन बनाए रखना कितना आवश्यक है। इस लेख में हम कुछ ऐसे ही प्रमुख मंदिरों में हुई जानलेवा भगदड़ों की घटनाओं पर प्रकाश डालेंगे, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान चली गई।

आखिर धार्मिक स्थलों पर क्यों होती है जानलेवा भगदड़ की घटनाएं

30 वर्षों में भारत में धार्मिक स्थलों पर हुई भगदड़ की घटनाओं की सूची

कार्यक्रमतिथि
महाकुंभ मेला 2025, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश29 जनवरी 2025
भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, तिरूपति, आंध्र प्रदेश8 जनवरी 2025
वैष्णो देवी मंदिर, कटरा, जम्मू और कश्मीर1 जनवरी 2022
पुत्तिंगल देवी मंदिर, कोल्लम, केरल10 अप्रैल 2016
उज्जैन सिंहस्थ मेला, मप्र5 मई 2016
राजमुंदरी गोदावरी पुष्कर मेला, आंध्र प्रदेश14 जुलाई 2015
चित्रकोट, सतना, मप्र25 अगस्त 2014
रतनगढ़ माता मंदिर, दतिया, मप्र13 अक्टूबर 2013
इलाहाबाद कुम्भ मेला रेलवे स्टेशन10 फरवरी 2013
कुंभ मेला, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश10 फरवरी 2013
बिजासन देवी, सलकनपुर, मप्र21 अक्टूबर 2012
सत्संग, देवघर, झारखण्ड24 सितम्बर 2012
हुसैन टेकरी, रतलाम, मप्र14 जनवरी 2012
सबरीमाला, केरल15 जनवरी 2011
कुंभ मेला, हरिद्वार, उत्तराखंड14 अप्रैल 2010
कृपालु महाराज आश्रम, कुंडा, यूपी4 मार्च 2010
मकर संक्रांति, गंगासागर मेला, पश्चिम बंगाल14 जनवरी 2010
नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश3 अगस्त 2008
चामुंडा देवी मंदिर, जोधपुर, राजस्थान30 सितंबर 2008
करीला देवी मंदिर, अशोक नगर, मप्र27 मार्च 2008
जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा3 जुलाई 2008
मंधेर देवी मंदिर, सतारा, महाराष्ट्र25 जनवरी 2005
कुंभ मेला, नासिक27 अगस्त 2003
शारदा देवी, मैहर, मप्र17 नवंबर 2001
सबरीमाला, केरल14 जनवरी 1999
उज्जैन, मध्य प्रदेश और हरिद्वार, उत्तराखंड15 जुलाई 1996
महामहम टैंक, कुंभकोणम, तमिलनाडु18 फरवरी 1992
कुंभ मेला, हरिद्वारमार्च 1986
कुंभ मेला, इलाहाबादजनवरी 1986
नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश3 अगस्त 1978
कुंभ मेला, इलाहाबाद, यूपी3 फरवरी 1954
कुंभ मेला, इलाहाबादजनवरी 1906
कुंभ मेला, इलाहाबादजनवरी 1840
कुंभ मेला, हरिद्वारमार्च 1820

Mahakumbh Quiz 2025: महाकुंभ पर कोई पूछे प्रश्न तो कैसे दें जवाब? यहां पढ़ें महाकुंभ पर क्विज प्रश्नोत्तरी

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English summary
For Mauni Amavasya, crores of devotees reached Prayagraj Mahakumbh to take a royal bath and in the meantime a stampede-like situation arose. In this article, we will shed light on some such major events, incidents of deadly stampedes in temples, where hundreds of devotees lost their lives. List of stampedes in India; Check deadly Mahakumbh stampedes in India, Hindu temples, religious places stampede. Learn the reasons behind the stampede and details about the incident in Hindi.
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