Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana: किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना और इसके फायदों के बारे में जाने

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना उन युवाओं के लिए है जो विज्ञान और प्रोद्योगिकी दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं और देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। ये एक छात्रवृति (स्कॉलरशिप) है जो उन छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस कार्यकर्म की शुरुआत 1991 में की गई थी। जिसको लेकर हाल ही में लोकसाभ के शीतकालीन सत्र में चर्चा की गई है।

लोकसभा का शीतकालीन सत्र शुरु हो चुका है इस सत्र में कई तरह की योजनाओं की पेशकश की जा रही है ताकि उन्हें लॉन्च किया जा सके। इसके साथ कई पूरानी योजनाओं पर भी चर्चा की जा रही है और देखा जा रहा है कि उन योजनाओं में कितनी प्रगति हुई है और उन योजनाओं की क्या स्थिति है। इसके अलावा आवश्यक बदलावों को साथ उसकी पेशकश की जा रही है।

Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana: किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना  और  इसके फायदों के बारे में जा

आज 21 दिसंबर 2022 को लोकसभा सत्र में किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना को लेकर चर्चा की गई विज्ञान और प्रोद्योगिती और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ, जितेंद्र सिंह ने बताया कि किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की शुरुआत 1991 में की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य रिसर्च के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी योग्यता और शैक्षणिक क्षमता का एहसास दिलाना था।

इस योजना की शुरुआत विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय, विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग और भारत सरकार द्वारा शुरु किया गया था। इस योजना को कार्यान्वित आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा किया गया था।

भारत विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में दिन पर दिन प्रगति करने के लिए की तरह के कार्य कर रहा है और कई नई योजनाओं और कार्यकर्म का लॉन्च कर रहा। इस क्षेत्र में प्रगति और बढ़ाने के लिए आने वाली युवा पीढ़ी की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में उनकी रुची पैदा करने के लिए आवश्यक है।

जिन छात्रों को रिसर्च में दिलचस्पी है उन छात्रों की प्रतिभा की पहचान कर उन्हें फेलोशिप प्रदान की जाती है ताकि उन्हें आगे और अच्छी रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। ये प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया है और इसके माध्यम से सरकार विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में अपने उद्देश्यों को प्राप्त भी कर पा रही है।

जिस साल (1991) इस योजना की शुरुआत की गई थी, उस साल प्राप्त आवेदन की संख्या 1000 थी और 2020 में ये संख्या बढ़कर करीब 1.56 लाख हो गई। इसका अर्थ ये है कि इस योजना का लाभ छात्रों को प्राप्त हो रहा है। इस योजना के तहत अभी तक करीब 5000 छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। इसके साथ ही केवीपीवाई योजना की फेलोशिप प्राप्त करने वाले छात्र भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु (आईआईएससी), भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) और राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर) जैसे भारत के प्रमुख संस्थानों में शामिल होते हैं।

राज्य मंत्री डॉ, जितेंद्र सिंह आगे बताया कि अनुसंधान के लिए और प्रतिभाशाली और योग्यता वाले छात्रों को पहचान करने के उद्देश्य से कौशन वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप (एसएचई) प्रदान करने वाले प्रेरित अनुसंधान के लिए विज्ञान की खोज में नवाचार (आईएनएसपीआईआरई) के घटक में शामिल किया गया है। अब आईएनएसपीआईआरई-एसएचई के पात्राता मानदंड के अनुसार हर साल प्राकृति विज्ञान में अंडग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएशन कोर्स करने वाले करीब 1200 छात्रों को केवीपीवाई स्कॉलरशिप का लाभ प्राप्त होगा।

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना क्या है?

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना जिसे शॉर्ट में केवीपीवाई भी कहा जा सकता है बुनियादी विज्ञान में छात्रों को परामर्श और स्कॉलरशिप के माध्यम से सहायता प्रदान करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में प्ररित छात्रों को आकर्षित कर उन्हें उनकी क्षमता और प्रतिभा का अहसास करना है। इस योजना को भारत सरकार द्वारा फंड किया जाता है।

केवीपीवाई 11 वीं साइंस स्ट्रीम कक्षा के छात्रों को 3 स्ट्रीम में नामांकित करता है जो इस प्रकार है -

- स्ट्रीम एसए
- स्ट्रीम एसएक्स
- स्ट्रीम एसबी

3 स्ट्रीमे के आधार पर संचालित करने के बाद छात्रों को विज्योशी (VIJYOSHI) विज्ञान कैंप में 1-2 साल की मेंटरशिप प्राप्त होती है और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अच्छा एक्सपोजर भी प्राप्त होता है। उसके अनुसार केवीपीवाई छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। ये स्कॉलरशिप कक्षा 12वीं के बाद साइंस स्ट्रीम से संबंधित विषयों में अंडरग्रेजुएट डिग्री के साथ पोस्टग्रेजुएट डिग्री तक शामिल रहती है।

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की चयन प्रक्रिया

इस योजना की शुरुआत प्रतिवर्ष मई और जून के महीने में की जाती है। जिसकी चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाती है।
पहला चरण - एप्टीट्यूड टेस्ट (एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन नवंबर या दिसंबर के महीने में किया जाता है।)
दुसरा चरण - व्यक्तिगत साक्षात्कार (इंटरव्यू)

विज्योशी (VIJYOSHI) की तीनों स्ट्रीम के तहत लगभग 2000 छात्रों को चुना जाता है और इसमें से करीब 1000 छात्रों को प्रतिवर्ष केवीपीवाई स्कॉलरशिप प्राप्त होती है।

विज्योशी क्या है?

विज्योशी के नेशनल साइंस कैंप है जिसका आयोजन आईएनएसपीआईआरई कार्यक्रम, आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईएसईआर कोलकता के माध्यम से आयोजित किया जाता है। विज्योशी की शुरुआत 2009 में की गई थी। इसके माध्यम से केवीपीआई स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है और इस भारत के विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा फंड किया जाता है।

योजना से लाभान्वित हुए छात्रों की संख्या

इस योजना के माध्यम से कई छात्र लाभान्वित हुए हैं राज्यों के अनुसार लाभान्वित छात्रों की संख्या इस प्रकार है।

क्र.सं. राज्य 2019-2020 2020-2021 2021-2022
1 आंध्र प्रदेश 105 100 135
2 असम 6 10 27
3 बिहार 41 59 47
4 चंडीगढ़ 54 10 12
5 छत्तीसगढ़ 17 31 24
6 दिल्ली 218 200 244
7 गोवा 7 6 7
8 गुजरात 147 154 197
9 हरियाणा 114 194 144
10 जम्मू और कश्मीर 1 4 5
11 झारखंड 37 56 48
12 कर्नाटक 271 234 253
13 केरल 96 78 71
14 मध्य प्रदेश 70 81 83
15 महाराष्ट्र 358 397 378
16 ओडिशा 66 85 89
17 पुडुचेरी 5 5 2
18 पंजाब 83 155154
19 राजस्थान 377 274 313
20 तमिलनाडु 136 150 189
21 तेलंगाना 217 180 189
22 त्रिपुरा 10 0 14
23 उत्तर प्रदेश 211 228 194
24 उत्तराखंड 13 26 16
25 पश्चिम बंगाल 242 238 229
26 अन्य 2 0 0
कुल योग 2904 2964 3074

यह खबर पढ़ने के लिए धन्यवाद, आप हमसे हमारे टेलीग्राम चैनल पर भी जुड़ सकते हैं।

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English summary
Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana provides assistance to students in basic science through mentorship and scholarship. The main objective of this scheme is to attract motivated students in the field of science and technology to realize their potential and talent. This program was started in 1991. The objective is to attract motivated students in the field of science and technology to realize their potential and talents.
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