Sambhal Jama Masjid History in Hindi: संभल में बीते दिनों हिंसा की एक बड़ी घटना सामने आई। मौका था संभल में जामा मस्जिद के सर्वे का। इस सर्वे के दौरान भड़की हिंसा और दंगे जैसे माहौल में 4 आम नागरिकों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद लंबे समय से विवाद से घिरा हुआ है। दरअसल, मुगलकाल में बनाए गए इस मस्जिद पर कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया था, तब से स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच यह विवाद का विषय बना हुआ है।
दावा है कि संभल में अभी जिस स्थान पर जामा मस्जिद है, वहां मुगल शासनकाल से पहले हरिहर मंदिर था। क्या ये दावा सच है? यदि हां, तो फिर मस्जिद क्यों और किसने बनवाया? आखिर 16वीं शताब्दी में बनाए गए मोरादाबाद स्थित संबल की जामा मस्जिद को लेकर विवाद क्यों उत्पन्न हुआ? संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के आदेश क्यों दिए गए? इन तमाम सवालों से आज जामा मस्जिद घिरा हुआ है। हालांकि मस्जिद के इतिहास और निर्माण अब भी अस्पष्ट हैं। कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। आइए जानें विस्तार से क्या है संभल की जामा मस्जिद का इतिहास?

आने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, एसएससी, पीएससी, रेलवे समेत कई अन्य परीक्षाओं में इतिहास के विषय या फिर करंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहें उम्मीदवार हाल ही में सामने आए संभल की जामा मस्जिद के इतिहास से संबंधित विषय पर परीक्षा का बेहतर तैयारी के लिए इस लेख से सहायता ले सकते हैं। यहां संभल का इतिहास, संभल की जामा मस्जिद का इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। आइए सबसे पहले संक्षिप्त में जान लेते हैं क्या है संभल का इतिहास?
संभल का इतिहास
उत्तर प्रदेश में स्थित संभल एक ऐतिहासिक शहर है। संभल अपने ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। प्राचीन काल से लेकर मध्यकालीन युग तक इस शहर का इतिहास का विस्तार है। संभल शहर का उल्लेख प्राचीन काल के धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में भी है। मुग़ल साम्राज्य के दौरान इस शहर का विशेष महत्व था और यह एक समय पर मुग़ल साम्राज्य का एक प्रमुख केंद्र था। यहां से प्रशासनिक कार्य किए जाते थे। इतिहासकार कहते हैं मुग़ल सम्राट बाबर के शासनकाल में कई महत्वपूर्ण शहरों में से संभल का नाम कई चर्चाओं में सामने आया। बाबर ने अपने शासनकाल में यहां कई ऐतिहासिक स्थालों के निर्माण कार्य कराए थे। संभल जामा मस्जिद भी उन्हीं में से एक है।
क्या है संभल की जामा मस्जिद का इतिहास?
शहर के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है संभल जामा मस्जिद। यह अपनी ऐतिहासिकता और वास्तुकला के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह मस्जिद न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। संभल जामा मस्जिद का निर्माण मुग़ल शासकों द्वारा कराया गया था। उद्देश्य था इस क्षेत्र में इस्लामिक संस्कृति और धर्म का प्रसार करना। पहले मुगल शासक बाबर के शासनकाल में यानी कि 1526 से 1530 के बीच संभल जामा मस्जिद का निर्माण हुआ। इतिहासकारों का मानना है कि मुगल शासक बाबर के शासनकाल में तीन प्रमुख मस्जिदों का निर्माण हुआ, जिनमें से संभल जामा मस्जिद एक है। बाबर के शासनकाल में बनीं अन्य दो प्रमुख मस्जिदों में पानीपत की मस्जिद और अयोध्या की बाबरी मस्जिद (जो अब ध्वस्त हो चुकी) को बताया गया है।
उत्तर प्रदेश का संभल एक मुस्लिम आबादी वाला शहर है। शहर के बीचों-बीच बनीं जामा मस्जिद शहर की सबसे बड़ी और ऊंची इमारतों में से एक है। कई इतिहासकारों का कहना है कि सन् 1526 ईस्वी में दिसंबर में बाबर ने अपने खास सेनापति ने इस मस्जिद के निर्माण की जिम्मेदारी दी। मुगल शासनकाल के शुरुआत में बने इस मस्जिद का निर्माण मुख्य रूप से इस्लामी स्थापत्य कला के आधार पर किया गया। बाबर ने जब भारत पर आक्रमण किया और अपनी सत्ता की स्थापना की, तो उसने भारत के विभिन्न हिस्सों में इस्लामी स्थापत्य कला के नमूनों को स्थापित करने का प्रयास किया। संभल जामा मस्जिद इनमें से एक है।
मस्जिद की वास्तुकला और डिजाइन
संभल जामा मस्जिद की वास्तुकला मुग़ल काल की शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर से किया गया है, जो उस समय की मुग़ल इमारतों की एक विशिष्ट विशेषता थी। मस्जिद की दीवारों पर इस्लामिक शैली की बारीक नक्काशी की गई है। इसमें ज्यामितीय डिज़ाइन और कुरान की आयतों को उकेरा गया है। मस्जिद का गुंबद और मीनारें इसकी सबसे प्रमुख विशेषताएं हैं। मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के चारों ओर छोटी-छोटी मीनारें हैं, जो इसे भव्यता प्रदान करती हैं। इसके आंगन में एक बड़ा हौज भी है, जो वज़ू (अध्यात्मिक शुद्धि) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मस्जिद का मुख्य दरवाजा बड़े मेहराबों और खिड़कियों से बना है।
संभल जामा मस्जिद में सर्वे का आदेश क्यों दिया गया?
बाबर के शासनकाल के दौरान संभल की जामा मस्जिद बनाई गई थी। मस्जिद का निर्माण 1526 से 1530 ईस्वी के बीच हुआ। मस्जिद के भीतर फारसी शिलालेखों से मुगलकाल का विशिष्ट प्रमाण मिलता है। हालांकि देश के कई प्रसिद्ध इतिहासकारों का दावा है कि संभल जामा मस्जिद के निर्माण में पहले यहां हिंदूओं का हरिहर मंदिर था। शाही जामा मस्जिद के निर्माण को लेकर हिंदू पक्ष ने एक मजबूत दावा कोर्ट के सामने रखा है। इस दावे के अनुसार यह कहा गया कि हरिहर मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालांकि मुस्लिम पक्ष इस दावे को सिरे से खारिज करता है।
दरअसल, संभल के सिविल कोर्ट में बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने दावा करते हुए कहा कि संभल जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर के नाम से जाना जाता था। पहले मुगल शासक बाबर ने मंदिर को तोड़ दिया और यहां मस्जिद का निर्माण किया। इस दावे के बाद कोर्ट ने मस्जिद में सर्वे के आदेश दिए। 24 नवंबर को सर्वे के दौरान हिंसा का रूप ले लिया। बता दें कि इस मामले में हिंदू पक्ष के वकील ने अपनी याचिका में बाबरनामा सहित अन्य दो किताबों का उल्लेख किया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इन किताबों में हरिहर मंदिर होने की पुष्टि है। मामले की सुनवाई अभी चल रही है।
न्यूज 18 की एक लेख के अनुसार, वर्ष 1968 के मुरादाबाद गजेटियर में जामा मस्जिद या मंदिर होने के दावे का विशेष उल्लेख है। इसके मुताबिक हरिहर मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के द्वारा करवाया गया था। इसे बाद में मुग़ल शासकों द्वारा तोड़ दिया गया था। खबर के अनुसार, गजेटियर में लिखा गया है कि जामा मस्जिद का ढांचा हिंदू मंदिर की संरचना जैसा है।
हिंदूओं के लिए संभल क्यों महत्वपूर्ण है?
संभल का जिक्र हिंदू ग्रंथों में है। इसके अनुसार संभल भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार कल्कि का कथित जन्मस्थान है। हिंदू धर्म के शास्त्रों की मानें तो कलियुग के अंत के लिए कल्कि अवतार का जन्म संभल में होना तय है। मान्यता है कि भगवान विष्णु का कल्कि अवतार संभल में ही होगा। कल्कि अवतार कलयुग के अंत में होगा और धर्म की पुनः स्थापना करेगा। संभल में कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनका धार्मिक महत्व है। इन मंदिरों का संबंध विभिन्न देवी-देवताओं से है और यहां भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। कई धार्मिक ग्रंथों में संभल का वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों में संभल को एक पवित्र स्थान बताया गया है। इन सभी कारणों से हिंदूओं के लिए संभल महत्वपूर्ण स्थान है।


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