गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें, जो पूछी जा सकती हैं परीक्षा में

जब समाज में अत्याचार, अनाचार अशान्ति, अज्ञान, अंध विश्वास और रूढ़ियां जड़ जमा लेती हैं, तब कोई न कोई महापुरूष समाज में इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जन्म लेता है। महात्मा गौतम बुद्ध भी ऐसे ही काल में पैदा हुए थे जब समाज में अनेक प्रकार की कुरीतियों अपना दुष्प्रभाव दिखा रही थीं। उन्होंने अहिंसा, प्रेम, शांति और त्याग का संदेश देकर समाज से कुरीतियों को दूर करने का प्रयत्न किया था।

 

कौन थे गौतम बुद्ध?

गौतम बुद्ध एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने पूरे संसार को शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया था। जब पूरा भारत हिंसा और अशांति, अंधविश्वास के बेड़ियों में जकड़ा था। तब गौतम बुद्ध ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने लोगों को इन बेड़ियों से मुक्त किया।

गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

गौतम बुद्ध के सिद्धांत

गौतम बुद्ध की शिक्षा के चार मूल सिद्धांत हैं-

 

1. संसार दुखों का घर है,

2. दुख का कारण वासनाएं हैं,

3. वासनाओं को मारने से दुख दूर होते हैं और

4. वासनाओं को मारने के लिए अष्टमार्ग अपनाना चाहिए।

अष्टमार्ग के सूत्र---शुद्ध ज्ञान, शुद्ध संकल्प, शुद्ध वार्तालाप, शुद्ध कर्म, शुद्ध आचरण, शुद्ध प्रयत्‍‌न, शुद्ध समृति, शुद्ध समाधि।

गौतम बुद्ध के गुरु का क्या नाम था?

बुद्ध के प्रमुख गुरु के नाम- गुरु विश्वामित्र, अलारा कलम, उद्दाका रामापुत्त आदि।

महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ?

महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म 569 ई. पूर्व में कपिल वस्तु में हुआ था। गौतम बुद्ध का असली नाम राजकुमार सिद्धार्थ था। इनके पिता का नाम शुद्घादेन और माता का नाम माया था। इनका जन्म नेपाल में स्थित लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके जन्म के कुछ दिन बाद इनकी माता की मृत्यु हो गई थी। इसलिए इनका पालन पोषण इनकी सौतेली माँ प्रभावती ने किया। वे अपने पिता की इकलौती सन्तान थे। इसलिए इनके पिता उनसे बहुत प्यार करते थे।

गौतम बुद्ध जीवनी- बाल्य काल

महात्मा बुद्ध बचपन से ही अन्य बालकों से अलग थे। माना जाता है कि सभी बच्चे नटखट और चंचल होते हैं पर बुद्ध बचपन से ही शान्त और गंभीर स्वभाव के थे। वे बहुत कम बोलते थे। एकान्त में बैठना उन्हें अच्छा लगता था। वे सदा चिन्तन में लगे रहते थे।

गौतम बुद्ध की पत्नी और पुत्र का क्या नाम था?

महात्मा बुद्ध ज्यों ज्यों बड़े होने लगे, त्यों त्यों उनके स्वभाव में भी परिवर्तन आने लगा। सांसरिक सुखों में उन्हें कोई रूचि नहीं रही। हदय में वैराग्य भाव पैदा होने लगा। पुत्र के इस स्वभाव को देखकर महाराज शुद्घोदन को बहुत चिंता होती थी। उन्होंने पुत्र बुद्ध को प्रसन्न रखने के लिए अनेक तरह के उपाय किए। उसे सुख साधन दिए, पर महात्मा बुद्ध को कोई भी वस्तु आकर्षित नहीं कर सकी। अतः पिता ने उनका विवाह उन्हीं के मामा की बेटी यशधोरा के साथ कर दिया जो कि बेहद सुन्दर थी, जिन्हें वे प्यार से गोपा कहकर बुलाते थे। उनके पिता विचार था कि बुद्ध का विवाह कर देने से उनके स्वभाव में परिवर्तन आ जाएगा। कुछ समय बाद उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम राहुल रखा गया।

राजकुमार सिद्धार्थ ने गृह त्याग क्यों किया?

एक दिन राजकुमार सिद्धार्थ ने अपनी पिता से नगर में घुमने की इच्छा प्रकट की। जिसके बाद उन्हें नगर भ्रमण करने की इजाज़त मिल गई। राजा ने नगर के रक्षकों को संदेश दिया कि वे राजकुमार के सामने कोई भी ऐसा दृश्य न लायें जिससे उनके मन में संसार के प्रति वैराग्य भावना पैदा हो। सिद्धार्थ नगर में घूमने गए। उन्होंने नगर में बूढ़े को देखा उसे देखते ही उन्होंने सारथी से पूछा ये कौन है? इसकी ये दशा कैसे हुई ? सारथी ने कहा- ये एक बूढ़ा आदमी है। बुढ़ापे में सभी आदमियों की ऐसी हालत हो जाती है। फिर एक दिन सिद्धार्थ ने एक रोगी को देखा। रोगी को देखने के बाद उन्होंने अपने सारथी से उसके बारे में पूछा। जिसके बाद सारथी ने बताया कि यह रोगी है और रोग से मनुष्य की ऐसी हालत हो जाती है।

इन घटनाओं से सिद्धार्थ का वैराग्य भाव और बढ़ गया। सांसारिक सुखों से उनका मन हट गया। उन्होंने जीवन के रहस्य को जानने के लिए संसार को छोड़ने का निश्चय किया। जिसके बाद वे एक दिन रात को उठे तब यशधोरा सो रही थी। उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्र को बहुत समय तक देखा और उन्हें गहरी नींद में छोड़ चुपचाप घर से निकल कर चले गए।

बौद्ध धर्म की स्थापना कब और किसने की?

गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ ने वनों में घूम घूम कर तपस्या करनी आरम्भ कर दी। इससे उनका शरीर दुर्बल हो गया। अन्त में वे बिहार में स्थित गया नामक एक जिले में पहुंचे। वहां पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर उन्होंने कई दिन तक तपस्या की और उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इसके बाद वे सारनाथ आए। वहाँ उन्होंने पाँच साधुओं को उपदेश दिया और बौद्ध धर्म के संस्थापक बन गए।

ऐसा माना जाता है कि बौद्ध धर्म न तो वेद विरोधी है और न हिन्दू विरोधी। गौतम बुद्ध ने तो सिर्फ जातिवाद, कर्मकांड, पाखंड, हिंसा और अनाचरण का विरोधी किया था। गौतम बुद्ध के शिष्यों में कई ब्राह्मण थे। आज भी ऐसे लाखों ब्राह्मण हैं जो बौद्ध बने बगैर ही भगवान बुद्ध से अथाह प्रेम करते हैं और उनकी विचारधारा को मानते हैं।

गौतम बुद्ध की मृत्यु कब और कहां हुई?

महात्मा गौतम बुद्ध अपनी सारी उम्र बौद्ध धर्म का प्रचार करते रहे। 483 ई.पू 80 वर्ष की आयु में भारत के कुशीनगर में उन्होंने बुद्ध ने पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति ली और गहन ध्यान की स्थिति में उनका निधन हो गया। जिसके बाद से लाखों लोग उन्हें भगवान के समान पूजते हैं।

महात्मा गौतम बुद्ध का जीवन एक नजर में

· महात्मा गौतम बुद्ध का बचपन का नाम राजकुमार सिद्धार्थ था।

· राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म आज से लगभग तीन हजार साल पूर्व नेपाल में स्थित लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था।

· गौतम बुद्ध के पिता शुद्घोदन कपिलवस्तु के राजा थे।

· महात्मा गौतम बुद्ध के माता का नाम महारानी महामाया था, जिनकी मृत्यु पुत्र जन्म के 7 दिन बाद हो गई थी।

· जब ज्योतिषीयो ने गौतम बुद्ध की जन्मपत्रिका देखी, तो उन्होंने भविष्यवाणी की कि ये बालक बड़ा होकर चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या फिर एक महान संत बनेगा।

· महात्मा गौतम बुद्ध बचपन से ही गंभीर स्वभाव के थे और बड़े होने के बावजूद भी उनका यह स्वभाव नहीं बदल पाया था।

· महात्मा गौतम बुद्ध का विवाह उनके पिता ने उनके मामा की लड़की यशोधरा से करा दिया था।

· महात्मा गौतम बुद्ध और यशोधरा के पुत्र का नाम राहुल था।

· गौतम बुद्ध, जिनका मन कभी भी गृहस्थी में नहीं लगा वे एक दिन रात के समय वह बिना किसी को बताए अपना घर छोड़कर वन में चले गए।

· वन में जाने के बाद सिद्धार्थ ने तपस्या करनी शुरू की और एक दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई जिसके बाद से उन्हें महात्मा गौतम बुद्ध कहा जाने लगा।

बुद्ध पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती है?

बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती के रूप में भी जाना जाता है, 563 ईसा पूर्व लुंबिनी, नेपाल में पूर्णिमा के दिन राजकुमार सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ था। जिन्हें बाद में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के रूप में जाना जाने लगा जब कि हिंदू धर्म में, बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा को आमतौर पर हिंदू/बौद्ध चंद्र कैलेंडर में 'वैसाखी' के महीने में मनाया जाता है। इस साल बुद्ध पूर्णिमा 16 मई 2022 को मनाई जा रही है। हालांकि, इस दिन की तिथि एशियाई चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित होती है, जिस वजह है हर साल इस दिन की तारीखें बदलती रहती हैं।

बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें

• बुद्ध पूर्णिमा विश्व के लगभग सभी देशों में कंबोडिया, जापान, चीन, इंडोनेशिया, कोरिया, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और संयुक्त राज्य अमेरिका में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है।

• उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी के पास सारनाथ एक छोटा सा गांव है जो कि भारत के चार प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह स्थान इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि गौतम बुद्ध ने पहली बार यहीं धर्म की शिक्षा के साथ अपना पहला उपदेश दिया था। बुद्ध जयंति को, सारनाथ में एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है और एक जुलूस में बुद्ध के अवशेषों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए ले जाया जाता है।

• बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध को हिंदु धर्म में भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। जो कि ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वर की पवित्र त्रिमूर्ति का एक हिस्सा हैं।

• बुद्ध पूर्णिमा के दिन लोग आमतौर पर सफेद कपड़े पहनते हैं और खीर बांटते हैं (जैसा कि किंवदंती है कि सुजाता नाम की एक महिला ने इस दिन गौतम बुद्ध को दूध दलिया का कटोरा चढ़ाया था) भक्त इस दिन बुद्ध मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपना सम्मान प्रकट करते हैं।

गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथि

• 563 ई.पू.- बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम के रूप में हुआ था।

• 528 ई.पू.- बुद्ध ने बिहार के बोधगया नामक गांव में एक पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था।

• 483 ई.पू.- बुद्ध ने पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति ली और गहन ध्यान की स्थिति में उनका निधन हो गया।

• 329 ई.पू.- सम्राट अशोक ने गौतम बुद्ध के जन्म स्थान लुंबिनी में एक स्तंभ बनवाकर उस पर हिदा भगवाम् जतेती लिखवाया था जिसका अर्थ है कि भगवान बुद्ध का जन्म यहीं हुआ था।

बता दें, बौद्ध धर्म के संरक्षक सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल के दौरान बौद्ध धर्म को पूरे एशिया में फैलाने का काम किया था।

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English summary
On the occasion of Buddha Purnima, read all about Gautam Buddha in Hindi.
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