World Heritage Day 2023: प्रतिवर्ष विश्व विरासत दिवस 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिवस को सर्वप्रथम 1983 में मनाया गया था। विश्व विरासत दिवस का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक इमारतों, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों जैसी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

हर साल विश्व विरासत दिवस एक नई थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल विश्व विरासत दिवस 2023 की थीम है "विरासत परिवर्तन"। वर्ष 2022 में इस दिवस की थीम थी "विरासत और जलवायु"। इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत की समझ और प्रशंसा को बढ़ावा देना है और इन साइटों पर जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और मानव गतिविधियों जैसे खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
बात करें भारत की तो भारत में ही कुल 40 विश्व धरोहर है जिन्हें यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है। वहीं विश्व स्तर पर चर्चा करें तो विश्व स्तर पर 167 देशों में कुल 1,157 विश्व धरोहर स्थल है। विश्व धरोहर को तीन तरह से बांटा जाता है, जिसमें सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित संपत्तियां शामिल है। आइए आपको विश्व विरासत दिवस के बारे में विस्तार से बताएं।
विश्व विरासत दिवस का इतिहास
विश्व विरासत दिवस को हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिवस का विचार वर्ष 1982 में अंतरराष्ट्रीय परिषद - ICOMOS द्वारा दिया गया था, जिस पर विचार करते हुए 1993 में हुए 22 वें आम सम्मेलन के दौरान यूनेस्को द्वारा इसे अनुमोदित किया गया।
अब सवाल ये उठता है कि इस दिवस को मनाने के लिए क्यों 18 अप्रैल की तिथि को चुना गया? तो आपको बता दें कि 18 अप्रैल को ICOMOS की स्थापना की गई थी। विश्व विरासत दिवस का विचार आईसीओएमओएस द्वारा दिया गया था, यही कारण रहा कि इस दिवस को मनाने के लिए आईसीओएमओएस के स्थापना दिवस की तिथि का चयन किया गया।
हर साल इस दिवस को एक नई थीम के साथ मनाया जाता है, जो मुख्य तौर पर सांस्कृतिक विरासत से संबंधित एक विशिष्ट विषय पर तय की जाती है। इस दिन को यूनेस्को और आईसीओएमओएस के साथ-साथ दुनिया भर के कई स्थानीय समुदायों और संगठनों द्वारा कार्यक्रमों और गतिविधियों के आयोजन के साथ चिह्नित किया जाता है।
विश्व विरासत दिवस का महत्व
प्रत्येक वर्ष इस दिवस के माध्यम से लोगों में सांस्कृतिक विरासत के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और भविष्य की पीढ़ियों के आनंद लेने के लिए ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों के संरक्षण में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
समय के साथ आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के साथ कई अन्य कारणों से दुनिया भर की कई स्मारकों और स्थलों को हानि हो रही है, उनके संरक्षण की दिशा में कार्य करना और उनकी महत्व को समझना ही इस दिवस का उद्देश्य है। विश्व में स्थित सभी स्थल और स्मारक हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं और इतिहास की पहचान को आकार देते हैं।
विश्व विरासत दिवस थीम 2023
जैसा की हमने आपको बताया कि हर साल इस दिवस को एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल विश्व विरासत दिवस 2023 की थीम के लिए "विरासत परिवर्तन" के विषय को चुना गया है। आईसीओएमओएस (ICOMOS) के अनुसार "विरासत परिवर्तन" का ये विषय जलवायु कार्रवाई के संबंध में जानने और पारंपरिक तरीकों और ज्ञान प्रणालियों के बारे में सीखने के लिए तय किया गया है।
भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
विश्व में सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थल वाले देशों में भारत का नाम भी शामिल है। भारत में कुल 40 विश्व धरोहर है, जिसमें से 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित धरोहर है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। बता दें कि भारत में अस्थाई 52 स्थल भी जिसकी जानकारी आपको नीचे दिए लिंक में प्राप्त होगी।
किन देशों में है सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थल
विश्व के 167 देशों में कुल मिलाकर कर 1,157 विश्व धरोहर स्थल है। लेकिन कुछ देस ऐसे हैं जिनमें किसी भी अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थल है। जिसमें से 900 सांस्कृतिक, 218 प्राकृतिक और 39 मिश्रित संपत्तियां है। जिसकी जानकारी इस प्रकार है...
- इटली - 58
- चीन - 56
- जर्मनी - 51
- फ्रांस - 49
- स्पेन - 49
- भारत - 40
- मैक्सिको - 35
- यूनाइटेड किंगडम - 33
- रूस - 30
इन विश्व धरोहर को कई मानदंडों के अनुसार चुना जाता है। 10 मानदंडों के एक सेट के अनुसार जो इन्हें पार करने में कामयाब होता है उसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जाता है। इन मानदंडों के आधार पर किन स्थलों या स्मारक को विश्व धरोहर चुना जाता है इसकी जानकारी के लिए यहां क्लिक करें - World Heritage Site 2023


Click it and Unblock the Notifications











