पुण्यतिथि: 13 वर्ष में बना लिए त्रिकोणमिति में नये फार्मूले, जानिए कैसा था श्रीनिवास रामानुजन अयंगार का जीवन

Death Anniversary: भारत की जमीन पर कई महान लोगों ने जन्म लिया और इसी देश के लिए कई उपलब्धियां भी हासिल की। बात यदि भारतीय गणित के इतिहास की करें तो इसमें कई महान व्यक्तियों के नाम मिलेंगे। इनमें से यदि किसी एक व्यक्ति का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाए, तो वह हैं, श्रीनिवास रामानुजन अयंगार

जानिए कैसा था श्रीनिवास रामानुजन अयंगार का जीवन

भारतीय गणित के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा सर्वश्रेष्ठ और अद्वितीय थी। उन्होंने सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने ऐसे सिद्धांत और सूत्र विकसित किए, जो आज भी गणितज्ञों के लिए शोध का विषय हैं। आज हम श्रीनिवास रामानुजन अयंगार की पुण्यतिथि मना रहे हैं। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम जानेंगे उनके जीवन के कुछ अनसुने पहलुओं के बारे में। साथ ही हम श्रीनिवास रामानुजन अयंगार के कार्य और उपलब्धियों के बारे में जानेंगे।

कौन हैं श्रीनिवास रामानुजन अयंगार?

श्रीनिवास रामानुजन अयंगार भारत के महान गणितज्ञ थें। उनका जन्म 22 दिसंबर 1887 को आज के तमिलनाडु के इरोड जिले में हुआ। भारत के तमिलनाडु में जन्मे रामानुजन का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा हुआ था। लेकिन उनकी अद्भुत प्रतिभा के कारण उन्होंने कई उपलब्धियां अपने नाम की।

श्रीनिवास रामानुजन अयंगार का जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम कुप्पुस्वामी रामानुजन अयंगार था, और माता का नाम कमलताम्मल था। रामानुजन के पिता मूल रूप से तंजावुर के निवासी थें और एक स्थानीय साड़ी की शॉप में एक क्लर्क की नौकरी करते रहना चाहिए।

बता दें कि उनका प्रारंभिक जीवन आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं से घिरा रहा, फिर भी गणित के प्रति उनकी रुचि कभी कम नहीं हुई। बचपन से ही वे गणित में असाधारण रुचि रखते थे और जटिल गणनाओं को अपने तरीके से हल कर लेते थे।

श्रीनिवास रामानुजन अयंगार कितने पढ़े-लिखे हैं?

रामानुजन का औपचारिक शिक्षण सीमित रहा। उन्होंने कॉलेज में डिग्री की पढ़ाई पूरी नहीं की, क्योंकि उनका ध्यान मुख्यतः गणित में ही रहता था और अन्य विषयों में रुचि नहीं थी। इसके बावजूद उनकी गणितीय सोच ने उन्हें विश्व प्रसिद्धि दिलाई। उनकी प्रतिभा को पहचानने वाले अंग्रेज गणितज्ञ जी. एच. हार्डी ने उन्हें इंग्लैंड बुलाया, जहाँ रामानुजन ने केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में शोध कार्य किए।

आज रामानुजन का जीवन हर भारतीय युवा के लिए एक प्रेरणास्वरूप है। भारतीय युवाओं को यह सीखना चाहिए कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि आत्मविश्वास, लगन और अदम्य जिज्ञासा हो, तो असंभव भी संभव बनाया जा सकता है। उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में जानेंगे। साथ ही आइए उनके कार्यों और उपलब्धियों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

13 वर्ष की उम्र में विकसित किए त्रिकोणमिति में नये फार्मूले

रामानुजन ने प्रारंभिक शिक्षा कुंभकोणम के सरकारी हाई स्कूल से प्राप्त की। गणित में उनकी प्रतिभा इतनी अद्भुत थी कि मात्र 13 वर्ष की उम्र में वे त्रिकोणमिति में नये फार्मूले खुद विकसित करने लगे थे। हालांकि गणित में उनकी गहरी रुचि के चलते अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित हुई और वे कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने पर मजबूर हो गए।

रामानुजन का गणित के प्रति जुनून

रामानुजन ने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के जटिल गणितीय अवधारणाएं विकसित कीं। उन्होंने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियां, एलिप्टिक फलन और घात श्रेणी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी नोटबुक्स में हजारों फॉर्मूले थे, जिनमें से कई बाद में गणितज्ञों द्वारा सिद्ध किए गए।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एंट्री के साथ मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान

सन् 1913 में रामानुजन ने इंग्लैंड के प्रसिद्ध गणितज्ञ जी एच हार्डी को अपने गणितीय सिद्धांतों का एक पत्र भेजा। हार्डी उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें केम्ब्रिज विश्वविद्यालय आमंत्रित किया। यहां रामानुजन ने कई महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रकाशित किए। उन्हें 1918 में 'रॉयल सोसाइटी' का सदस्य चुना गया, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि थी, विशेष रूप से एक भारतीय के लिए।

कम उम्र में जब हुईं स्वास्थ्य समस्याएं

इंग्लैंड के ठंडे मौसम और खानपान में कठिनाई के चलते रामानुजन का स्वास्थ्य धीरे-धीरे खराब होने लगा। 1919 में वे भारत लौटे, लेकिन लंबी बीमारी के बाद 26 अप्रैल 1920 को महज 32 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। इतनी कम आयु में भी उन्होंने गणित की दुनिया को अमूल्य विरासत सौंपी।

रामानुजन के कार्य आज भी गणितीय शोध के महत्वपूर्ण आधार हैं। उनके जीवन पर आधारित कई किताबें और फिल्में भी बन चुकी हैं, जैसे "द मैन हू न्यू इनफिनिटी" (The Man Who Knew Infinity)। भारत सरकार ने 22 दिसंबर को 'राष्ट्रीय गणित दिवस' घोषित कर उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाया है। उनकी रचनाएं, विशेष रूप से रामानुजन नोटबुक्स, आज भी लाखों गणितज्ञों को नये अनुसंधान के लिए प्रेरित करती हैं।

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English summary
Know the life story of Srinivasa Ramanujan Iyengar on his death anniversary. Read in detail about the life, contribution and struggle of this great genius of mathematics in Hindi.
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