आए दिन सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर लोग धर्मानुसार आबादी से जुड़े सवाल पूछते रहते हैं कि भारत में कितने मुस्लिम हैं? भारत में प्रतिदिन कितने मुस्लिम बच्चे पैदा होते हैं? दरअसल, भारत में साल 2021 में जनगणना न होने के कारण सरकार आबादी से जुड़े इन सवालों के पूर्ण रूप से सही जवाब नहीं देती है।
लेकिन हाल ही में जब 20 जुलाई 2023 को लोक सभा के दौरान माला रॉय ने अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी से प्रश्न किए कि
(ए) क्या देश में 30.05.2023 तक मुस्लिम आबादी पर कोई डेटा है और यदि हां, तो उसका विवरण;
(बी) क्या सरकार के पास पसमांदा मुसलमानों की जनसंख्या का कोई डेटा है और यदि हां, तो उसका विवरण; और
(सी) 31.05.2023 तक देश में पसमांदा मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विवरण क्या है?

जिसके जवाब में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने 2011 की जनगणना के अनुसार आंकड़े पेश करते हुए बताया कि भारत में साल 2011 में कुल मुस्लिम आबादी 17.22 करोड़ थी जो देश की कुल आबादी का 14.2% हिस्सा थी।
वहीं राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में देश की अनुमानित जनसंख्या 138.82 करोड़ है। जिसका 14.2% अनुपात को लागू करते है तो जैसा कि 2011 की जनगणना में था, 2023 में मुसलमानों की अनुमानित जनसंख्या 19.75 करोड़ है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आयोजित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2021-22 के अनुसार, 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के मुसलमानों की साक्षरता दर 77.7% है और सामान्य स्थिति के अनुसार सभी उम्र के लिए श्रम बल भागीदारी दर 35.1% है।
इसके अलावा, चयनित सतत विकास लक्ष्य संकेतकों पर डेटा एकत्र करने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आयोजित एकाधिक संकेतक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार, अच्छा पानी पीने वाले मुस्लिम व्यक्तियों का प्रतिशत 94.9% है और जिन मुस्लिम व्यक्तियों के पास बेहतर शौचालय है उनका प्रतिशत 97.2% है।
जिन मुसलमानों ने नया मकान खरीदा व बनाया है उनका मुस्लिम परिवारों का प्रतिशत 31 मार्च 2014 के बाद पहली बार मकान/फ्लैट 50.2% पर है।
भारत में कौन सा धर्म तेजी से बढ़ रहा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में मुस्लिम धर्म तेजी से बढ़ रहा है। सरकार जहां 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का 14.2% मुस्लिम आबादी के आंकड़े पेश कर रही है, वहीं जमिनी हकिक्त कुछ और ही है।
सरकार द्वारा पेश किए गए मुस्लिम आबादी के आंकड़ों की रिपोर्ट


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