Ustad Zakir Hussain:किन पुरस्कारों से सम्मानित हुए उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, यहां देखें जाकिर के पुरस्कारों की सूची

Ustad Zakir Hussain Awards and Honours List: शास्त्रीय संदीत में तबला वादक के रूप में दुनिया भर में भारत का नाम रौशन करने वाले ग्रेट माएस्ट्रो उस्ताद जाकिर हुसैन ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। हृदय रोग संबंधी एक गंभीर बीमारी से पीड़ित जाकिर हुसैन ने यूएसए स्थित सैन फ्रांसिस्कों में अंतिम सांस ली। उस्ताद जाकिर के निधन की खबर उनके परिवार ने मीडिया को दी।

तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाकिर हुसैन एक गंभीर बीमारी, इडियोपैथिक प्लोमनरी फ्राइब्रोसिस से जूझ रहे थे। उनका इलाज कैलिफोर्निया स्थित एक प्रसिद्ध अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ी और उनका निधन हो गया। इस खबर से दुनिया भर के संगीत जगत समेत बॉलीवुड में निराशा छा गई है।

किन पुरस्कारों से सम्मानित हुए उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, यहां देखें जाकिर के पुरस्कारों की सूची

आइए संक्षेप में जान लेते हैं, कौन हैं उस्ताद जाकिर हुसैन, कैसा रहा उनका जीवन और उन्हें संगीत के क्षेत्र में कौन कौन से पुरस्कार और सम्मानों से सम्मानित किया गया। इस लेख में हम उनके जीवन, करियर और पुरस्कारों के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

कौन थें उस्ताद जाकिर हुसैन?

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन भारतीय शास्त्रीय संगीत में तबला वादन के एक प्रमुख स्तंभ रहें। वे विश्व भर में तबला वादन की कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी उंगलियों की जादुई कला और संगीत की गहरी समझ ने उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों में शामिल किया है। ज़ाकिर हुसैन का संगीत यात्रा न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशंसा प्राप्त कर चुकी है।

जाकिर हुसैन का प्रारंभिक जीवन और परिवार

संगीत जगत के दिग्गज ज़ाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। वे एक संगीत परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता, उस्ताद अल्लारक्खा खान, खुद एक महान तबला वादक थे। अपने पिता से ज़ाकिर ने संगीत के पहले पाठ सीखा। उनके घर का वातावरण संगीत से भरा हुआ था और बचपन से ही ज़ाकिर हुसैन ने संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। उनका परिवार हमेशा से ही संगीत को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानता था, जिसे उन्होंने बड़े गर्व के साथ अपनाया।

जाकिर हुसैन की शिक्षा और संगीत प्रशिक्षण कैसा रहा?

ज़ाकिर हुसैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा माहिम स्थित सेंट माइकल हाई स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद ज़ाकिर हुसैन की औपचारिक शिक्षा मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से हुई, लेकिन उनकी असली शिक्षा तबला वादन में थी, जो उन्हें अपने पिता उस्ताद अल्लारक्खा से प्राप्त हुई। वे बहुत छोटी उम्र से ही तबला वादन में निपुण हो गए थे। उनके पिता ने उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ दी, जिसमें ताल की बारीकियों और विभिन्न रागों का ज्ञान शामिल था। ज़ाकिर हुसैन ने अपनी कला को निखारने के लिए कड़ी मेहनत की और अपने पिता के सानिध्य में संगीत की दुनिया में कदम रखा।

संगीत करियर की शुरुआत कैसे हुई?

ज़ाकिर हुसैन का संगीत करियर बहुत छोटी उम्र में ही शुरू हो गया था। उन्होंने 12 साल की उम्र में सार्वजनिक रूप से पहली बार तबला बजाना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे शास्त्रीय संगीत के मंचों पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। उनका तबला वादन न केवल शास्त्रीय संगीत तक सीमित था, बल्कि उन्होंने पॉप, जैज़ और फ्यूज़न संगीत में भी अपने हाथ आजमाए। उन्होंने कई विश्वविख्यात संगीतकारों के साथ प्रदर्शन किया और भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया।

1960 के दशक के अंत में ज़ाकिर हुसैन ने भारत के प्रमुख संगीतकारों के साथ काम करना शुरू किया। उन्होंने रवि शंकर, अली अकबर खान और शिवकुमार शर्मा जैसे संगीत की दुनिया के बड़े प्रसिद्ध कलाकारों के साथ एक मंच शेयर किया। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारतीय संगीत का प्रतिनिधित्व किया और पाश्चात्य संगीतकारों के साथ काम कर भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

उस्ताद जाकिर हुसैन को मिले सम्मान और पुरस्कारों की सूची

ज़ाकिर हुसैन को उनकी संगीत साधना और विश्व संगीत में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया है। यहां उनके कुछ प्रमुख पुरस्कार और सम्मान की सूची दी गई है:

पद्म श्री (1988): भारतीय सरकार द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके संगीत में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया।

इंडो-अमेरिकन अवार्ड (1990): उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में उनके उत्कृष्ट सांस्कृतिक योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1990): भारत के राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए गए। वे संगीत नाटक अकादमी, भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी द्वारा दिए गए इस सम्मान को प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के संगीतकारों में से एक बन गए।

सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम के लिए पहली बार ग्रैमी (1992): हुसैन और मिकी हार्ट द्वारा सह-निर्मित और निर्मित एल्बम प्लैनेट ड्रम को सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम के लिए पहली बार ग्रैमी,सर्वश्रेष्ठ विश्व बीट एल्बम के लिए डाउनबीट क्रिटिक्स पोल और विश्व संगीत रिकॉर्डिंग के लिए एनएआरएम इंडी बेस्ट सेलर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नेशनल हेरिटेज फ़ेलोशिप (1999): नेशनल एंडॉमेंट फॉर द आर्ट्स से नेशनल हेरिटेज फ़ेलोशिप के पहले प्राप्तकर्ता बनें।

पद्म भूषण (2002): भारतीय संगीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

पद्म विभूषण (2023): भारतीय संगीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें भारत के उच्च नागरिक सम्मान पुरस्कार पद्म विभूषण मिला।

ओल्ड डोमिनियन फेलो (2005): जाकिर हुसैन को प्रिंसटन विश्वविद्यालय में मानविकी परिषद द्वारा ओल्ड डोमिनियन फेलो नामित किया गया।

कालिदास सम्मान (2006): मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया यह सम्मान भारतीय कला और संस्कृति में उनकी अद्वितीय भूमिका के लिए दिया गया।

सर्वश्रेष्ठ विश्व बीट ड्रमर (2007): मॉडर्न ड्रमर और ड्रम! पत्रिकाओं के पाठकों के सर्वेक्षणों में हुसैन को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत और सर्वश्रेष्ठ विश्व बीट ड्रमर का खिताब दिया गया।

ग्रैमी पुरस्कार (2009): उन्हें "द ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट" के लिए फिर से ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इंडियन म्यूज़िक अवार्ड्स (2011): उन्हें भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह पुरस्कार मिला।

कोणार्क नृत्य एवं संगीत महोत्सव लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2012): 23 फरवरी 2012 को कोणार्क नाट्य मंडप द्वारा आयोजित कोणार्क नृत्य एवं संगीत महोत्सव में गुरु गंगाधर प्रधान लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

यूएसए के राष्ट्रपति के कला पदक (2016): उन्हें राष्ट्रपति के कला पदक के लिए नामांकित किया गया था, हालाँकि, नए नियम के अनुसार गैर-अमेरिकी पदक प्राप्त नहीं कर सकते।

टाइम्स ऑफ इंडिया लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2016): भारतीय संगीत में उनके संपूर्ण योगदान के लिए उन्हें यह विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2017): 18 जनवरी 2017 को, सैन फ्रांसिस्को जैज़ सेंटर ने हुसैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया।

संगीत नाटक अकादमी (2019): संगीत नाटक अकादमी, भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी ने हुसैन को वर्ष 2018 के लिए अकादमी फेलो पुरस्कार, जिसे अकादमी रत्न के रूप में भी जाना जाता है, से सम्मानित किया।

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English summary
Discover the life and career of Ustad Zakir Hussain, the world-renowned tabla maestro. Explore the list of prestigious awards Zakir Hussain has received for his contributions to Indian classical music.
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