Jallianwala Bagh Massacre: जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण लिखना है तो यहां देखें, प्रस्तुत है 3 प्रारूप

Jallianwala Bagh Speech in Hindi: जलियांवाला बाग हत्याकांड। इतिहास के पन्नों में दर्ज वो भयानक दिन, जिसे आज तक कोई भारतीय भूला नहीं पाया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जलियांवाला बाग हत्याकांड के दिन को काला दिवस यानी ब्लैक डे माना जाता है।

100, 200, 300 शब्दों में कैसे तैयार करें जलियांवाला बाग पर भाषण

जलियांवाला बाग हत्याकांड, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक अत्यंत दुखद और क्रूर अध्याय है। यह दिन कोई इसलिए नहीं भूल सकता क्योंकि यह त्योहार का दिन था, और लोग त्योहार के रंग में रंग कर खुशियां मना रहे थे। जी हां, यह घटना 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पावन दिन की है। यह वह काला दिन है जब पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में नरसंहार की ये जघन्न घटना घटी थी।

जलियांवाला बाग हत्याकांड क्यों हुआ?

जलियांवाला बाग हत्याकांड में हजारों भारतीय पुरुष, महिलाओं और बच्चों ने अपनी जान गवां दी। बैसाखी के त्योहार के दिन जलियांवाला बाग में हजारों की संख्या में सिख समुदाय के लोग एक शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे। उल्लेखनीय है कि इस शांतिपूर्ण सभा के दौरान लोग वहां ब्रिटिश सरकार के काले कानून "रॉलेट एक्ट" का विरोध कर रहे थे।

लेकिन ब्रिटिश जनरल रिजिनाल्ड डायर ने इस सभा को विद्रोह मानते हुए बगैर किसी चेतावनी के निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवा दीं। बाग के चारों ओर ऊंची दीवारें थीं और एक ही संकरा रास्ता बाहर निकलने के लिए था। ऐसे में लोग भाग नहीं पाए। सैकड़ों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और हजारों घायल हुए। इस हत्याकांड ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया। हालांकि इस दुखद घटना के बाद ही लोगों की चेतना जगी और आज़ादी की लड़ाई को एक नई दिशा मिली। महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं ने इस घटना की तीव्र निंदा की।

जलियांवाला बाग पर भाषण | Jallianwala Bagh Speech in Hindi

स्कूल के बच्चों के लिए इस ऐतिहासिक घटना को समझना अत्यंत आवश्यक है ताकि वे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को जान सकें और उनमें देशभक्ति की भावना जागृत हो। आज के लेख में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण के तीन अलग-अलग प्रारूप प्रस्तुत किए जा रहे हैं। जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण 100, 200 और 300 शब्दों में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। यह विचार भाषण प्रतियोगिता, स्कूल सभाओं या प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी हो सकते हैं। जलियांवाला बाग हत्याकांड पर किसी भी गतिविधि की तैयारी के पूर्व इस लेख को अवश्य पढ़ लें।

100 शब्दों में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण

नमस्ते सभी को।

आज मैं सौमिक जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए यहां आप सभी के समक्ष उपस्थित हुआ हूं। जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुई थी। बैशाखी के त्योहार के दिन हजारों की संख्या में लोग शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे। लेकिन अंग्रेजी शासन के जनरल डायर ने हजारों लोगों की भीड़ पर गोलियां चलवा दीं। जलियांवाला बाग हत्याकांड के इस घटना से सैकड़ों की संख्या में लोग मारे गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने हेतू एक टर्निंग प्वाइंग बनी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सभी को एकजुट किया। हमें इस घटना को कभी नहीं भूलना चाहिए और उन शहीदों का सम्मान करना चाहिए।

धन्यवाद!

200 शब्दों में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण

सुप्रभात आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकों और मेरे सभी साथियों को

आज मैं जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अपने विचार साझा करने के लिए आप सभी के सामने खड़ा हूं। इतिहास के पन्नों में 13 अप्रैल 1919 को भारतीय स्वतंत्रता के लिए एक काला दिन के रूप में याद किया जाता है। दरअसल, इस दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों लोग एक शांतिपूर्ण विरोध के लिए इकट्ठा हुए थे। वे अंग्रेजों के रॉलेट एक्ट का विरोध कर रहे थे। लेकिन ब्रीटिश अंग्रेजी अधिकारी जनरल डायर ने बिना चेतावनी के गोलियां चलवा दीं। चारों ओर दीवारें होने के कारण लोग भाग नहीं सके और सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए।

यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक नया मोड़ लेकर आई। रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार से प्राप्त अपनी नाइटहुड की उपाधि वापस कर दी। महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया। यह घटना हमें बहुत कुछ सीख देती है कि आज़ादी कितनी बड़ी कुर्बानियों से मिली है। जलियांवाला बाग हत्याकांड के आज के दिन हमें इन शहीदों को याद रखना चाहिए और देश की एकता और अखंडता के लिए काम करना चाहिए।

धन्यवाद!

300 शब्दों में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर भाषण

नमस्कार सभी को

मैं आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में आप सबके सामने अपने विचार प्रस्तुत करना चाहता हूं। जलियांवाला बाद हत्याकांड भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है और इस दिन को काला दिन भी कहा जाता है। जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को हुआ था। उस दिन बैसाखी का त्योहार था और अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों लोग एकत्रित हुए थे। वे शांतिपूर्वक अंग्रेजों द्वारा लागू किए गए काले कानून 'रॉलेट एक्ट' का विरोध कर रहे थे।

ब्रिटिश जनरल डायर को इस सभा से आपत्ति थी। उसने बिना किसी चेतावनी के गोली चलाने का आदेश दिया। बाग के चारों तरफ ऊंची दीवारें थीं और एक ही छोटा रास्ता बाहर जाने का था। लोग न भाग सके, न बच सके। हजारों गोलियां चलीं और सैकड़ों लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे भारतवासियों के दिलों को दहला दिया। देश भर में शोक और आक्रोश फैलने लगा। इस घटना का विरोध राजनीतिक क्षेत्र से लेकर साहित्य के क्षेत्र तक होने लगा। एक ओर महात्मा गांधी ने इस घटना के विरोध में असहयोग आंदोलन शुरू किया। तो वहीं दूसरी ओर साहित्य जगत के महान रचनाकार रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्व्रारा उन्हें दिया गया सम्मान 'नाइटहुड' लौटा दिया।

जलियांवाला बाग हत्याकांड को 100 वर्षों से अधिक का समय बीत चुका है। आज के समय में जलियांवाला बाग एक स्मारक बन चुका है। यह स्मारक हमें हर दिन यह याद दिलाता है कि आजादी यूं ही नहीं मिली। हमें उन शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें देशभक्ति और एकता की भावना को बनाए रखना चाहिए। जय हिंद!

धन्यवाद!

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English summary
Speech on Jallianwala Bagh Massacre for school children in 100, 200 and 300 words. Know how this incident influenced the Indian freedom struggle. Simple and impressive speech in Hindi.
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