रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी (Rabindranath Tagore Biography)

By Careerindia Hindi Desk

Rabindranath Tagore Biography In Hindi: रबींद्रनाथ टैगोर जयंती 2024 में 7 मई और 9 मई दोनों ही दिन को मनाई जाएगी। रबींद्रनाथ टैगोर का जन्म पश्चिम बंगाल कलकत्ता शहर में 7 मई 1861 को और बंगाली कैलेंडर के अनुसार 25 वैखाख को हुआ। रबींद्रनाथ टैगोर के पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी था। पांच भाई-बहनों में रबींद्रनाथ टैगोर सबसे छोटे थे।

रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी (Rabindranath Tagore Biography in hindi)

रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्मदिन त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में मनाया जाने वाला एक क्षेत्रीय भारतीय अवकाश है। अपने जीवनकाल में, टैगोर ने अपना जन्मदिन पोचिशे बैसाख - बैसाख के 25वें दिन, बंगाली कैलेंडर के पहले महीने पर मनाया। पश्चिमी कैलेंडर पर संबंधित तारीख या तो 7 मई, 8 मई या 9 मई है। सन् 1861 में, पोचिशे बैसाख 7 मई पर पड़ा था, यही कारण है कि पश्चिम बंगाल में 7 मई को विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन अवकाश होता है। जबकि त्रिपुरा इस विशिष्ट दिन को बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

साहित्य, संगीत और देश की आजादी में रबींद्रनाथ टैगोर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टैगोर के अविस्मरणीय योगदान के लिए हर साल 7, 8 या 9 मई को रबींद्रनाथ टैगोर के जन्मदिन को रबींद्रनाथ टैगोर जयंती के रूप में मनाया जाता है। रबींद्रनाथ टैगोर जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री समेत सब उन्हें याद करते है। रबींद्रनाथ टैगोर की जीवनी, शिक्षा, पुरस्कार और उपलब्धियों समेत पूरी जानकारी नीचे देखें।

रबींद्रनाथ टैगोर जयंती कब क्यों मनाई जाती है?

रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती 7 मई को ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मनाई जाती है, लेकिन बंगाली कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म बैसाख महीने के 25वें दिन हुआ था। इसलिए पश्चिम बंगाल में, बंगाली कैलेंडर के अनुसार उनका जन्मदिन 8 मई या 9 मई को मनाया जाता है। रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती को पोचिष बोइशाख के नाम से भी जाना जाता है। वह कोलकाता (कलकत्ता) में एक अमीर ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे और अपने परिवार में सबसे छोटे भाई थे।

रबींद्रनाथ टैगोर जीवनी विवरण
जन्म 7 मई 1861
जन्म स्थान कलकत्ता, ब्रिटिश भारत
उपनाम भानु सिंहा ठाकुर (भोनिता)
पिता देवेंद्रनाथ टैगोर
माता शारदा देवी
पत्नी मृणालिनी देवी
बच्चे रेणुका टैगोर, शमिंद्रनाथ टैगोर, मीरा टैगोर, रथिंद्रनाथ टैगोर और मधुरनाथ किशोर
निधन 7 अगस्त 1941
मृत्यु का स्थान कलकत्ता, ब्रिटिश भारत
पेशा लेखक, गीत संगीतकार, नाटककार, निबंधकार, चित्रकार
भाषा बंगाली, अंग्रेजी
पुरस्कार साहित्य में नोबेल पुरस्कार (1913)

रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी

रबींद्रनाथ टैगोर एक बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति थे, जिनमें नई चीजें सीखने को लेकर ललक थी। उन्हें स्नेह से घरवाले 'रोबी' कह कर बुलाते थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनि रबींद्रनाथ एक उपन्यासकार, कवि, दार्शनिक, चित्रकार, कथावाचक और नाटककार थे। साहित्य और संगीत में उनका योगदान अविस्मरणीय है। न केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि पूरे भारत में लोग उन्हें एक श्रेष्ठ कला प्रेमी और कलाकार के रूप में याद करते हैं। यहां तक ​​कि 1913 में भारतीय साहित्य में उनके महान योगदान के लिए उन्हें एशिया में पहली बार सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया था। क्या आप जानते हैं कि वह यह पुरस्कार पाने वाले एशिया के पहले व्यक्ति थे। टैगोर ने भारत के राष्ट्रीय गान की रचना भी की थी।

8 वर्ष की उम्र में लिखी पहली कविता

उनका जन्म 7 मई 1861 को देबेंद्रनाथ टैगोर और सरदा देवी से जोरासांको हवेली में हुआ था। उनका कोलकाता में टैगोर परिवार का पैतृक घर है। अपने भाई-बहनों में वह सबसे छोटे थे। 8 साल की उम्र में उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया था और सोलह साल की उम्र तक उन्होंने कलाकृतियों की रचना भी शुरू कर दी। 1877 में उन्होंने लघु कहानी 'भिखारिनी' और 1882 में कविताओं का संग्रह 'संध्या संगत' लिखा।

भारत दौरे से कई विषयों में ज्ञान प्राप्त किया

वह कालिदास की शास्त्रीय कविता से प्रभावित थे और उन्होंने अपनी खुद की शास्त्रीय कविताएं लिखना शुरू किया। उनकी बहन स्वर्णकुमारी एक प्रसिद्ध उपन्यासकार थीं। 1873 में उन्होंने कई महीनों तक अपने पिता के साथ भारत का दौरा किया और कई विषयों पर ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने सिख धर्म के बारे में जाना, जब वह अमृतसर पर रहे और लगभग छह कविताओं और धर्म पर कई लेखों को कलमबद्ध किया।

बैरिस्टर बनने के लिए गए इंग्लैंड

उनकी पारंपरिक शिक्षा ब्राइटन, ईस्ट ससेक्स, इंग्लैंड में एक पब्लिक स्कूल में शुरू हुई। 1878 में वह अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए। लेकिन उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और साहित्य में अपनी रुचि व्यक्त की। उनके पिता ने उनके लिए एक जमीन खरीदी और इसे शांतिनिकेतन नाम दिया। देबेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में एक 'आश्रम' की स्थापना की। 1901 में रवींद्रनाथ टैगोर ने एक ओपन-एयर स्कूल की स्थापना की। इसमने एक प्रार्थना कक्ष था और इसे 'द मंदिर' नाम दिया गया था। बाद में इसका नाम 'पाठ भवन' भी रखा गया। यहां कक्षाएं पेड़ों के नीचे आयोजित की जाती थीं और शिक्षण की पारंपरिक गुरु-शिष्य पद्धति का पालन किया जाता था।

पद्द कविताओं में रबीन्द्रनाथ की पकड़

कविगुरु रबींद्रनाथ टैगौर ने अपनी रचनाओं के लिए विश्व प्रसिद्धि हासिल की। पद्य कविताओं में रबीन्द्रनाथ की पकड़ बेहत मजबूत थी। वहीं गद्य के रूप में उनके द्वारा लिखी लघु कहानियों को भी लोग खूब पसंद किया करते थे। प्रतिभाशाली टैगोर ने न केवल इतिहास बल्कि भाषा विज्ञान, आध्यात्मिकता से जुड़ी पुस्तकें की रचना भी की।

रबींद्रनाथ टैगोर: साहित्यिक रचनाएँ

जपजोग

नस्तनिरह

घोरे बाइरे

गोरा

चोखेर बाली

पूरबी प्रवाहिन

शिशु भोलानाथ

महुआ

वनवाणी

परिशेष

पुनश्च

वीथिका शेषलेखा

कणिका

नैवेद्य मायेर खेला

क्षणिका

गीतिमाल्य

कथा ओ कहानी

लघुकथाएं: भिखारीनी, काबुलीवाला, क्षुदिता पासन, अटटू, हैमंती और मुसल्मानिर गोलपो आदि।

कविता संग्रह: बालको, पुरोबी, सोनार तोरी और गीतांजलि हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने बंगाली साहित्य के आयामों को बदल दिया। 7 अगस्त 1941 को जोरासांको हवेली में उनका निधन हो गया, जहां उनका लालन-पालन हुआ था।

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English summary
Rabindranath Tagore Biography In Hindi : Rabindranath Tagore Jayanti will be celebrated on 7th May every year. Rabindranath Tagore was born on 7 May 1861 in the city of Calcutta, West Bengal. Rabindranath Tagore's father's name was Devendranath Tagore and mother's name was Sharda Devi. Rabindranath Tagore was the youngest of five siblings. Rabindranath Tagore played an important role in literature, music and independence of the country. Rabindranath Tagore's birthday is celebrated every year on 7th May as Rabindranath Tagore Jayanti for the unforgettable contribution of Tagore. On the occasion of Rabindranath Tagore Jayanti, everyone including the President, Prime Minister and Chief Ministers of states remember him.
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