Maharana Pratap Jayanti 2022: महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े 12 अनसुने तथ्य, जानकार हो जाएंगे हैरान

Maharana Pratap Jayanti 2022: भारत के महान योद्धाओं में से एक महाराणा प्रताप सिंह की आज 482वीं जयंती मनाई जा रही है। महाराणा प्रताप उत्तर-पश्चिमी भारत में मेवाड़, राजस्थान के राजपूत राजा थे। महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता उदय सिंह द्वितीय मेवाड़ वंश के 12वें शासक और उनकी राजधानी चित्तौड़ थी। उदय सिंह द्वितीय उदयपुर के संस्थापक भी थे। महाराणा प्रताप परिवार में सबसे बड़े बच्चे थे, उनके तीन भाई और दो सौतेली बहनें थीं। महाराणा प्रताप ने अपने मोगलों के अतिक्रमण के खिलाफ कई लड़ाई लड़ी, जिसमें हल्दीघाटी की लड़ाई में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगल बादशाह अकबर को सन 1577, 1578 और 1579 में तीन बार हराया था। महाराणा प्रताप की 11 पत्नियां और 17 बच्चे थे। उनके सबसे बड़े पुत्र, महाराणा अमर सिंह 1, उनके उत्तराधिकारी बने और मेवाड़ वंश के 14वें राजा थे। हल्दीघाटी युद्ध में वह बुरी तरह घायल हो गए और 19 जनवरी 1597 को 56 वर्ष की आयु में महाराणा प्रताप का निधन हुआ।

 
महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े 12 अनसुने तथ्य, जानकार हो जाएंगे हैरान

राणा प्रताप सिंह जिन्हें महाराणा प्रताप के नाम से भी जाना जाता है, प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़, राजस्थान में हुआ था। वह मेवाड़ के 13वें राजा और उदय सिंह द्वितीय के ज्येष्ठ पुत्र थे। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार महाराणा प्रताप जयंती हर साल 9 मई को पड़ती है। जबकि, हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। इस हिसाब से राजस्थान में इस वर्ष महाराणा की जयंती 2 जून 2022 को मनाई जा रही है।

महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने चित्तौड़ में अपनी राजधानी के साथ मेवाड़ राज्य पर शासन किया। उदय सिंह द्वितीय उदयपुर (राजस्थान) शहर के संस्थापक भी थे। हल्दीघाटी की लड़ाई 1576 में मेवाड़ के राणा प्रताप सिंह और अंबर के राजा मान सिंह के बीच लड़ी गई थी जो मुगल सम्राट अकबर के सेनापति थे।

 

महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था, युद्ध के दौरान चेतक ने किले से छलांग लगा दी थी। जिसके बाद वह घायल हो गया और कुछ दिन बाद चेतक की मृत्यु हो गई। 1579 के बाद, मेवाड़ पर मुगल दबाव कम हुआ और प्रताप ने कुम्भलगढ़, उदयपुर और गोगुन्दा सहित पश्चिमी मेवाड़ को पुनः प्राप्त कर लिया। इस अवधि के दौरान, उन्होंने आधुनिक डूंगरपुर के पास एक नई राजधानी चावंड का भी निर्माण किया।

महाराणा प्रताप सात फुट पांच इंच लंबे थे और उनका वजन 110 किलो था। उनके सीने के कवच का वजन 72 किग्रा और उनके भाले का वजन 81 किग्रा था। महाराणा प्रताप की ढाल, भाला, दो तलवारें और कवच का कुल वजन लगभग 208 किलो था।

उनकी ग्यारह पत्नियां, पांच बेटियां और सत्रह बेटे थे। उनकी पत्नियों के नाम हैं अजबदे ​​पंवार, रानी लखबाई, रानी चंपाबाई झाटी, रानी शाहमतीबाई हाड़ा, रानी रत्नावतीबाई परमार, रानी सोलंखिनीपुर बाई, रानी अमरबाई राठौर, रानी फूल बाई राठौर, रानी आलमदेबाई चौहान, रानी जसोबाई चौहान और रानी खिचर आशाबाई।

1567 में मुगल सेना ने मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ को घेर लिया। मुगल सेना से लड़ने के बजाय, उदय सिंह ने राजधानी छोड़ दी और अपने परिवार को गोगुन्दा में स्थानांतरित कर दिया। हालांकि प्रताप ने इस फैसले का विरोध किया और वापस जाने पर जोर दिया, लेकिन बुजुर्ग उन्हें समझाने में सक्षम थे कि जगह छोड़ना सही फैसला था। मेवाड़ राज्य की एक अस्थायी सरकार उदय सिंह और उसके दरबारियों द्वारा गोगुन्दा में स्थापित की गई थी।

1572 में उदय सिंह के निधन के बाद, रानी धीर बाई ने जोर देकर कहा कि उदय सिंह के सबसे बड़े बेटे, जगमल को राजा के रूप में ताज पहनाया जाना चाहिए, लेकिन वरिष्ठ दरबारियों ने महसूस किया कि प्रताप मौजूदा स्थिति को संभालने के लिए एक बेहतर विकल्प थे। इस प्रकार प्रताप को गद्दी पर बैठाया।

चेतक के अलावा, एक और जानवर था जो महाराणा को बहुत प्रिय था - रामप्रसाद नाम का एक हाथी। हल्दीघाटी की लड़ाई के दौरान रामप्रसाद ने कई घोड़ों, हाथियों और सैनिकों को मार डाला और घायल कर दिया। कहा जाता है कि राजा मानसिंह ने रामप्रसाद को पकड़ने के लिए सात हाथियों को तैनात किया था।

18 जून 1576 को हल्दीघाटी में राजपूत सेना मुगल सेना (आसफ खान प्रथम और मान सिंह की कमान में) के साथ आमने-सामने खड़ी हो गई। इतिहासकारों के अनुसार, यह अब तक लड़ी गई सबसे भीषण लड़ाइयों में से एक थी, जिसमें मुगल सेना ने राजपूत सेना को हरा दिया था। मेवाड़ की सेना राम शाह तंवर और उनके पुत्रों, चंद्रसेनजी राठौर, रावत कृष्णदासजी चुंडावत और मान सिंहजी झाला के अधीन थी।

लड़ाई चार घंटे तक चली और इसके परिणामस्वरूप मेवाड़ के लगभग 1600 सैनिक शहीद हो गए, जबकि मुगलों के 150 सैनिक मारे और 350 से अधिक घायल हुए। इस युद्ध में महाराणा प्रताप बुरी तरह घायल हो गए। जिसके बाद प्रताप जंगल में रहने लगे और अकबर को हराने की योजना बनाने लगे। लेकिन उनके जख्म इतने गहरे थे कि 19 जनवरी 1597 को उनका निधन हो गया और उनके पुत्र अमर सिंह को उत्तराधिकारी बनाया गया। लेकिन अमर सिंह ने 1614 में अकबर के पुत्र जहांगीर को यह गद्दी सौंप दी।

भारत के सबसे महान राजपूत योद्धाओं में से एक महाराणा प्रताप ने मुगल शासक अकबर के खिलफ कई लड़ाई लड़ी। अन्य पड़ोसी राजपूत शासकों के विपरीत, महाराणा प्रताप ने बार-बार शक्तिशाली मुगलों के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपनी अंतिम सांस तक साहसपूर्वक मुगलों से लड़ते रहे। राजपूत वीरता, परिश्रम और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप मुगल सम्राट अकबर की ताकत से लड़ने वाले एकमात्र राजपूत योद्धा थे।

महाराणा प्रताप सिंह को पहला स्वतंत्रता सेनानी' माना जाता है, क्योंकि उन्होंने अकबर के नेतृत्व वाली मुगल सेनाओं के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया था। महाराणा प्रताप के जीवन और उपलब्धियों पर कई टेलीविजन शो बनाए गए हैं। महाराणा प्रताप को समर्पित एक ऐतिहासिक स्थल, महाराणा प्रताप स्मारक, उदयपुर में मोती मगरी, पर्ल हिल के शीर्ष पर स्थित है। यह महाराणा भागवत सिंह मेवाड़ द्वारा बनाया गया था और इसमें महाराणा प्रताप की एक कांस्य प्रतिमा भी है, जिसमें वह अपने घोड़े चेतक पर सवार हैं।

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English summary
Maharana Pratap Jayanti 2022: The 482nd birth anniversary of Maharana Pratap Singh, one of the great warriors of India, is being celebrated today. Maharana Pratap was a Rajput king of Mewar, Rajasthan in north-western India. Maharana Pratap was born on 9 May 1540 in a Rajput family. His father Udai Singh II was the 12th ruler of the Mewar dynasty and his capital was Chittor. Udai Singh II was also the founder of Udaipur.
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