Independence Day 2022: भारत की आजादी में योगदान देने वाली महिला स्वतंत्रता सेनानियों की लिस्ट

भारत इस वर्ष अपना 76वां स्वतंत्रात दिवस मनाने जा रहे है। भारत की आजदी में कई स्वतंत्रता सेनानी ऐसे है जिनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो सा गया है। ये वह गुमनाम सेनानी हैं जिन्होंने देश के लिए अपना योगदान दिया। इन लोगों ने कभी भी अपनी जान की परवाह नहीं की इनके लिए सबसे ऊपर भारत की आजादी थी। आज भारत आजादी का अमृत महोत्सव केवल इन्हें के बलिदानों की वजह से मना रहा है। आजदी में जिस प्रकार योगदान पुरुषों ने दिया है उतना ही योगदान महिलाओं ने दिया। महिला स्वतंत्रता सेनानियों ने भी देश की आजादी में बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया है। वह किसी भी कार्यों को करने के लिए पीछें नहीं हटी। सभी अन्य सेनानियों के साथ कदम से कदम मिलाकर उन्होंने देस की आजादी का जिम्मा अपने कंधों पर लिया। जहां कहीं महिलाओं को लोग चार दीवारों में कैद करने की सोचते हैं और यह मानते हैं की वह महिलाए कुछ नहीं कर सकती वहीं इन महिलाओं ने सभी कैदों को तोड़ के भारत की आजादी के लिए खुद को समर्पित किया। आज हम आपकों उन्हीं महिला स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते है भारत की स्वतंत्रता में उनके योगदान के बारे में-

 
Independence Day 2022: भारत की आजादी में योगदान देने वाली महिला स्वतंत्रता सेनानियों की लिस्ट

1). रानी अब्बक्का चौटा, उल्लाली

रानी अब्बक्का चौटा का जन्म 1525 में हुआ था। वह पहली भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। वह उन कुछ स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थी जिन्होंने भारत को उपनिवेशवाद और विदेशियों के राज से मुक्त करवाने का प्रयत्न किया। उन्होंने पुर्तगालियों के खिलाफ युद्ध किया और अपनी मां की हार का बदला लेने का निश्चय किया। इस तरह से रानी अब्बक्का ने पुर्तगालियों को मैंगलोर से बाहर निकालने के लिए बहुत मेहनत की। उनके इस निश्चय को देख कर उन्होंने अपने लोगों का सम्मान प्राप्त किया।

2). रानी वेलु नचियार और कुयली, शिवगंगा

वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 में हुआ था। वह पहली भारतीय रानी थी जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध की शुरूआत की। उन्हें तमिलों द्वारा वीरमंगई के नाम से भी जाना जाता है।

 

3). रामगढ़ की रानी अवंती बाई

रानी अवंती बाई का जन्म 16 अगस्त 1831 में हुआ था। वह रामगढ़ मध्य प्रदेश की रानी थी। अवंती बाई को मुख्य तौर पर 1857 में हुई क्रांति में उनके योगदान के लिए जानी जाती है। उनकी पहली लड़ाई ब्रिटिश के खिलाफ केरी गांव में हुई थी। ये गांव मध्य प्रदेश के पास ही स्थित था।

4). कित्तूर की रानी चेन्नम्मा

रानी चेन्नम्मा का जन्म 14 नवंबर 1778 में हुआ था। रानी चेन्नम्मा को मुख्य तौर पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1824 की क्रांति के लिए जाना जाता है।

5). फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू

फूलो और झानो आदिवासी समाज से थी। ये मुर्मू आदिवासी समुदाय से थी। ये समुदाय शांति के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था। लेकिन फीर अचानक ब्रिटिश इंडिया कंपनी ने उनकी जमीन पर कब्जा करना शुरू किया और जमींदारी प्रथा की शुरूआत हुई। फूलो और झानो ने इस जमींदारी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई। उनकी बड़ी बहन जब 21 ब्रिटिश लोगों को मारा तो उसके बदले में ब्रिटिश सेना के लोगों ने इस आदिवासी समाज के करीब 25000 लोगों को मार दिया।

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English summary
There are many Indian Freedom Fighter who are unknown to us. Men or Women both have been part of Indian Independence. Here we are sharing a list of unsung Indiana women freedom fighter.
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