Kargil Vijay Diwas 2022 : जानिए परम वीर चक्र जीतने वाले सबसे कम उम्र के योद्धा योगेंद्र सिंह यादव के बारे में

कारगिल विजय दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मानने के पीछे का कारण ये है कि आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध खत्म होने और भारत की जमीन से सभी पाकिस्तानियों को खदेड़ देने की घोषणा की गई थी। तभी से 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। कारगिल विजय दिवस पर हम सभी कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए जवानों को याद करते हैं। देश के लिए उनके अभूतपूर्व योगदान को नमन करते हैं। कारगिल युद्ध के दौरान भारत के टाइगर हिल पर पाकिस्तान के घुसपैठियों ने अपना कब्जा कर लिया था। जिसकी जानकारी लगते ही ऑपरेशन विजय लांच किया गया। इस ऑपरेशन की सफलता पर उस समय के तात्कालिक प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद14 जुलाई को ऑपरेश विजय के सफल होने की घोषणा की थी। उसी दौरान कई ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कारगिल हीरों के नाम से जाना जाता है। उन्हीं में एक नाम है योगेंद्र सिंह यादव जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई।

 

आर्मी में जाने की इच्छा रखने वाले योगेंद्र सिंह यादव ने कम उम्र में बड़ा कमाल कर दिखाया। कारगिल में अपने योगदान से उन्होंने सबको हैरान कर दिखाई। छोटी सी उम्र में उनके इस योगदान के लिए उन्हें सर्वोच्च वीरता सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। योगेंद्र सिंह यादव को जब इस सम्मान से नवाजा गया था तब वह मात्र 19 वर्ष के थे। सबसे कम उम्र में उन्होंने ये सम्मान प्राप्त किया। आइए जाने उनके अभूतपूर्व योगदान के बारे में।

Kargil Vijay Diwas 2022 : जानिए परम वीर चक्र जीतने वाले कम उम्र के योगेंद्र सिंह यादव के बारे में

योगेंद्र सिंह यादव का प्रांभिक जीवन

योगेंद्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 में औरंगाबाद अहिर, बुलंदशहर जिले उत्तर प्रदेश में हुआ। यादव के पिता करन सिंह यादव भी आर्मी में रह सेवा दी है। वह 1965 और 1971 की भारत- पाक युद्ध में शामिल रहें है। पिता के भारतीय आर्मी में होने के कारण वह बचपन से ही आर्मी की गाथाएं सुनते आए हैं जिसकी वजह से उनकी आर्मी में जाने की इच्छा और द्दढ़ होने लगी। वह 15 साल के थे जब उनके भाई ने उन्हें आर्मी में जाने की सलहा दी। इस बात एक बार भी बिना सोचे योगेंद्र ने सिलेक्शन सर्विस बोर्ड की परीक्षा दी और पहली बार में ये परीक्षा पास कर ली। योगेंद्र ने 16 साल की उम्र में आर्मी ज्वाईन की।

 

योगेंद्र की मां नहीं चाहती थी कि वह आर्मी में जाए। उनकी मां चाहती थी कि वह पढ़-लिख कर के कोई बढ़ी और प्रतिष्ठत नौकरी हासिल करें और सच कहुं तो मैं भी आगे पढ़ना चाहता था। लेकिन देश की हालत ऐसी है कि शिक्षितों की भी नौकरी पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। निम्न मध्यम वर्ग के परिवार से होने की वजह से सेना ही एकमात्र रास्ता है।

कारगिल युद्ध में उनका योगदान

योगेंद्र ने जून 1996 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी मानेकशॉ बटालियन को ज्वाइन किया। 2.5 साल की मिलिट्री सर्विस के बाद उन्हें कारगिल युद्ध के लिए भेजा गया। उनकी शादि को केवल 15 दिन ही हुए थे और उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी।

कारगिल युद्ध में 4 जुलाई 1999 को उन्हें टाइगर हिल के तीन बंकरों पर कब्जा करने के अभियान पर भेजा गया। जिन बंकरों पर यादव को भेजा गया था वह बंकर 1000 फीट की ऊंचाई पर बर्फ से पूरी तरह से ढंके हुए थे। बंकरों तक जाने के लिए रस्सियों को बांधा गया ताकि वह दुश्मनों के बंकर तक पहुंच सके और अपने इस अभियान को अंजाम दे सकें। अचानक दुश्मन के बंकर से मशीन गन और रॉकेट की आग से प्लाटून कमांडर और अन्य दो सैनिक मारे गए। उसी दौरान कमर और कंधे पर गोली लगने के बाद भी यादव ने हार नहीं मानी और वह बची हुई 60 फीट की दूरी तय कर चोटी पर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजुद भी उन्होंने पहले बंकर में ग्रेनेड फेक कर उसे तबहा कर दिया और साथ ही चार पाकिस्तानीयों को मार गिराया। बंकर नष्ट होने के कारण गोलाबारी बेअसर हो गई और उनकी पलटन के बाकि साथियों को उपर चोटी पर आने में आसानी हुई। इसके बाद एक-एक करके सभी बंकरों को नष्ट कर दिया गया और प्लाटून ने टाइगर हिल पर भारत का कब्जा वापिस हासिल किया। कारगिल युद्ध में इस अभियान के दौरान सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव को 12 गोलियां लगी थी। उनके इस योगदान के लिए भारतीय सरकार ने उन्हें परम वीर चक्र से नवाजा। परम वीर चक्र से सम्मानित होने वाले वह सबसे कम उम्र के सैनिक है।

कारगिल के बाद करियर

स्वतंत्रता दिवस 2021 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव को कैप्टन के पद से सम्मानित किया गया।

सूबेदार मेजर और माननीय कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव को उडचलो सलाहकार बोर्ड में शामिल हुए। ये एक कंज्यूमर स्टार्टअप है जो रिटायरमेंट के बाद मिलिट्री के लोगों को सेवा प्रदान करता है।

भारत में उनके योगदान को लेकर भारत उनकों नमन करता है।

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English summary
Know all about Kargil War Hero Yogender Singh Yadav. Kargil Vijay Diwas celebrated every year on 26 july to remember all the kargil war heros who died in kargil war. Remembering all the martyrs of kargil war on this Kargil Vijay Diwas.
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