Independence Day 2022: कौन थे पीर अली खान और क्या था इनका भारतीय स्वतंत्रा आंदोलन में योगदान

पीर अली खान एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि उन्होंने गुप्त रूप से देश की आजादी के लिए लड़ाई थी। तो आइए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीर अली खान के जीवन से परिचित कराने का प्रयास करते हैं।

 

पीर अली खान (जन्म-1812, मृत्यु- 7 जुलाई, 1857) एक भारतीय क्रांतिकारी और विद्रोही थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण उन्हें मृत्युदंड दिया गया था।

कौन थे पीर अली खान और क्या था इनका भारतीय स्वतंत्रा आंदोलन में योगदान

पीर अली खान जीवनी

पीर अली खान का जन्म 1812 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुहम्मदपुर में हुआ था। वे केवल सात वर्ष की आयु में घर छोड़कर पटना चले गए थे। जहां उनका पालन-पोषण एक जमींदार ने अपने बच्चे के रूप में किया। पीर ने बड़े होकर पटना में एक किताबों की दुकान खोली, जिसे 1857 के विद्रोह के दौरान विद्रोहियों के मिलने का स्थान माना जाता था। पटना डिवीजन के आयुक्त (1855-1857) विलियम टेलर ने अपनी पुस्तक में पीर अली खान का उल्लेख किया है कि वो लखनऊ के मूल निवासी थे, लेकिन पटना में कई वर्षों तक रहे थे जहां उन्होंने पुस्तक विक्रेता का व्यापार किया।

 

स्वतंत्रता संग्राम में पीर अली खान

निडर पीर अली खान ने जुलाई 1857 में पटना जिले में 1857 के महान विद्रोह के संगठन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उन्होंने गुप्त रूप से महत्वपूर्ण पत्रक और पर्चे वितरित किए और अन्य क्रांतिकारियों को कोडित संदेश भी भेजे। उपनिवेशवाद विरोधी विरोधों की योजना बनाने और संगठित करने के लिए क्रांतिकारियों के बीच सभी संचार के दौरान, यह कहा जाता है कि अधिकारियों के हाथों में दो पत्र गिर गए। क्रांतिकारी आंदोलन में पीर अली खान की भूमिका इस खोज से मजबूती से स्थापित हुई। हालांकि, पीर अली खान ने अंग्रेजों से लड़ने के अपने संकल्प से पीछे हटने से इनकार कर दिया।

पीर अली खान ने 03 जुलाई 1857 को पटना में विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने पहले शहर के बीचोबीच एक कैथोलिक पादरी के घर पर हमला किया। इसके बाद उन्होंने एक अफीम एजेंट के प्रमुख सहायक डॉ. लिएल की हत्या कर दी। इस घटना के तुरंत बाद, पीर अली खान का पता लगा लिया गया और अन्य क्रांतिकारियों के साथ उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। विद्रोह के बारे में जानकारी के बदले में माफी की पेशकश करने पर, उन्होंने मना कर दिया, और कहा कि आप मुझे या मेरे जैसो को हर दिन फांसी दे सकते हैं, लेकिन हजारों लोग मेरे स्थान पर उठेंगे, और तुम्हारा उद्देश्य कभी प्राप्त नहीं हो सकेगा। उनके इस कथन से ये पता चलता है कि वे कितने निडर भावना वाले व्यक्ति थे।

शहीद पीर अली खान

पीर अली खान को सार्वजनिक रूप से 07 जुलाई 1857 को पटना के तत्कालीन आयुक्त विलियम टायलर द्वारा 14 अन्य विद्रोहियों के साथ, घसीता खलीफा, गुलाम अब्बास, नंदू लाल उर्फ सिपाही, जुम्मन, मडुवा, काजिल खान, रमजानी, पीर बख्श, पीर अली, वाहिद अली, गुलाम अली, महमूद अकबर और असरार अली खान के साथ फांसी दे दी गई थी।

बिहार राज्य सरकार ने पीर अली खान के फांसी के स्थान को शहीद पीर अली खान पार्क के रूप में निर्माण कर उस स्थान को अमर कर दिया है। इस महान आत्मा के नाम पर पटना एयरपोर्ट से सटी एक सड़क का नाम नाम भी रखा गया है।

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English summary
Pir Ali Khan was an Indian revolutionary and rebel who participated in the Indian independence movement. He was given the death penalty for his participation in the freedom struggle of 1857. Pir Ali Khan was one such freedom fighter whom very few people know about because he secretly fought for the independence of the country.
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