Independence Day 2022: जानिए स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब की गुलाब कौर के योगदान की कहानी

भारत इस साल 15 अगस्त को आजादी के 75वां स्वतंत्रता दिवस यानि की अमृत महोत्सव मनाने जा रहे हैं। बता दें कि, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुत से ऐसी महिलाएं थी जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान बलिदान दी। आज के इस आर्टिकल में हम आपको पंजाब की एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जाने जा रहें है जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अहम भूमिका निभाई थी।

 

हालांकि, पंजाब से बहुत से लोगों ने आजादी की लड़ाई में भाग लिया था लेकिन गुलाब कौर एक ऐसी वीर महिला थी जिन्होंने भारत की भूमि पर न रहते हुए भी देश के लिए लड़ाई लड़नी शुरु कर दी थी। आइए जानते हैं गुलाब कौर का जीवन परिचय।

जानिए स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब की गुलाब कौर के योगदान की कहानी

गुलाब कौर जीवनी

गुलाब कौर एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थी जिनकी मृत्यु 1941 में हुई थी। भारत के पंजाब के संगरूर जिले के बख्शीवाला गांव में लगभग 1890 में जन्मी गुलाब कौर का विवाह मान सिंह से हुआ था। जिसके बाद गुलाब कौर और मान सिंह अमेरिका जाने के इरादे से फिलीपींस के मनीला पहुंचे थे।

 

गुलाब कौर का राजनीतिक कैरियर

मनीला में, गुलाब कौर भारतीय उपमहाद्वीप को ब्रिटिश शासन से मुक्त करने के उद्देश्य से भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित एक संगठन ग़दर पार्टी में शामिल हुई थी। गुलाब कौर ने मनीला में भारतीय यात्रियों को प्रेरक भाषण देकर ग़दर पार्टी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। पार्टी के नेता, बाबा हाफिज अब्दुल्ला (फज्जा), बाबा बंता सिंह और बाबा हरनाम सिंह (टुंडीलत) उनके लिए प्रेरणा के एक बड़े स्रोत बने।

ग़दर पार्टी ने अमेरिका, कनाडा, फिलीपींस, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में भारतीय प्रवासियों की स्वतंत्रता के लिए ग़दर आंदोलन (1913-14) का गठन किया। मूल रूप से इस पार्टी ने भारत को ब्रिटिश शासन के अत्याचार से मुक्त करने की दिशा में काम किया था।

गुलाब कौर ग़दर पार्टी के विवेक के तहत भारत लौटी और पंजाब से ही प्रतिरोध का हिस्सा बनने का फैसला किया। तो उन्होंने अपने पति के अमेरिका जाने का फैसला करने के बाद अपने आरामदायक जीवन का त्याग कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में पूर्ण रूप से जुट गई।

जिसके लिए फिलीपींस के लगभग पचास अन्य स्वतंत्रता गदरियों के साथ गुलाब कौर एसएस कोरिया बैच में शामिल हुई और भारत के लिए रवाना हुई जो कि सिंगापुर में एसएस कोरिया से तोशा मारू में बदल गई। भारत पहुंचने के बाद, वह कुछ अन्य क्रांतिकारियों के साथ कपूरथला, होशियारपुर और जालंधर के गांवों में देश की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र क्रांति के लिए जनता को जुटाने के लिए सक्रिय थी।

गुलाब कौर की मृत्यु

ब्रिटिश-भारत में और वर्तमान के पाकिस्तान में गुलाब कौर को देशद्रोही कृत्यों के लिए लाहौर में शाही किला नामक किले में गिरफ्तार किया गया और दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी जहां उन्हें लगातार दो साल तक अंग्रेजों द्वारा प्रताडित किया गया। इसके बावजूद, उन्होंने अपना काम जारी रखा और अंग्रेजों के अत्याचार के आगे नहीं झुकी। अंततः 1941 में एक बीमारी के कारण उसकी मृत्यु हो गई। गुलाब कौर के बारे में 2014 में प्रकाशित केसर सिंह द्वारा पंजाबी भाषा में लिखित 'गदर दी धी गुलाब कौर' नामक एक पुस्तक उपलब्ध है।

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English summary
India is going to celebrate the 75th Independence Day i.e. Amrit Mahotsav on 15th August this year. Let us tell you that there were many such women in the Indian freedom struggle who sacrificed their lives for the freedom of the country. Gulab Kaur was an Indian freedom fighter who died in 1941. Born in about 1890 in Bakshiwala village of Sangrur district of Punjab, India, Gulab Kaur was married to Man Singh.
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