Gyanvapi Masjid Controversy UPSC: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से जुड़ी 10 बड़ी बातें

इतिहास के अनुसार 1669 में मुगल सम्राट औरंगजेब ने वाराणसी पर हमला कर काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वसेत करने का आदेश दिया था। औरंगजेब द्वारा किए गए हमल के करीब एक सदी के बाद इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने ज्ञानवापी मस्जिद के पास शिव मंदिर के पूनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जिसमें पंडाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के गर्भगृह के लिए 2 टन सोना भेजा था। वर्तमान स्वरूप में जिस मंदिर को सभी देख रहे हैं वह मंदिर अहिल्याबाई द्वारा पूनर्निमाण किया गया था। माना जाता है कि इस मंदिर को प्रचीन मंदिर स्थल के कुछ ही दूरी पर बनाया गया है। प्राचीन मंदिर के मूल स्थान ज्ञानवापी मस्जिद की जगह था ये माना जाता है जिसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और कई सालों के संघर्ष के बाद कोर्ट ने वीडियोग्राफी टीम का गठन किया ताकि इससे जुड़े सबूत एकत्रित किए जा सकें। मस्जिद की वीडियोग्राफी के दौरान कई तरह के सबूत सामने आए हैं जिसके अनुसार कोर्ट अपना निर्णय देगी। आइए जाने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के बारे में।

ज्ञानवापी मस्जिद कई समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चर्चा में ये तब सबसे ज्यादा आया जब 5 महिलाओं के ग्रुप ने कोर्ट में एक केस दर्ज करवा कर पूजा करने की बात कही थी जिसकों लेकर वीडियोग्राफी करवाने का फैसला कोर्ट की तरफ से जारी किया गया था। ज्ञानवापी मस्जिद लंबे समय से चली आ रही है और हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हुई है। आइए इस विवाद के बारे में जाने।

Gyanvapi Masjid Controversy UPSC: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से जुड़ी 10 बड़ी बातें


ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से जुड़ी 10 बातें

1. ज्ञानवापी मस्जिद जो काशी विश्वनाथ मंदिर के लोकप्रिय हिंदू तीर्थ स्थल के बगल में स्थित है। फिलहाल इस मस्जिद को लेकर चर्चा बहुत तेज है और पूरा देश इस केस के फैसेले का इंतजार कर रहा है। ज्ञानवापी विवाद 1991 में शुरू हुआ जब स्थानीय पुजारियों के एक समूह ने ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने की अनुमति मांगी और इस बात का दावा किया कि मस्जिद का निर्माण 17 वीं शताब्दी में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के एक ध्वस्त हिस्से पर किया गया था।

2. साल 2019 में, याचिकाकर्ताओं द्वारा ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग की गई और इसके बाद में ज्ञानवापी मस्जिद का मामला फिर से तूल पकड़ने लागा।

3. याचिकाकर्ताओं के द्वारा पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग करने के बाद भारतीय पुरातत्वों द्वारा परिसर के पुरातात्विक अध्ययन पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।

4. ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी का आदेश न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर द्वारा बाद में दिया गया जब कुछ महिला याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद पर याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने भगवान गणेश, श्रीनगर गौरी, नंदी मूर्तियों और भगवान हनुमान की पूजा करने की मांग की, जिन्हें मस्जिद की दीवारों पर स्थित कहा जाता है। इसी के साथ इन महिला याचिकाकर्ताओं ने अदालत से विरोधियों को मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए भी कहा।

5. इस याचिका पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने तर्क देते हुए कहा कि अदालत ने मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं दी थी। वीडियोग्राफी कि अनुमति केवल बैरिकेड्स के बाहर आंगन तक की ही थी। ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी का पूरा कार्य हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों द्वारा की नारेबाजी के साथ संपन्न हुई थी।

6. मुस्लिम पक्ष के वकील ने अदालत द्वारा नियुक्त सर्वेक्षण आयुक्त अजय कुमार मिश्रा पर पक्षपात का आरोप लगाया और इसी के साथ ये आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने अदालत की अनुमति के खिलाफ जाकर मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी करने की कोशिश की। इसी के साथ उन्होंने कहा की मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का उल्लंघन है।

7. सभी दलीलों को सुनने के बाद वाराणसी कोर्ट ने अपने ताजा दिए गए आदेश में कहा है कि कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नहीं बदला जाएगा और ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातत्व सर्वेक्षण में दो और कमिश्नर शामिल किए जाएंगे।

8. कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशानुसार ज्ञानवापी मस्जिद के बेसमेंट को खोला जाएगा। इसपर पुरातत्व सर्वेक्षण का निष्कर्ष निकाला गया और रिपोर्ट की कॉपी 17 मई 2022 को कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी।

9. यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट के अध्यक्ष शाहिद अली ने कहा कि सभी पक्षों को अदालत के निर्देशों का पालन करने होगा और साथ ही ये भी कहा गया कि यह देश कानून द्वारा शासित है।

10. ज्ञानवापी मस्जिद बेसमेंट को खोलने और होने वाले सर्वेक्षण को रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाने की बात भी की गई थी। ताकि सर्वे के दौरान किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो और कार्य सही तरहीके से समय पर हो सके।

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English summary
It is believed that the original place of the ancient temple was the site of the Gyanvapi mosque, for which a petition was filed in the court and after many years of struggle, the court formed a videography team to collect the evidence related to it. During the videography of the mosque, many types of evidence have come to the fore, according to which the court will give its decision. Let us know about the Gyanvapi Masjid controversy.
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