Teachers Day 2022: सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शैक्षिक विचार

सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के एक विद्वान, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक और राजनेता थे। उन्होंने भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। राधाकृष्णन का शिक्षा जगत में भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज, महाराजा कॉलेज मैसूर, यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता, मैनचेस्टर कॉलेज ऑक्सफोर्ड, आंध्र यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज में एकेडमिक काम किया था। वे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के 1938 से 1948 तक चौथे वाइस चांसलर भी रहे थे।

 

यदि राधाकृष्णन के स्वयं की पढ़ाई के बारे में बात करें तो उन्होंने अपनी वूरहिस कॉलेज, वेल्लोर और मद्रास क्रश्चिन कॉलेज से की थी। बता दें कि भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर यानि की उनकी जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। राधाकृष्णन पूरे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। राधाकृष्णन की फिलॉसफी और हिंदू धर्म में भी एक खास दिलस्पची थी।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शैक्षिक विचार

तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको शिक्षक दिवस के अवसर पर उनके कुछ ऐसे विचारों के बारे में बताते हैं जो हमें जिंदगी की कई महत्वपूर्ण सीख देने के साथ-साथ हमें सफलता की राह भी दिखाते हैं।

 

सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शैक्षिक विचार (Educational Thoughts of Sarvepalli Radhakrishnan)

1. शिक्षक वो नहीं होते जो छात्रों को जबरन ज्ञान दें. सही मायने में शिक्षक वो होते हैं जो छात्रों को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करें।
2. किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत बन जाती है जिससे सच्ची खुशी मिलती है।
3. किताबें वह साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।
4. ज्ञान हमें शक्ति देता है और प्रेम हमें परिपूर्णता देता है।
5. शिक्षा का परिणाम एक रचानात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो कि ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ लड़ सके।

ध्यान देने योग्य: जानिए क्या थे राधा कृष्णन दार्शनिक विचार

राधाकृष्णन ने पूर्वी और पश्चिमी विचारों को एक साथ लाने का प्रयास किया। उन्होंने पश्चिमी दार्शनिक और धार्मिक विचारों को एकीकृत करते हुए, बेहिचक पश्चिमी आलोचना के खिलाफ हिंदू धर्म का बचाव किया।

  • राधाकृष्णन नियो-मोस्ट वेदांत के प्रभावशाली प्रवक्ताओं में से एक थे।
  • उनकी मेटाफिजिक्स अद्वैत वेदांत पर आधारित थी, लेकिन उन्होंने आधुनिक दर्शकों के लिए इसकी पुनर्व्याख्या की।
  • उन्होंने मानव प्रकृति की सच्चाई और विविधता को पहचाना, जिसे उन्होंने निरपेक्ष, या ब्रह्म द्वारा आधार और समर्थन के रूप में देखा।
  • राधाकृष्णन के लिए धर्मशास्त्र और पंथ बौद्धिक सूत्रीकरण के साथ-साथ धार्मिक अनुभव या धार्मिक अंतर्ज्ञान के प्रतीक हैं।
  • राधाकृष्णन ने विभिन्न धर्मों को धार्मिक अनुभव की उनकी व्याख्या के अनुसार वर्गीकृत किया, जिसमें अद्वैत वेदांत सर्वोच्च स्थान पर था।
  • अन्य धर्मों की बौद्धिक रूप से मध्यस्थता वाली अवधारणाओं की तुलना में, राधाकृष्णन ने अद्वैत वेदांत को हिंदू धर्म के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि के रूप में देखा, क्योंकि यह अंतर्ज्ञान पर आधारित था।
  • राधाकृष्णन के अनुसार, वेदांत, उच्चतम प्रकार का धर्म है क्योंकि यह सबसे प्रत्यक्ष सहज अनुभव और आंतरिक अनुभूति प्रदान करता है।
  • पश्चिमी संस्कृति से परिचित होने के बावजूद, राधाकृष्णन इसके आलोचक थे। उन्होंने कहा कि, निष्पक्षता के अपने दावों के बावजूद, पश्चिमी दार्शनिक अपने ही समाज के धार्मिक प्रभावों से प्रभावित थे।
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English summary
Educational Thoughts of Sarvepalli Radhakrishnan: Sarvepalli Radhakrishnan was a scholar, politician, philosopher and statesman from India. He served as the first Vice President and second President of India. If we talk about Radhakrishnan's own studies, then he did his from Voorhees College, Vellore and Madras Crushin College.
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