Dussehra Essay in Hindi: दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल 2024 में दशहरा का त्योहार 12 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 58 मिनट से 13 अक्टूबर की सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।
ऐसे में दशहरा मनाने के लिए स्कूल और कॉलेज में कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जैसे कि निबंध लेखन, क्वीज कॉम्पीटिशन और भाषण प्रतियोगिता। आज के इस लेख में हम कक्षा 1, 3 और 5 के लिए दशहरा पर निबंध लेकर आएं हैं।

दशहरा पर निबंध (कक्षा 1 के लिए)
दशहरा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे विजयदशमी भी कहते हैं। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध करके माता सीता को बचाया था। दशहरे पर बड़े-बड़े मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं, जिससे बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मिलता है। इस दिन रामलीला का आयोजन भी होता है, जिसमें भगवान राम की कहानी दिखाई जाती है। दशहरा हमें सिखाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सच्चाई और अच्छाई की जीत होती है।
दशहरा पर निबंध (कक्षा 3 के लिए)
दशहरा भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह त्योहार हर साल अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। दशहरा को विजयदशमी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध करके बुराई पर विजय प्राप्त की थी।
दशहरे से पहले नौ दिनों तक नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें मां दुर्गा की पूजा की जाती है। दशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं, जो बुराई के अंत का प्रतीक होते हैं। इस दिन रामलीला का मंचन भी किया जाता है, जिसमें राम के जीवन की कहानी दिखाई जाती है।
दशहरा हमें सिखाता है कि हमेशा सच्चाई की राह पर चलना चाहिए और बुराई का अंत निश्चित है। इस त्योहार का संदेश है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अच्छाई की जीत हमेशा होती है। बच्चे इस दिन खूब आनंद लेते हैं और मिठाइयां बांटते हैं।
दशहरा का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और यह हमें सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
दशहरा पर निबंध (कक्षा 5 के लिए)
दशहरा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था, जो बुराई का प्रतीक था।
दशहरा के दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और बेटे मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह बुराई के अंत और सत्य की जीत का प्रतीक है। इसके साथ ही इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था। इसलिए, इस दिन को शक्ति और साहस का प्रतीक भी माना जाता है।
दशहरा के अवसर पर रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसमें रामायण के प्रसंगों का मंचन होता है। रामलीला में भगवान राम के जीवन, उनके संघर्षों और अंततः रावण पर उनकी जीत का प्रदर्शन किया जाता है।
दशहरा का त्योहार हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और धर्म की होती है। यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में बुराइयों का त्याग करें और सद्मार्ग पर चलें।
दशहरा का त्योहार हर उम्र के लोगों के लिए आनंद और सीख का स्रोत है। बच्चों के लिए यह पर्व न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि नैतिक शिक्षा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जय श्री राम!


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