ड्रोन इंडस्ट्री में साल 2025 तक होंगी एक लाख जॉब्स

By Careerindia Hindi Desk

अब जबकि देश नए नियमों के साथ ड्रोन के आम इस्तेमाल के लिए तैयार हो रहा है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के रिसर्चर्स ड्रोन स्कायवेज पर काम कर रहे हैं। ये स्कायवेज शहरी इलाकों में कई अनमैन्ड एरियल वहीकल्स यानी ड्रोन्स के सुरक्षित और सक्षम मूवमेंट के लिए एक फ्रेमवर्क की तरह तैयार होगा जिसे क्लास जी एयरस्पेस के नाम से भी जाना जाएगा। इतना ही नहीं देश के सरकारी और प्राइवेट सेक्टर भी ड्रोन्स का उपयोग दवाओं से लेकर दूसरी कॉर्मशियल डिलीवरीज को पूरा करने, निगरानी रखने और यहां तक कि कीटनाशक छिड़कने के लिए करने लगे हैं। ड्रोन्स के इस बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही अब इस इंडस्ट्री में जॉब्स के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद की जा रही है। इसी सिलसिले में द एसोसिएशन फॉर अनमैन्ड वहीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल का अनुमान है कि 2025 तक इस क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा जॉब्स क्रिएट होंगी।

 
ड्रोन इंडस्ट्री में साल 2025 तक होंगी एक लाख जॉब्स

ड्रोन इंडस्ट्री हाइलाइट्स

  • कुछ दिनों की ट्रेनिंग से बन सकते हैं ड्रोन पायलट
  • 18% की दर से बढ़ेगी भारतीय ड्रोन मार्केट की साइज 2023 तक
  • 30% तक इजाफा करेंगी ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में
  • 120 करोड़ रुपए का इंसेंटिव देगी सरकार पीएलआई स्कीम के तहत
  • 200 से ज्यादा स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं इस क्षेत्र में जो भावी एम्प्लायर्स बन सकते हैं
  • 14 बिलियन डॉलर्स की वैल्यूएशन थी ग्लोबल ड्रोन मार्केट की वर्ष 2018 में
  • 43 बिलियन डॉलर्स का होगा 2024 तक ग्लोबल ड्रोन मार्केट एक अनुमान के मुताबिक

अगले एक साल में कई गुना बढ़ेगी मांग
भविष्य में मांग के मद्देनजर ड्रोन मैन्यूफैक्चरर्स और रिपेयर सप्लायर्स ने प्रॉडक्ट ऑफरिंग और हायरिंग को बढ़ाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। कई कंपनीज जैसे कि आरव अनमैन्ड सिस्टम्स, आइडिया फोर्ज, ग्रेने एआई, स्कायलार्क ड्रोन्स और स्काय एयर क्वालिटी मानती हैं कि पिछले एक साल में उनकी सेल्स में 3-5 गुना इजाफा हुआ है जिसके चलते वे टीम साइज बढ़ाने के कदम उठा रही हैं। बैंगलुरु की ड्राेन उत्पादन करने वाली कंपनी आरव अनमैन्ड सिस्टम्स अगले एक वर्ष में 500 से 600 कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली है जिनमें अधिकतर ड्रोन पायलट होंगे और बाकी इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन से जुड़े प्रोफेशनल्स होंगे।

कई सेक्टर्स में होंगे जॉब्स के अवसर
ड्रोन टेक्नोलॉजी में रोजगार के अवसर ग्राउंड और ट्रेनिंग सेंटर्स से लेकर ड्रोन हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तक होंगे। इसके अलावा ड्रोन सर्विसेज और मैनटेनेंस जैसे कि कस्टमर सपोर्ट, कॉल सेंटर्स के साथ-साथ डेटा एनालिटिक्स, पायलट/ऑपरेटर, इंजीनियर, लिंक इंजीनियर जैसी ऑपर्च्युनिटीज उपलब्ध होंगी। टीमलीज सर्विसेज की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट रितुपर्णा चक्रवर्ती का मानना है कि आने वाले समय में इस सेक्टर में ड्राेन फोटोग्राफर व फिल्ममेकर, ड्रोन 3डी मॉडलर, ड्रोन पायलट ट्रेनर, प्रिसीशन एग्रीकल्चर सर्वेयर, ड्रोन सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन की जॉब्स बड़ी संख्या में होंगी।

शॉर्ट टर्म कोर्स से बन सकते हैं ड्रोन पायलट
अगर आप 18 वर्ष के हैं और दसवीं पास हैं तो ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग लेने के लिए आप कोई भी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट जॉइन कर सकते हैं। इसके लिए आपको डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन का मेडिकल एग्जाम पास करने के अलावा बैकग्राउंड चेक से भी गुजरना होगा। कोर्सेज की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि ड्रोन किस तरह का है। ज्यादातर ड्रोन ट्रेनिंग कोर्सेज शॉर्ट टर्म होते हैं और पांच से सात दिन में पूरे किए जा सकते हैं।

 

पीएलआई स्कीम से मिलेगा मार्केट को बूस्ट
पिछले महीने सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम की घोषणा की जिसमें ड्रोन से जुड़े नियमों को आसान बनाया गया है। मैन्युफैक्चरर्स और ऑपरेटर्स को अब केवल 5 फॉर्म्स जमा करने होंगे जिनकी संख्या पहले 25 थी। पीएलआई स्कीम के तहत सरकार इंसेंटिव के तौर पर 120 करोड़ रुपए जारी करेगी जिससे 5000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद के साथ अगले तीन साल में 1500 करोड़ का उत्पादन और तकरीबन 10,000 जॉब्स क्रिएट होने की भी आशा है।

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English summary
Now that the country is gearing up for common use of drones with new regulations, researchers at the Indian Institute of Science are working on drone skyways. These skyways will serve as a framework for the safe and efficient movement of several unmanned aerial vehicles (drones) in urban areas, also known as Class G airspace. With this increasing use of drones, new job opportunities are also expected to arise in this industry.
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