वुमेन स्टडीज में पीएचडी कैसे करें (Career in PHD Women Studies)

पीएचडी वूमेन स्टडीज यानि की महिला अध्ययन एक शोध आधारित डॉक्टरेट स्तर का फुल टाइम कोर्स है जिसे कम से कम 2 सालों में पूरा किया जा सकता है। इस कोर्स के दौरान छात्र नारीवाद, सामाजिक मुद्दों, अनुप्रयोगों और उससे संबंधित विषयों के सिद्धांत के विभिन्न सांस्कृतिक दृष्टिकोणों पर चर्चा करते हैं। इसके अलावा छात्र इस कोर्स में जाति, लिंग, कामुकता, नस्ल और कुछ अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक असमानताओं के सामाजिक मानदंडों का भी अध्ययन करते हैं।

 

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीएचडी इन वूमेन स्टडीज से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर वूमेन स्टडीज में पीएचडी करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में वूमेन स्टडीज में पीएचडी करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

वुमेन स्टडीज में पीएचडी कैसे करें

• कोर्स का नाम- डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन वूमेन स्टडीज
• कोर्स का प्रकार- डॉक्टरेट डिग्री
• कोर्स की अवधि- 2 साल
• एलिजिबिलिटी- मास्टर डिग्री
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम
• कोर्स फीस- 2,00,000 से 5,00,000 तक
• अवरेज सैलरी- 3,00,000 से 7,00,000 तक
• जॉब प्रोफाइल- गैर-लाभकारी संगठन के कार्यकारी निदेशक, सामुदायिक सेवा एजेंसी के निदेशक, बाल एवं युवा कार्यकर्ता, परिवार सहायता कार्यकर्ता, कार्यक्रम योजनाकार, लाइब्रेरियन कॉर्पोरेट संचार समन्वयक, बाजार अनुसंधान विश्लेषक, आदि।
• जॉब फील्ड- सामुदायिक स्वास्थ्य प्रमोटर, सामुदायिक स्वास्थ्य प्रमोटर, स्कूल, मानव संसाधन, आदि।

 

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास वूमेन स्टडीज से संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन या एम.फिल की डिग्री होनी चाहिए।
• पीएचडी इन वूमेन स्टडीज में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के पास मास्टर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक होना आवश्यक है।
• आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 5% अंकों की अतिरिक्त छूट दी जाती है।
• इसके साथ ही, उम्मीदवार को एंट्रेंस एग्जाम में भी विश्वविद्यालय के मानकों तक स्कोर करना होता है, जो या तो विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं या यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं द्वारा आयोजित की जाती हैं।

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज: एडमिशन प्रोसेस
किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में पीएचडी इन वूमेन स्टडीज कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, उम्मीदवारों को एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता होती है। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद पर्सनल इंट्रव्यू होता है और यदि उम्मीदवार उसमें अच्छा स्कोर करते हैं, तो उन्हें स्कोलरशिप भी मिल सकती है।

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज के लिए भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है

चरण 1: रजिस्ट्रेशन

  • उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
  • ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • आवेदन पत्र सबमिट करें।
  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।

चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम

  • यदि उम्मीदवार पीएचडी इन वूमेन स्टडीज में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
  • बता दें कि पीएचडी इन वूमेन स्टडीज के लिए एडमिशन प्रोसेस सीएसआईआर नेट, यूजीसी नेट, डीयूईटी, बीएचयू यूईटी आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे इंट्रव्यू के आधार पर किया जाता है।

चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसके लिए, छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।

चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट

  • एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
  • इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें डॉक्टरेट स्तर पर वूमेन स्टडीज का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज: सिलेबस
फर्स्ट ईयर

  • लिंग दृष्टिकोण का विकास
  • स्थानीय और वैश्विक नारीवाद
  • लिंग संबंधी चिंताएं: कानूनी इलाके
  • सामाजिक इतिहास जेंडरिंग
  • लिंग परिप्रेक्ष्य: असमानताएं और बहिष्करण
  • भारत में लिंग का सिद्धांत
  • तुलनात्मक संदर्भ में साहित्य
  • राष्ट्र, लिंग और समुदाय
  • नारीवादी अनुसंधान पद्धति
  • इतिहास और स्मृति: जाति और लिंग
  • लैंगिकता और लिंग: इतिहास और स्मृति

सेकेंड ईयर

  • नारीवादी सिद्धांत और नारीवादी विचार।
  • लिंग, विकास और संस्कृति पर सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य।
  • लिंग परिप्रेक्ष्य: संस्कृति
  • हिंसा की अवधारणा
  • दलित और लिंग अध्ययन
  • लैंगिक दृष्टिकोण का परिचय: दक्षिण एशिया
  • लिंग संबंधी चिंताएं: वैश्वीकरण
  • भारत में संस्कृति और लिंग अध्ययन
  • दक्षिण एशिया में उत्पादन, प्रजनन और लिंग
  • लिंग परिप्रेक्ष्य: नागरिक समाज, राज्य और कानून
  • डिसर्टेशन

कॉलेज फक्लटी आमतौर पर छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि पीएचडी पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज: टॉप कॉलेज और उनकी फीस

  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय- फीस 85,000
  • भारथिअर विश्वविद्यालय- फीस 95,000
  • पंजाब विश्वविद्यालय- फीस 89,000
  • मैसूर विश्वविद्यालय- फीस 1,05,000
  • चंडीगढ़ विश्वविद्यालय- फीस 1,37,000
  • वनस्थली विद्यापीठ- फीस 85,000
  • पांडिचेरी विश्वविद्यालय- फीस 70,000
  • उत्कल विश्वविद्यालय- फीस 83,000
  • आईआईएस (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी)- फीस 90,000
  • निम्स विश्वविद्यालय- फीस 1,50,000

पीएचडी इन वूमेन स्टडीज: जॉब प्रोफाइल और सैलरी

  • ह्यूमन रिसोर्स- सैलरी 5,00,000 से 7,00,000 तक
  • कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन कॉर्डिनेटर- सैलरी 4,00,000 से 6,00,000 तक
  • वकील- सैलरी 8,00,000 से 10,00,000 तक
  • मार्केट रिसर्च एनालिस्ट- सैलरी 7,00,000 से 8,00,000 तक
  • प्रोफेसर- सैलरी 7,00,000 से 9,00,000 तक

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English summary
PhD Women's Studies is a research-based doctoral level full time course that can be completed in as little as 2 years. During this course, students discuss various cultural perspectives on the theory of feminism, social issues, applications and related topics.
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