फिजियोथेरेपी में पीएचडी कैसे करें (Career in PHD Physiotherapy)

डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन फिजियोथेरेपी 3 से 5 साल तक की अवधि का डेक्टरेट लेवल का कोर्स है। पीएचडी इन फिजियोथेरेपी फुल-टाइम और पार्ट टाइम दोनों मोड से किया जा सकता है। ये कोर्स मुख्य रूप से रोग के शारीरिक उपचार जैसे मालिश, जिम्नास्टिक आदि क्षेत्रों के अध्ययन पर केंद्रित है।

 

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीएचडी फिजियोथेरेपी से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर फिजियोथेरेपी में पीएचडी करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में फिजियोथेरेपी में पीएचडी करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

फिजियोथेरेपी में पीएचडी कैसे करें

• कोर्स का नाम- डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन फिजियोथेरेपी
• कोर्स का प्रकार- डॉक्टरेट डिग्री
• कोर्स की अवधि- 3 से 5 साल तक
• एलिजिबिलिटी- मास्टर डिग्री
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम + पर्सनल इंटरव्यू
• कोर्स फीस- 5,000 से 6,00,000 तक
• अवरेज सैलरी- 5 से 10 लाख तक

 

पीएचडी फिजियोथेरेपी: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास फिजियोथेरेपी या उससे संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
• पीएचडी फिजियोथेरेपी में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के पास मास्टर डिग्री में न्यूनतम 50% अंक होना आवश्यक है।
• आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 5% अंकों की छूट दी जाती है।
• इसके साथ ही, उम्मीदवार को एंट्रेंस एग्जाम में भी विश्वविद्यालय के मानकों तक स्कोर करना होता है, जो या तो विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं या यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं द्वारा आयोजित की जाती हैं।

पीएचडी फिजियोथेरेपी : एडमिशन प्रोसेस
किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में पीएचडी फिजियोथेरेपी कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, उम्मीदवारों को एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता होती है। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद पर्सनल इंट्रव्यू होता है और यदि उम्मीदवार उसमें अच्छा स्कोर करते हैं, तो उन्हें स्कोलरशिप भी मिल सकती है।

पीएचडी फिजियोथेरेपी के लिए भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है

चरण 1: रजिस्ट्रेशन

  • उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
  • ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • आवेदन पत्र सबमिट करें।
  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।

चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम

  • यदि उम्मीदवार पीएचडी फिजियोथेरेपी में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
  • बता दें कि पीएचडी इन फिजियोथेरेपी के लिए एडमिशन प्रोसेस जेआरएफ- यूजीसी- नेट, बीएचयू आरईटी, डीयूईटी, सीयू-ईटी, आईपीयू सीईटी, एनपीएटी, एमयूईई आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे इंट्रव्यू के आधार पर किया जाता है।

चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसके लिए, छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।

चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट

  • एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
  • इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है, और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें डॉक्टरेट स्तर पर फिजियोथेरेपी का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।

पीएचडी फिजियोथेरेपी: सिलेबस

  • फंडामेंटल्स ऑफ फिजियोथेरेपी
  • स्पेक्ट्रल एनालिसिस ऑफ मेडिसिन एंड डिजाइन
  • बेसिक ऑफ बायोस्टेटिक
  • स्टेटिस्टिकल टेक्नीक फॉर डिसपर्सन
  • टेस्टींग
  • बेसिक ऑफ रिग्रेशन एनालिसिस
  • फंडामेंटल्स ऑफ रिसर्च
  • एथिक्स इन रिसर्च
  • मेन स्ट्रक्चर एंड एनालिसिस ऑफ सेंट्रल वेल्यू
  • एडवांस टेस्टिंग
  • फंडामेंटल्स ऑफ ड्रग सेंप्लिंग
  • बेसिक ऑफ प्रोबेबलिटी

कॉलेज फक्लटी आमतौर पर छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि पीएचडी पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।

पीएचडी फिजियोथेरेपी: टॉप कॉलेज और उनकी फीस

  • लोयोला कॉलेज, चेन्नई- फीस 1,83,750
  • प्रेसीडेंसी कॉलेज, चेन्नई- फीस 75,000
  • बसंथली विश्वविद्यालय, जयपुर- फीस 1,27,500
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वाराणसी- फीस 64,500
  • कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता- फीस 1,12,500
  • प्रौद्योगिकी और विज्ञान के बिड़ला संस्थान, (बिट्स पिलानी), पिलानी- फीस 1,10,000
  • मणिपाल कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस, मणिपाल- फीस 2,77,000
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एंड रिसर्च, गुजरात- फीस 1,30,000
  • जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, तमिलनाडु- फीस 2,00,000
  • जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मैसूर- फीस 2,00,000

पीएचडी फिजियोथेरेपी: जॉब प्रोफाइल और सैलरी

  • फिजियोथेरेपिस्ट- सैलरी 2 से 7 लाख
  • लेक्चरर- सैलरी 3 से 7 लाख
  • रिसर्च- सैलरी 6 से 8 लाख तक
  • ऑसथियोपाथ- सैलरी 3 से 9 लाख तक
  • कंस्लटेंट- सैलरी 3 से 4 लाख तक
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English summary
Doctor of Philosophy in Physiotherapy is a doctoral level course of 3 to 5 years duration. PhD in Physiotherapy can be done in both full-time and part-time mode. These courses mainly focus on the study of areas of physical therapy of disease such as massage, gymnastics etc.
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