कॉन्गिटिव साइंस में पीएचडी कैसे करें (Career in PHD Cognitive Science)

डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन कॉन्गिटिव साइंस (Cognitive Science) 3 से 7 साल तक की अवधि का डेक्टरेट लेवल का फुल-टाइम कोर्स है। पीएचडी इन कॉन्गिटिव साइंस कोर्स मुख्य रूप से फिलॉसफी, एंथ्रोपोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, न्यूरोसाइंस एंड लिंग्यूसटिक जैसे संबंधित क्षेत्रों के अध्ययन पर केंद्रित है।

 

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर कॉन्गिटिव साइंस में पीएचडी करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में कॉन्गिटिव साइंस में पीएचडी करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

कॉन्गिटिव साइंस में पीएचडी कैसे करें

• कोर्स का नाम- डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन कॉन्गिटिव साइंस
• कोर्स का प्रकार- डॉक्टरेट डिग्री
• कोर्स की अवधि- 3 से 7 साल तक
• एलिजिबिलिटी- मास्टर डिग्री
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम + पर्सनल इंटरव्यू
• कोर्स फीस- 29,000 से 4,50,000 तक
• अवरेज सैलरी- 1.2 से 10 लाख तक
• जॉब प्रोफाइल- रिसर्च साइंटिस्ट, कॉन्गिटिव साइकोलॉजिस्ट, प्रोफेसर, लेक्चरर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट आदि।
• टॉप रिक्रूटर्स- रिसर्च एंड डेवलेपमेंट, मेंटल हेल्थ थेरेपी, काउंसलिंग, एजुकेशन, एनजीओ, हेल्थकेयर आदि।

 

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास कॉन्गिटिव साइंस या उससे संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
• पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के पास मास्टर डिग्री में न्यूनतम 60% अंक होना आवश्यक है।
• आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 5% अंकों की छूट दी जाती है।
• इसके साथ ही, उम्मीदवार को एंट्रेंस एग्जाम में भी विश्वविद्यालय के मानकों तक स्कोर करना होता है, जो या तो विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं या यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं द्वारा आयोजित की जाती हैं।

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस: एडमिशन प्रोसेस
किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, उम्मीदवारों को एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता होती है। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद पर्सनल इंट्रव्यू होता है और यदि उम्मीदवार उसमें अच्छा स्कोर करते हैं, तो उन्हें स्कोलरशिप भी मिल सकती है।

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस के लिए भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है

चरण 1: रजिस्ट्रेशन

  • उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
  • ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • आवेदन पत्र सबमिट करें।
  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।

चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम

  • यदि उम्मीदवार पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
  • बता दें कि पीएचडी इन कॉन्गिटिव साइंस के लिए एडमिशन प्रोसेस जेआरएफ- यूजीसी- नेट, सीओजी जेईटी आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे इंट्रव्यू के आधार पर किया जाता है।

चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसके लिए, छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।

चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट

  • एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
  • इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है, और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें डॉक्टरेट स्तर पर कॉन्गिटिव साइंस का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस: सिलेबस

  • कॉन्गिटिव साइकोलॉजी, नर्वस सिस्टम एंड कॉन्गिटिव न्यूरोसाइंस
  • कॉन्गिटिव बायसिस एंड कॉन्गिटिव डिफिक्ट्स
  • न्यूरोलॉजिक्ल डेवलेपमेंट एंड कॉन्गिटिव चेंज
  • रिसर्च मैथेडलॉजी
  • एनालॉजी एंड कॉन्सेप्टचुअल सिस्टम
  • भाषा विकास
  • मेमोरी और लर्निंग
  • सेमिनार और फिल्ड स्टडी
  • थीसिस, परियोजना कार्य, निबंध

कॉलेज फक्लटी आमतौर पर छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि पीएचडी पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस : टॉप कॉलेज और उनकी फीस

  • आईआईटी कानपुर, उत्तर प्रदेश- फीस 64,050
  • हैदराबाद विश्वविद्यालय, तेलंगाना- फीस 29,770
  • जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल- फीस 32,000
  • आईआईटी गांधीनगर, गुजरात- फीस 1.28 लाख
  • आईआईटी मंडी, हिमाचल प्रदेश- फीस 60,200
  • आईआईआईटी हैदराबाद, तेलंगाना- फीस 4.5 लाख

पीएचडी कॉन्गिटिव साइंस: जॉब प्रोफाइल और सैलरी

  • कॉन्गिटिव साइकोलॉजिस्ट- सैलरी 3 से 9 लाख
  • साइकेट्रिस्ट- सैलरी 9. 67 लाख
  • रिसर्च साइंटिस्ट- सैलरी 6.85 लाख
  • प्रोफेसर- सैलरी 10 लाख
  • मेंटल हेल्थ थेरेपिस्ट- सैलरी 1.2 लाख
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

English summary
Doctor of Philosophy in Cognitive Science is a doctoral level full-time course of 3 to 7 years duration. The PhD in Cognitive Science course mainly focuses on the study of related fields like Philosophy, Anthropology, Computer Science, Artificial Intelligence, Neuroscience and Linguistics.
--Or--
Select a Field of Study
Select a Course
Select UPSC Exam
Select IBPS Exam
Select Entrance Exam
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X