पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी 3 से 5 साल तक की अवधि का कोर्स है। ये कोर्स उन छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है जो बायोटेक्नोलॉजी से संबंधित विषयों में रिसर्च करने में रूचि रखते हो। बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी कोर्स एक रिसर्च आधारित डॉक्टरेट कोर्स है जो बायोलॉजिकल केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, एनालिटिकल टेक्निक्स और बायोइनफॉरमैटिक्स जैसे विषयों के इर्द-गिर्द घूमता है।
चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी के करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

• कोर्स का नाम- डॉक्टर ऑफ फिलोसफी इन बायोटेक्नोलॉजी
• कोर्स का प्रकार- डॉक्टरेट डिग्री
• कोर्स की अवधि- 3 से 5 साल
• एलिजिबिलिटी- पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री इन बायोटेक्नोलॉजी या बायोइंफोर्मेटिक्स
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम बेस्ड
• कोर्स फीस- 10,000 से 1,50,000 तक
• अवरेज सैलरी- 3 लाख से 15 लाख तक
• जॉब प्रोफाइल- प्रोफेसर, बायोटेक्निकल रिसर्चर, मेडिकल कोडर, एसोसिएट रिसर्च साइंटिस्ट, बायोकेमिस्ट, मेडिकल साइंटिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, बायोमैन्युफैक्चरिंग स्पेशलिस्ट, प्रोडक्ट मैनेजर, मेडिकल कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट आदि।
• जॉब फील्ड- कॉलेज और विश्वविद्यालय, मेडिकल रिसर्च सेंटर, एग्रीकल्चर सेक्टर, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री, रिसर्च सेंटर आदि।
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास बायोटेक्नोलॉजी या बायोइंफोर्मेटिक्स में मास्टर डिग्री होनी चाहिए।
• पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के मास्टर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक होना आवश्यक है।
• जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 5% छूट मिलती है।
• इसमें एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय रिसर्च का कम से कम 2 साल का अनुभव होना चाहिए।
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी: एडमिशन प्रोसेस
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी में एडमिशन प्रोसेस कॉलेज से कॉलेज में भिन्न होती है। ज्यादातर कॉलेजों में बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर एडमिशन होता है। भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है।
चरण 1: रजिस्ट्रेशन
- उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
- ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
- आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
- मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन पत्र सबमिट करें।
- क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।
चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम
- यदि उम्मीदवार पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। एंट्रेंस एग्जाम के लिए छात्रों को रजिस्ट्रेशन करना होता है और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
- बता दें कि पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी के लिए एडमिशन प्रोसेस सीएसआईआर- यूजीसी-नेट, डीबीआई जेआरएफ, आईसीएमआर जेआरएफ आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे व्यक्तिगत साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है।
चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिज्लट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है। जिसके बाद छात्रों को उनकी रैंक अनुसार कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। रिजल्ट चैक करने के लिए छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।
चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट
- एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
- इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है, और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें डॉक्टरेट स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी: सिलेबस
बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी का सिलेबस छात्रों की रुचि अनुसार हर कॉलेज में अलग हो सकता है जबकि सामान्य सिलेबस निम्नलिखित है।
- मॉल्यूकलर बायोलॉजी
- बायोइंफोर्मेटिक्स एंड बायोस्टैटेटिक्स
- स्टैटेटिक्स एंड प्रोबेबलिटी थ्यौरी
- प्रोटिन बायोटेक्नोलॉजी
- इलेक्ट्रोफॉरेसिस एंड डीएनए सिक्वेंसिंग
- जिनोमिक्स
- क्रिटिकल रिवियू ऑन द रिसर्च कंडक्टिड
- ए रिसर्च रिव्यू रिपोर्ट
- वाइवा-वोक
आमतौर पर कॉलेज फैक्लटी पीएचडी करने वाले छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि पीएचडी पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी: टॉप कॉलेज और उनकी फीस
- स्टेला मैरिस कॉलेज चेन्नई, तमिलनाडु- फीस 2,000
- महिला क्रिश्चियन कॉलेज चेन्नई, तमिलनाडु- फीस 48,200
- माउंट कार्मेल कॉलेज बैंगलोर, कर्नाटक
- सेंट जेवियर्स कॉलेज अहमदाबाद, गुजरात- फीस 80,000
- किशनचंद चेल्लाराम कॉलेज मुंबई, महाराष्ट्र
- डीएवी कॉलेज चंडीगढ़- फीस 9,425
- महारानी लक्ष्मी अम्मानी कॉलेज फॉर विमेन बैंगलोर, कर्नाटक- फीस 44,000
- बिशप हेबर कॉलेज तिरुचिरापल्ली, केरल- फीस 30,000
- रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज मुंबई, महाराष्ट्र- फीस 12,000
- जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी जयपुर, राजस्थान- फीस 1,26,000
पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी: जॉब प्रोफाइल और सैलरी
- बिजनेस डेवलेपमेंट मैनेजर- सैलरी 6,00,000
- प्रोसेस डेवलेपमेंट साइंटिस्ट- सैलरी 4,00,000
- बायोकेमिस्ट- सैलरी 5,00,000
- बायोलॉजिक्ल/ क्लिनिकल टेक्नीशियन- सैलरी 5,50,000
- माइक्रोबायोलॉजिस्ट- सैलरी 4,00,000


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