पॉलिटिकल साइंस में एम.फिल कैसे करें (Career in M.Phil. Political Science)

मास्टर ऑफ फिलॉसफी इन पॉलिटिकल साइंस 1 साल की अवधि का पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च स्तर का कोर्स है। एम.फिल. इन पॉलिटिकल साइंस यानि कि राजनीति विज्ञान कोर्स देश के उन युवाओं में बहुत लोकप्रिय है जो राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं, राजनीति विज्ञान एक बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक विषय है, आपको यह भी पता होना चाहिए कि यह कोर्स भारत में एमफिल या पीएचडी करने वाले छात्रों द्वारा सबसे वांछित और चुना गया कार्यक्रम रहा है।

 

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको एम.फिल इन पॉलिटिकल साइंस से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर पॉलिटिकल साइंस में एम.फिल करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में पॉलिटिकल साइंस में एम.फिल करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

पॉलिटिकल साइंस में एम.फिल कैसे करें (Career in M.Phil. Political Science)

• कोर्स का नाम- मास्टर ऑफ फिलॉसफी इन पॉलिटिकल साइंस
• कोर्स का प्रकार- पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च
• कोर्स की अवधि- 1 साल
• एलिजिबिलिटी- मास्टर डिग्री
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम
• कोर्स फीस- 10,000 से 80,000 तक
• अवरेज सैलरी- 4 से 7 लाख तक
• जॉब प्रोफाइल- लेक्चरर, असिस्टेंट प्रोफेसर, बिजनेस पॉलिटिकल राइटर, पॉलिटिकल कंसल्टेंट आदि।
• जॉब प्रोफाइल- क्विस्लेक्स, माइंड क्रेस्ट, पैंजिया 3, यूनाइटेडलेक्स आदि।

 

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास पॉलिटिकल साइंस से संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
• एम.फिल इन पॉलिटिकल साइंस में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के पास मास्टर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक होना आवश्यक है।
• आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 5% अंकों की अतिरिक्त छूट दी जाती है।
• इसके साथ ही, उम्मीदवार को एंट्रेंस एग्जाम में भी विश्वविद्यालय के मानकों तक स्कोर करना होता है, जो या तो विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं या यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं द्वारा आयोजित की जाती हैं।

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस: एडमिशन प्रोसेस
किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में एम.फिल पॉलिटिकल साइंस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, उम्मीदवारों को एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता होती है। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद पर्सनल इंट्रव्यू होता है और यदि उम्मीदवार उसमें अच्छा स्कोर करते हैं, तो उन्हें स्कोलरशिप भी मिल सकती है।

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस के लिए भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है

चरण 1: रजिस्ट्रेशन

  • उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
  • ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • आवेदन पत्र सबमिट करें।
  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।

चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम

  • यदि उम्मीदवार एम.फिल पॉलिटिकल साइंस में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
  • बता दें कि एम.फिल पॉलिटिकल साइंस के लिए एडमिशन प्रोसेस सीएसआईआर यूजीसी नेट फॉर जेआरएफ, यूजीसी नेट फॉर जेआरएफ, एनबीएचएम एंट्रेंस एग्जाम आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे इंट्रव्यू के आधार पर किया जाता है।

चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसके लिए, छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।

चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट

  • एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
  • इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें एम.फिल पॉलिटिकल साइंस का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस: सिलेबस
सेमेस्टर 1
अनुसंधान क्रियाविधि
भारतीय राजनीति में हालिया रुझान और मुद्दे
प्रमुख राजनीतिक विचारक
कंप्यूटर अनुप्रयोग
सेमेस्टर 2
समकालीन राजनीतिक सिद्धांत
समकालीन भारतीय राजनीतिक विचार

कॉलेज फक्लटी आमतौर पर छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि मास्टर पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस: टॉप कॉलेज और उनकी फीस

  • प्रेसीडेंसी कॉलेज, चेन्नई- फीस 2,215
  • जेएनयू, नई दिल्ली- फीस 1,391
  • कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता अनुसंधान- फीस 4,400
  • हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद- फीस 8,670
  • सीयू, कालीकट- फीस 6,575
  • वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर- फीस 74,500
  • महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक- फीस 3,984
  • बीएएमयू, औरंगाबाद- फीस 22,231

एम.फिल पॉलिटिकल साइंस: जॉब प्रोफाइल एंड सैलरी

  • असिस्टेंट प्रोफेसर- सैलरी 6,00,000
  • बिजनेस पॉलिटिकल राइटर- सैलरी 3,00,000
  • प्रोजेक्ट ऑफिसर- सैलरी 4,41,000
  • पॉलिटिकल रिसर्च असोसिएट- सैलरी 6,50,000
  • प्रोग्राम ऑफिसर- सैलरी 4,00,000
  • पॉलिटिकल एडवोकेसी- सैलरी 6,00,000

इंग्लिश में एम.फिल कैसे करें (Career in M.Phil. English)

सोशियोलॉजी में एम.फिल कैसे करें (Career in M.Phil. Sociology)

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English summary
Master of Philosophy in Political Science is a Post Graduate Research level course of 2 years duration. M.Phil. These political science courses are very popular among the youth of the country who want to pursue a career in political science. As we all know, Political Science is a very interesting and informative subject.
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