लॉ में एम.फिल कैसे करें (Career in M.Phil. Law)

एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) इन लॉ 2 साल की अवधि का पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च स्तर का कोर्स है। इस कोर्स का उद्देश्य कानून, प्रशासन, मानवाधिकारों और विभिन्न न्यायिक पहलुओं को समझने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करना है। बता दें कि लॉ में एम.फिल फुल-टाइम और पार्ट टाइम दोनों मोड से की जा सकती है।

 

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको एम.फिल इन लॉ से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी से अवगत कराएंगे कि आखिर लॉ में एम.फिल करने के लिए एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए। इसका एडमिशन प्रोसेस क्या है, इसके लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम कौन से हैं, इसे करने के बाद आपके पास जॉब प्रोफाइल क्या होंगी और उनकी सैलरी क्या होगी। भारत में लॉ में एम.फिल करने के लिए टॉप कॉलेज कौन से हैं और उनकी फीस क्या है।

लॉ में एम.फिल कैसे करें

• कोर्स का नाम- मास्टर ऑफ फिलॉसफी इन लॉ
• कोर्स का प्रकार- पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च
• कोर्स की अवधि- 2 साल
• एलिजिबिलिटी- मास्टर डिग्री
• एडमिशन प्रोसेस- एंट्रेंस एग्जाम
• कोर्स फीस- 15,000 से 1,00,000 तक
• अवरेज सैलरी- 3 से 10 लाख तक
• जॉब फील्ड- न्यायिक सेवाएं, गैर सरकारी संगठन, लोक अभियोजन, कानूनी परामर्श आदि।
• जॉब प्रोफाइल- लोक अभियोजक, वकील, सिविल जज, शपथ आयुक्त, शिक्षाविद, कानूनी सलाहकार आदि।

 

एम.फिल लॉ: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
• इच्छुक उम्मीदवार के पास लॉ से संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
• एम.फिल इन लॉ में एडमिशन लेने के लिए उम्मीदवार के पास मास्टर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक होना आवश्यक है।
• आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 5% अंकों की अतिरिक्त छूट दी जाती है।
• इसके साथ ही, उम्मीदवार को एंट्रेंस एग्जाम में भी विश्वविद्यालय के मानकों तक स्कोर करना होता है, जो या तो विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं या यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं द्वारा आयोजित की जाती हैं।

एम.फिल लॉ: एडमिशन प्रोसेस
किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में एम.फिल लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, उम्मीदवारों को एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता होती है। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद पर्सनल इंट्रव्यू होता है और यदि उम्मीदवार उसमें अच्छा स्कोर करते हैं, तो उन्हें स्कोलरशिप भी मिल सकती है।

एम.फिल लॉ के लिए भारत के टॉप कॉलेजों द्वारा अपनाई जाने वाली एडमिशन प्रोसेस निम्नलिखित है

चरण 1: रजिस्ट्रेशन

  • उम्मीदवार ऑफिशयल वेबसाइट पर जाएं।
  • ऑफिशयल वेबसाइट पर जाने के बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आवेदन फॉर्म को भरने के बाद ठीक तरह से जांच लें यदि फॉर्म में गलती हुई तो वह रिजक्ट हो सकता है।
  • मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • आवेदन पत्र सबमिट करें।
  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ऑनलाइन फॉर्म की फीस जमा करें।

चरण 2: एंट्रेंस एग्जाम

  • यदि उम्मीदवार एम.फिल लॉ में एडमिशन लेने के लिए टॉप यूनिवर्सिटी का लक्ष्य रखते हैं, तो उनके लिए एंट्रेंस एग्जाम क्रेक करना अत्यंत आवश्यक है। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाते हैं। जिसमें की एंट्रेंस एग्जाम से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है जैसे कि एग्जाम कब और कहां होगा, आदि।
  • बता दें कि एम.फिल लॉ के लिए एडमिशन प्रोसेस क्लेट, जेएनयूईई, डीयूईटी आदि जैसे एंट्रेंस एग्जाम पर निर्भर करती है। योग्य उम्मीदवारों का चयन आगे इंट्रव्यू के आधार पर किया जाता है।

चरण 3: एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट
एंट्रेंस एग्जाम हो जाने के कुछ दिन बाद उसका रिजल्ट घोषित किया जाता है जिसके लिए, छात्रों को नियमित रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल की जांच करके खुद को अपडेट रखना चाहिए।

चरण 4: इंट्रव्यू एंड एनरोलमेंट

  • एंट्रेंस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रव्यू में उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा - या तो ऑनलाइन (स्काइप, गूगल मीट, ज़ूम) या ऑफ़लाइन छात्रों को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाकर।
  • इस दौरान, अन्य सभी एलिजिबिली क्राइटेरिया को क्रॉस चेक किया जाता है और यदि छात्र इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें एम.फिल का अध्ययन करने के लिए एडमिशन दिया जाता है।

एम.फिल लॉ: सिलेबस
फर्स्ट ईयर

  • अनुसंधान की मूल बातें
  • कानून में हाल के रुझान
  • एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान)
  • भारत का संविधान
  • अपराध
  • मानवाधिकार

सेकेंड ईयर

  • अंतर्राष्ट्रीय कानून
  • कन्वेंशन और प्रोटोकॉल
  • कानूनी प्रबंधन में कंप्यूटर अनुप्रयोग
  • अनुसंधान रिपोर्ट
  • मौखिक परीक्षा
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून

कॉलेज फक्लटी आमतौर पर छात्रों को उनके स्वतंत्र शोध कार्य में सहायता करते हैं, जबकि अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए छात्र सहायक के रूप में अपने प्रोफेसरों के अधीन काम करना चुन सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें इस बात की बेहतर समझ होगी कि मास्टर पूरी करने के बाद अगर वे प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो उन्हें किस तरह का काम करना होगा।

एम.फिल लॉ: टॉप कॉलेज और उनकी फीस

  • नेशनल लॉ स्कूल, बैंगलोर- फीस 50,000
  • दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली- फीस 30,000
  • उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद- फीस 45,000
  • एमिटी स्कूल ऑफ लॉ नोएडा- फीस 45,250
  • देश भगत विश्वविद्यालय, फतेहगढ़- फीस 20,000
  • गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा- फीस 4,500
  • एचएनजी विश्वविद्यालय, पटना- फीस 18,000
  • श्रीधर विश्वविद्यालय, पिलानी- फीस 52,000
  • स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ- फीस 32,362
  • मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई- फीस 4,200
  • एनयूजेएस कोलकाता- फीस 26,500
  • पश्चिम बंगाल न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता- फीस 65,000
  • क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर- फीस 65,000
  • जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर- फीस 29,500
  • मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर- फीस 57,700
  • एमएटीएस विश्वविद्यालय, रायपुर- फीस 20,000

एम.फिल लॉ: जॉब प्रोफाइल और सैलरी

  • पब्लिक प्रोसिक्यूटर- सैलरी 6 लाख
  • सिविल जज- सैलरी 6 लाख
  • वकील- सैलरी 5 लाख
  • ऑथ कमिश्नर- सैलरी 4.5 लाख
  • लीगल कंस्लटेंट- सैलरी 4 लाख

सर्टिफिकेट इन कॉर्पोरेट लॉ ऑनलाइन फ्री कोर्स (Free Online Certificate in Corporate Law After 12th) सर्टिफिकेट इन बिजनेस लॉ (Certificate in Business Law after 10th,12th)

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English summary
M.Phil (Master of Philosophy) in Law is a post graduate research level course of 2 years duration. The objective of this course is to provide a holistic approach to understanding law, administration, human rights and various judicial aspects. Explain that M.Phil in Law can be done in both full-time and part-time modes.
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