ऑस्ट्रेलिया ने 1 जुलाई, 2026 से वीजा आवेदन शुल्क में भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। अब सबक्लास 500 स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन शुल्क (VAC) बढ़कर 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) हो जाएगा। इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ेगा, जो वहां के इंटरनेशनल स्टूडेंट कम्युनिटी का एक बड़ा हिस्सा हैं। इस बदलाव को देखते हुए अब छात्रों को अपनी पढ़ाई के बजट और फाइनेंशियल प्लानिंग पर नए सिरे से विचार करना होगा।
2,500 AUD की यह नई फीस मौजूदा दरों के हिसाब से करीब 1.4 लाख भारतीय रुपये बैठती है। फीस में हुआ यह तगड़ा इजाफा मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर भारी बोझ डालेगा। इसके अलावा, टेम्परेरी ग्रेजुएट (सबक्लास 485) वीजा की लागत भी बढ़ रही है, जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां रुकना और महंगा हो जाएगा। भारतीय आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे पेमेंट करने से पहले फॉरेक्स रेट और अपने बैंक की ट्रांजेक्शन लिमिट जरूर चेक कर लें।

ऑस्ट्रेलिया स्टूडेंट वीजा फीस बढ़ने का क्या होगा असर?
सिर्फ वीजा फीस ही नहीं, बल्कि छात्रों को अब ओवरसीज स्टूडेंट हेल्थ कवर (OSHC) के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। साथ ही, विदेश में रहने के खर्चों को पूरा करने के लिए 'प्रूफ ऑफ सेविंग्स' (बचत के सबूत) के नियमों में भी बदलाव किया गया है। डिपार्टमेंट ऑफ होम अफेयर्स अब 'जेन्युइन स्टूडेंट' (GS) टेस्ट के जरिए आवेदकों की कड़ी जांच कर रहा है। अगर आपके डॉक्यूमेंट्स में कमी रही या आप इंग्लिश लैंग्वेज की शर्तों को पूरा नहीं कर पाए, तो बिना किसी रिफंड के आपका आवेदन तुरंत रिजेक्ट किया जा सकता है।
| वीजा का प्रकार | नई फीस (AUD) | अनुमानित खर्च (INR) |
|---|---|---|
| सबक्लास 500 | 2,500 | 1,40,000 |
| सबक्लास 485 | बढ़ गई है | मौजूदा रेट चेक करें |
बढ़ते खर्चों के बीच समय पर आवेदन करना बहुत जरूरी है ताकि आप एडमिशन की डेडलाइन न चूकें। छात्रों को अपनी एकेडमिक मार्कशीट, इंग्लिश टेस्ट स्कोर और मेडिकल रिपोर्ट जैसी चीजों की एक चेकलिस्ट पहले ही तैयार कर लेनी चाहिए। याद रखें, अगर आवेदन में गलती हुई और दोबारा अप्लाई करना पड़ा, तो आपको फिर से भारी-भरकम फीस देनी होगी, इसलिए सटीकता बहुत जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को देखते हुए कोर्स शुरू होने से कम से कम चार महीने पहले अप्लाई कर देना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया स्टूडेंट वीजा आवेदकों के लिए जरूरी बातें
इन बदलावों के जरिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार का मकसद अपने इंटरनेशनल एजुकेशन सेक्टर की क्वालिटी को और बेहतर बनाना है। हालांकि पढ़ाई अब महंगी हो गई है, लेकिन 'जेन्युइन स्टूडेंट्स' पर फोकस करने से वहां पढ़ने वालों का लॉन्ग-टर्म अनुभव बेहतर होगा। भारतीय छात्र इन बढ़ते खर्चों को मैनेज करने के लिए स्कॉलरशिप या फेलोशिप के विकल्पों को तलाश सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में एक सफल करियर बनाने के लिए वहां की लेटेस्ट पॉलिसीज से अपडेट रहना आपके लिए बेहद जरूरी है।


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