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Kalyan Singh की वो कहानी जिसे कोई नहीं जानता

राजनीतिज्ञ कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 में हुआ था वह राजनीति में 1985 से सक्रिय थे। वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी पार्टी को दो बार छोड़ा और फिर उसमें शामिल हुए। आइए आज उनकी जयंती पर आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बताएं।
Varsha Kushwaha
• राजनीति में प्रवेश करने से पहले, कल्याण सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक स्वयंसेवक थे।
• कल्याण सिंह को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद को अध्यापन का कार्य मिला।
• वर्ष 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कल्याण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उन्होंने 21 महीने तक जेल की सजा काटी।
• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के उनके कार्यकाल के दौरन ही बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था। जिस कारण उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। आईई ने पुलिस अधिकारियों को कारसेवकों पर गोली चलाने की अनुमति नहीं दी। 
• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान कल्याण सिंह बोर्ड परीक्षाओं में होने वाली नकल को बंद कर दिया। और इसे ध्यान में रखते हुए 1992 में उनकी सरकार द्वारा एंटी कॉपीइंग एक्ट, 1992 को लागू किया गया था।
• वर्ष 1997 में जब भाजपा सत्ता में आई, तो वह एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और उनकी सरकार ने जोर दिया गया कि प्राथमिक कक्षाओं की शुरुआत भारत माता और वंदे मातरम की पूजा से होनी चाहिए।
• 21 फरवरी 1998 में उन्हें मुख्यमंत्री के कार्यालय से हटा दिया गया था क्योंकि नरेश अग्रवाल ने कल्याण सिंह की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह की सरकार को खारिज कर दिया गया।
• इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार के इस रूप को अनुमति नहीं दी और नरेश अग्रवाल को भाजपा में वापस लौटना पड़ा। जिसके बाद कल्याण सिंह ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया और वापस सरकार बनाई।
• वर्ष 2004 में वह बीजेपी में शामिल हुए और बुलंदशहर से सांसद बने। लेकिन वर्ष 2009 में उन्होंने बीजेपी छोड़ दी और एटा से निर्दलीय में चुने गए। एक बार फिर 2014 में वह बीजेपी में शामिल हुए और जिसके बाद उन्हें राजस्थान के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया।
• उन्हें सार्वजनिक मामलों की श्रेणी के तहत पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था। उत्तर प्रदेश ।
उनका रक्तचाप बढ़ जाने के कारण उन्हें एसजीपीजीआई में स्थानांतरित कर दिया गया। काफि समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 21 अगस्त, 2021 में 89 साल की उम्र में सेप्सिस और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होने के कारण उनका निधन हो गया।
RD Burman Life Facts