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Army Day: 15 जनवरी को सेना दिवस मनाने की शुरुआत कैसे हुई

सेना दिवस की हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल भारत अपना 75वां सेना दिवस मनाने वाला है। भारतीय सेना की स्थापना 1 अप्रैल को 1895 में की गई थी लेकिन ये दिवस 15 जनवरी को क्यों मनाया जाता है ये एक बड़ा सवाल है, जिसके बारे में आपको इस स्टोरी के माध्यम से बताएं।
Varsha Kushwaha
15 जनवरी के दिन हर साल को सेना दिवस मनाया जाता है इस दिन की शुरुआत वर्ष 1949 में हुई थी।
भारत की आजादी के बाद 15 जनवरी 1949 में अंतिम ब्रिटिश सेना के प्रमुख द्वारा भारत के फील्ड मार्शल के एम करियप्पा को भारतीय सेना की कमान प्रदान की गई थी। फील्ड मार्शल के एम कपरिअप्पा भारत के पहले कमांड-इन-चीफ बने।
भारतीय सेना की कमान संभालने वाले के एम करियप्पा को सम्मानित करने के लिए और 15 जनवरी की तिथि को चिन्हित करने के लिए ही भारतीय सेना दिवस 15 जनवरी को मनाया जाता है।
भारतीय सेना दिवस के मनाने का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के जवानों द्वारा दिए गए निस्वार्थ बलिदान और बहादुरी को सम्मानित करने के लिए किया जाता है।
भारत की रक्षा में न जाने कितने सैनिक अपनी जान का बलिदान देते हैं। उनके द्वारा किए सुरक्षा के लिए किए योगदान लिए उन्हें सम्मानित किया जाता है।
के एम करियप्पा का पूरा नाम कोडंडेरो मडप्पा करियप्पा है, जिनका जन्म 28 जनवरी 1899 में आज के कर्नाटका में हुआ था।
कौन थे के एम करियप्पा?
जब उन्हें भार्तीय सेना की भर्ती के बारे में पता चला तो उन्हें उसके लिए आवेदन किया। वह उन 70 अवेदकों में से एक थे जिन्हें डेली कैडेट कॉलेज, इंदौर में प्रवेश प्राप्त हुआ।
1946 में के एम करियप्पा ने इंपीरियल डिफेंस कॉलेज यूके में प्रवेश लिया।
1947 में भारत की आजादी के बाद भारतीय सेना की कमान संभालाने के लिए के एम करियप्पा को चुना गया और 1949 में भारतीय सेना के प्रमुख ती उपाधी के एम करियप्पा को प्रदान की गई।
इस तरह से सेना दिवस की स्थापना की गई और तभी से आज तक इस दिवस को मनाया जाता है। भारत इस साल 75 वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है।
शुरुआत से पिछले साल (2022) तक सेना दिवस का आयोजन दिल्ली में किया जाता था लेकिन इस साल इस दिवस का आयोजन बेंगलुरु में किया जाएगा, साथ ही इस बार पहली बार आर्मी परेड का आयोजन भी किया जाएगा।
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