राणा सांगा के जीवन से जुड़ें रोचक तथ्य, UPSC के लिए महत्वपूर्ण
आज हम भारत के सबसे प्रसिद्ध महाराजा और मेवाड़ के शासक राणा सांगा के बारे में जानेंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर भारत के महान योद्धाओं, शासकों और महाराजाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आइये जानें राणा सांगा के जीवन से जुड़ें रोचक तथ्यों के बारे
महाराणा संग्राम सिंह को राणा सांगा के नाम से भी जाना जाता है।
मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के दादा महाराजा संग्राम सिंह एक साहसी राजपूत योद्धा थे। आज उनकी 541वीं जयंती मनाई जा रही है।
संग्राम सिंह का जन्म 12 अप्रैल 1482 को राजस्थान के मालवा मेवाड़ जिले में हुआ। उनके दादा का नाम राणा कुंभा था, जो अपने समय के सबसे शक्तिशाली राजपूत राजा माने जाते थे।
राणा सांगा उदयपुर में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे और राणा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे।
महाराणा संग्राम सिंह, महाराणा कुंभा के बाद सबसे प्रसिद्ध राजपुत महाराजा और शासक थे।
इन्होंने अपनी शक्ति के बल पर मेवाड़ साम्राज्य का विस्तार किया और उसके तहत राजपूताना के सभी राजाओं को संगठित किया।
राणा सांगा की वीरता की कहानियों खूब प्रचलित हैं। उन्होंने एक भुजा, एक आँख, एक टांग खोने व अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना पराक्रम नहीं खोया।
बाबर ने बाबरनामा में लिखा है कि राणा सांगा अपनी वीरता और तलवार के बल पर अत्यधिक शक्तिशाली शासक बन गया था।
कहते हैं, राणा सांगा ने अपने जीवन काल में 100 से अधिक लड़ाई लड़ी थी, जिनमें वह 99 बार जीते थे और केवल एक बार हार गए थे।
1519 में गुजरात और मालवा की संयुक्त मुस्लिम सेनाओं के बीच राजस्थान में राणा सांगा के नेतृत्व में गागरोण की लड़ाई लड़ी गई थी।
राणा सांगा बाबर को उखाड़ फेंकना चाहते थे, क्योंकि वह उन्हें एक विदेशी शासक मानते थे।
21 फरवरी 1527 को बयाना में राणा सांगा और बाबर की सेनाओं में युद्ध हुआ, जिसमें बाबर की सेना की सेना हार गई।