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Swami Vivekananda Jayanti 2023: स्वामी विवेकानंद की प्रमुख उपलब्धियां

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था। वह एक हिंदू भिक्षु, शिक्षक, दार्शिन, लेखक और हिंदू धर्म के प्रचारक थें। उनकी जंयती को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
Varsha Kushwaha
उन्होंने अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत रामकृष्ण परमंहस की शिक्षाओं से और उनके विचारों से प्रभावित हो कर की। उन्होंने जितना महाभारत, रामायण और गिता का ज्ञान प्राप्त किया उतना ही उन्होंने पश्चिम के विद्वानों की रचनाओं की जानकारी प्राप्त की।

 गले के कैंसर के बाद गुरु रामकृष्ण की मृत्यु के बाद स्वामी विवेकानंद समेत अन्य 15 शिष्य कलकत्ता के बारनगर में साथ में रहने लगे और उन्होंने मिलकर वहां रामकृष्ण मठ की स्थापना की। उन्होंने रामकृष्ण द्वारा प्राप्त शिक्षाओं को प्रचार किया।
रामकृष्ण मठ की स्थापना
नरेंद्र नाथ दत्त ने 1887 में सन्यास की प्रतिज्ञा ली और उनकी इस प्रतिज्ञा के बाद वह विवेकानंद के नाम से उभरे और इसी नाम से जाने गए।
विश्व धर्म संसद में शामिल हुए

कुछ समय बाद उन्होंने मठ को छोड़ा और पैदल यात्रा पर निकले उसी समय के दौरान उन्हें विश्व धर्म संसद के बारे में पता लगा। कई कठिनाई के बाद उन्हें इस सभा में हिस्सा लिया और अपने वेदांत के अध्ययन से सबको चकित कर दिया।
वेदांत कि स्थापना

 वेदांत सोसाइटी की स्थापना स्वामी विवेकानंद द्वारा अमेरिका में बीताएं समय के दौरान 1894 में की गई थी। इस सोसाइटा का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक रास्ते का बारे में बताना और वेदों की जानाकरी प्रदान करना है।
रामकृष्ण मिशन
भारत वापस लौटने के बाद उन्होंने कलकत्ता के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। जिसमें गरीबों और पेरशान लोगों के लिए स्कूल, कॉलेज और अस्पताओं की स्थापना की। साथ ही देश भर में यात्र कर लोगों को वेदांत का ज्ञान दिया।
सन फ्रांसिस्कों केंद्र

राधाकृष्ण मिशन के बाद उन्होंने एक बाद फिर पश्चिम की यात्रा की और इस दौरान उन्होंने सन फ्रांसिस्कों केंद्र की स्थापना की और कैलिफोर्निया में शांती आश्रम की स्थापना भी की।
राष्ट्रीय युवा दिवस
भारत में और उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए 1984 में उनकी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में चिन्हित किया गया। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्र की सेवा के लिए प्रोत्साहित करना है।
अपने जीनव काल में स्वामी विवेकानंद को कई ग्रंथों की रचना की जैसे- राजा योग, भक्ति योग, कर्म योग, ज्ञान योग। इसमें हिंदू दर्शन और वेदांत की अवधारणा के बारे में दिया गया है।
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