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Netaji सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े ये तथ्य हर कोई नहीं जानता

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कलकत्ता में हुआ। महात्मा गांधी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 'देशभक्तों का का देशभक्त' कहा था।
Narender Sanwariya
बोस एक आध्यात्मिक देशभक्त थे। वह स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस से प्रभावित थे। वह 15 वर्ष के थे जब वह पहली बार स्वामी विवेकानंद से रुबारू हुए।
स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 1921 से 1941 तक 11 बार गिरफ्तार किया गया। उन्होंने जेल में रहते हुए 1930 में कलकत्ता के मेयर का पद ग्रहण किया था।
जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो स्टेशन नेताजी द्वारा स्थापित किया गया था। 'जय हिंद', 'दिल्ली चलो', 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे नारे नेताजी द्वारा गढ़े गए थे।
जब नेताजी ने भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाने के लिए जर्मनी में अपना समय बिताया था, तब उन्होंने ऑस्ट्रियाई महिला एमिली शेंकी से शादी की थी। जर्मन अर्थशास्त्री अनीता बोस उनकी बेटी थीं।
नेताजी ने 1941 में इटली के तत्कालीन विदेश मंत्री गैलियाज़ो सीआनो से मुलाकात की थी जिन्होंने उनके साथ स्वतंत्रता की घोषणा के मसौदे पर चर्चा की थी। बोस उस दौरान अपनी पत्नी के साथ करीब 6 सप्ताह तक रोम में रहे थे।
नेताजी की मृत्यु आज भी रहस्य बनी हुई है। 18 अगस्त 1945 को ताइवान में विमान दुर्घटना की खबर के बाद ऐसा माना जाता था कि सुभाष चंद्र बोस ने 'साधु' का भेष धारण किया था और यूपी में रहते थे। लोग उन्हें गुमनामी बाबा के नाम से जानते थे।
नेताजी मेधावी छात्र थे। भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए सरकारी पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्हें 'फॉरवर्ड' अखबार के संपादक के रूप में जाना जाता था, जिसे उनके गुरु चित्तरंजन दास ने शुरू किया था। 'स्वराज' नामक एक समाचार पत्र भी उन्होंने शुरू किया।
1935 में नेताजी की 'द इंडियन स्ट्रगल' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई। वह महात्मा गांधी के सहयोगी और विरोधी दोनों थे। 74 साल पहले उनका कोर्ट-मार्शल किया गया था और अंग्रेजों द्वारा देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया था।
Swami Vivekanda Life