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राम प्रसाद बिस्मिल

जानिए कौन थे राम प्रसाद बिस्मिल जो लाए थे अपनी कविताओं के माध्यम से देश में आज़ादी की लहर
chailsy raghuvanshi
राम प्रसाद बिस्मिल एक प्रतिभाशाली कवि थे, जो कि राम, अज्ञेय और बिस्मिल के नाम से उर्दू और हिंदी में कविताएं लिखते थे।
राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून, 1887 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम मूलमती था।
"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़तिल में है" ये पक्तियां भारतीय स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल की कविता से ली गई थी।
बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य भी थे, जिनके अधिक लोकप्रिय क्रांतिकारी सदस्य भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद थे।
बिस्मिल ने अशफाकउल्लाह खान के साथ एक समान विचारधारा, आदर्श और गहरी देशभक्ति साझा की। वे एक साथ रहते थे, एक साथ काम करते थे और हमेशा एक-दूसरे का साथ देते थे।
अपनी आत्मकथा में, बिस्मिल ने एक पूरा अध्याय अशफाकउल्लाह खान के नाम समर्पित किया है। दोनों ने 1925 की प्रसिद्ध काकोरी ट्रेन डकैती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
काकोरी ट्रेन डकैती ने ब्रिटिश शासकों की जड़ें हिला दी थी। जिसके  एक महीने के भीतर बिस्मिल सहित करिब 24 से अधिक एचआरए सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था।
जिसके बाद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्लाह खान, रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को मौत की सजा सुनाई गई। जबकि अन्य एचआरए सद्स्यों को जेल में कैदी के रूप में रहने की सजा सुनाई गई।
लखनऊ सेंट्रल जेल में रहने के दौरान, बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा (1928 में पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित) लिखी, जिसे आज भी हिंदी साहित्य की बेहतरीन कृतियों में से एक माना जाता है।
जेल में रहने के दौरान ही बिस्मिल ने एक ऐसा गीत प्रस्तुत किया जो स्वतंत्रता पूर्व युग के सबसे प्रतिष्ठित गीतों में से एक बन गया। गाना है "मेरा रंग दे बसंती चोला"।
19 दिसंबर, 1927 को जह हिंद शब्दों के साथ बिस्मिल को फांसी पर लटका दिया गया था। फांसी पर चढ़ने से पहले बिस्मिल ने अपनी मां को अपना अंतिम पत्र लिखा।
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